डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jan 29, 2011

यहाँ का नज़ारा अदभुत है, इन विशालकाय पक्षियों की मौजूदगी से !

©Krishna
खूबसूरत परिन्दों की रिहाईशगाह
शाहजहाँपुर (२८ जनवरी २०११) फ़करगंज जहाँ रिहाईश है सैकड़ों क्रौंच की, यह गाँव पड़रा-सिकन्दरपुर का मौजा है, जहाँ एक विशाल झाबर (वेटलैंड) में तकरीबन १५० से अधिक सारस पक्षी मौजूद है। और ग्रामीण इनका सरंक्षण करते हैं। फ़करगंज के निवासी हरीराम जिनका घर इसी विशाल तालाब के नज़दीक है, बताते है कि सुबह सुबह सारस की तादाद और बढ़ जाती है, मार्च के महीने में अत्यधिक संख्या में इस पक्षी का इस गाँव में इकट्ठा होने की बात भी हरीराम ने बताई।

चारो तरफ़, गेहूं, मटर, सरसों की फ़सलो से आच्छादित खेतों के मध्य यह विशाल तालाब जिसके छिछले पानी में सैकड़ों सारस की एक साथ मौजूदगी एक सुन्दर दृष्य प्रस्तुत करती है। 

यह स्थल एक पर्यटन स्थल का दर्जा ले सकता है, और हरीराम जैसे उत्साही व्यक्ति गाइड के पेशे से अपना गुजारा भी कर सकते है, यदि सरकार इस स्थान को कुछ सरंक्षण का दर्जा दे दे।

वन्य-जीव फ़ोटोग्राफ़र सतपाल सिंह बताते हैं कि वह इस स्थान पर कई बार आ चुके है, यहां के ग्राम प्रधान नरेन्द्र सिंह व अन्य ग्रामीण इन पक्षियों की सुरक्षा के प्रति सजग हैं।

उत्तर प्रदेश में स्टेट बर्ड का दर्जा हासिल कर चुका यह पक्षी अत्यधिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण, व फ़सलों में गन्ने की बहुलता की वजह से प्रभावित हुआ है, पटते तालाब, भी एक मुख्य कारण है, ऐसे हालातों में फ़करगंज के लोग और वहां का यह तालाब दोनों इस खूबसूरत पक्षी के लिए मुफ़ीद साबित हो रहे है। उनके जज्बे को सलाम।

दुधवालाइव डेस्क

4 comments:

marie muller said...

BEATIFUL SYMBOL !

BIRDS OF UTTAR PRADESH!

Arunesh c dave said...

hats of to these villagers

कौशलेन्द्र said...

फकर्गंज के लोग काबिले तारीफ़ हैं, कि वे पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं और सारसों के प्रति गंभीर . जब मैं छोटा था तब हमारे गाँव के पास के झाबर में भी सारसों के जोड़े आया करते थे, इतने बड़े पक्षी हम बच्चों के लिए कौतुक का विषय huaa करते थे ......गाँव के एक श्रीवास्तव जी को यह पता लगते ही कि सारसों के जोड़े आये हुए हैं .....वे उनके शिकार को चल पड़ते थे ...तब इतनी अक्ल नहीं थी कि इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठायी जा सकती है ....गाँव का कोई व्यक्ति उनका विरोध नहीं करता था .....कुछ सालों बाद सारसों का आना बंद हो गया ....मुझे उस शिकारी परिवार के प्रति आज भी नाराज़गी है ....और गाँव के लोगों के प्रति भी ...कि उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया ....यह किस्सा उत्तरप्रदेश के कन्नौज जिले के पास स्थित एक गाँव उदेतापुर का है.

udanti.com said...

बहुत खूबसूरत। हमें इन पक्षियों की सैरगाह को बचाना होगा और इसके लिए हरीराम जैसे व्यिक्त जो निःस्वार्थ होकर इनकी सेवा में लगे हैं, के इस प्रयास को जन- जन तक पंहुचाना होगा, खासकर सरकार तक ताकि वे इस खूबसूरत पंछी के संरक्षण की दिशा में कुछ सोंचे।
-डॉ रत्ना वर्मा, रायपुर छत्तीसगढ़

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Featured Post

क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!