डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Feb 27, 2011

देवदार के वृक्षों पर मड़राते देवदूत और सुन्दर परियां......

खूबसूरत पहाड़ी परियां
रेड बिल्ड ब्ल्यू मैगपाई (Red-billed Blue Magpie-Urocissa erythrorhyncha)

ये खूबसूरत नज़ारे थे इन परिन्दों के जिनका जिक्र किए बिना नही रह सका, नतीजतन आप सब के समक्ष प्रस्तुत है यह छोटा सा वर्णन उन देवदूतों और परियों का जिन्हे देवदार के वनों में उड़ते देखा था, हमने जब हम लौट रहे थे देवभूमि से सपाट धरती की ओर....ये तकरीबन ६-७ की तादाद में थे।

रेड बिल्ड ब्ल्यू मैगपाई एक खूबसूरत हिमालय की चिड़िया, जिसे मैने अपनी रानीखेत-कौशानी की अधूरी यात्रा के दौरान देखा, नैनीताल से काठगोदाम आते हुए इस पक्षी को पहाड़ियों के मध्य देवदार के वृक्षों पर इधर-उधर उड़ते देखा तो सहसा ब्रेक पर पैरों ने अपना कसाव तेज कर दिया, और हम थोड़ा लुढ़कने के बाद ठहर गये, सड़क के किनारे तमाम पल हमने इस खूबसूरत परिन्दे के साथ बिताये, जो कभी देवदार के इस वृक्ष से उस वृक्ष पर उड़ान भर रहे थे, कभी -कभी तो सड़क के किनारे खड़े एक पेड़ पर आ जाते जो मुझसे बहुत नज़दीक था, इन खूबसूरत घाटियों में पवित्र पेड़ों पर उड़ान भरते ये लंबी पूंछ वाले परिन्दे किसी देवदूत से कम नही लग रहे थे, मानों रंग-बिरंगी पोशाक में उड़ती परियां....! अदभुत नज़ारे जिन्होंने मन को उड़ान भरने पर मज़बूर कर दिया।

थोड़ा सा तस्किरा इन परिन्दों का
रेड बिल्ड ब्ल्यू मैगपाई
"उत्तरी एंव पूर्वी भारत, चीन एंव दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाती हैं। यह कौयें के परिवार से संबधित हैं नतीजतन यह अन्य पक्षियों के मुकाबले काफ़ी अक्लमंद होते हैं। ये चमकीले रंगों वाली चिड़िया जिसकी सुन्दर लम्बी एक जोड़ी नीले व सफ़ेद रंग की पूंछ जिसकी लम्बाई १७ इंच तक हो सकती है। ये अपना घर पहाड़ों के वनों में बनाती हैं। इनकी खूबसूरत पूंछ का अहम रोल होता है इनके प्रजनन के समय जब जोड़े बनाते वक्त एक दूसरे को आकर्षित करने में यह लम्बी पूंछ महत्व पूर्ण भूमिका रखती है।

इनका आहार छोटे कीड़े, स्तनधारी जीव, सर्प, छिपकलियां (सरीसृप) एंव घोघा (मोलस्का) इत्यादि है, प्राय: ये पक्षी छोटे समूहों में पहाड़ो की वादियों में जंगलों के ऊपरी हिस्से में चक्कर लगाते मिल जायेगे, जैसे कोई लड़ाकू विमान गहरी घाटियों में ग्लाइडिंग कर रहा हों। दरसल वृक्षों के ऊपरी हिस्से में मौजूद कीटों को आहार के रूप में प्राप्त करने का यह एक सामहिक उड़ान होती है। एक सामूहिक भोज ! ये अन्य पक्षियों के घोसलों से अण्डे चुरा कर खाने में भी माहिर होते हैं। यह अपना भोजन जमीन पर पड़े फ़लों, व पुराने सड़े वृक्षों से भ प्राप्त करते हैं।

इनका प्रजनन काल मार्च - मई है, यह अपने घोसले वृक्षों की शाखाओ में बुनते है, सथानीयखर-पतवार व पत्तियों आदि से, मादा रेड बिल्ड ब्ल्यू मैगपाई तीन से छ: अण्डे देती है।


नर व मादा लगभग एक ही आकार प्रकार व रंग रूप के होते हैं, सिर से गले तक काला रंग, शरीर पर बैंगनी-नीले रंग के पंख, तथा पंखों के किनारे सफ़ेद रंग के, जोड़ीदार पूंछ का छोर सफ़ेद रंग का होता है। इनकी चोच लाल रंग की, पैर गुलाब-लाल रंग के, आंखे काली, ये सूरत और सीरत है इस खूबसूरत पहाड़ी चिड़िया की।



कृष्ण कुमार मिश्र (लखीमपुर खीरी में निवास, प्रकृति की पाठशाला से कुछ कुछ निकालकर दुधवा लाइव पर अवतरित करते रहना, फ़ोटोग्राफ़ी, बर्ड वाचिंग, और भ्रमण पंसदीदा शौक है, इनसे krishna.manhan@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं )

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