डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Nov 5, 2010

तमसो मा ज्योतिर्गमय

दीपावाली: दीपों की पंक्ति की तरह आप सभी की जीवन की कड़ियां सदैव दैदीप्तिमान होती रहें।
- दुधवा लाइव  

दीपावली के इस पर्व पर "दुधवा लाइव" की ओर से सभी को "अन्धकार से प्रकाश की ओर" उन्मुख होने की शुभकामनायें। इस पर्व के मूल में राम का आदर्श  जीवन है। राम जब १४ वर्षों के वनवास के पश्चात जब असत्य पर सत्य की विजयोपरान्त अयोध्या आये, तो कार्तिक मास की अमावस्या की वह काली रात घी के दियों से जगमगा उठी। दीप पूजा के ईसा से ५०० वर्ष पूर्व सिन्धु घाटी सभ्यता में भी प्रचलित होने के प्रमाण मिलते है।
मानव सभ्यता के प्रादुर्भाव में अग्नि-प्रकाश का जो महत्व है, वह अद्वितीय हैं। और भरत-वंशियों में पावक और प्रकाश का वर्णन अति-मनोहारी हैं, जहाँ पावक को साक्षी मान कर सभी दोषों से मुक्त मान लिया जाता है, और प्रकाश से मन की मलीनता का नाश हो जाने का अटल मनोभाव मौजूद हैं। प्रकाश कदाचित हमारे वाह्य वातावरण को ही प्रकाशमय नही करता बल्कि हमारे अन्तर्मन में प्रकाश  की ये बारीक किरणें चेतना, सत्य, विवेक, संवेदना एंव ज्ञान का प्रादुर्भाव करती हैं।
आप सभी को प्राचीन ऋग्वेद वेद की १८/३०/६ ऋचा में मानव कल्याण की जो कामना की गयी है, वह आप सभी के सम्मुख प्रस्तुत कर रहां हूँ, याद रहे शब्द मात्र शब्द नही जीवन का जीवन्त परिचय हैं !


आयने ते परायणे दुर्वा राहुन्त पुष्पिणी: ।
ह्र्दाश्च पुण्डरीकाणि समुद्र्स्य गृहा इमे ॥

"आप का मार्ग प्रशस्त हो उस पर पुष्प हो, नये कोमल दूब हो, आपके उद्यम व आप के प्रयास सफ़ल हो और आपके जीवन में मन को प्रफ़ुल्लित करने वाले कमल खिले हो।"
 
अन्त में पशुपति नाथ यानि महादेव से प्रार्थना है- कि दीपों के प्रकाश से मानव-जाति के वो सभी दुर्गणों का नाश हो, जो लोभ, मद, लिप्सा, अज्ञान, और अंहकार जैसे मनोभावों से युक्त मानव  द्वारा प्रकृति को छिन्न-भिन्न और वसुन्धरा को प्रदूषित करते आ रहे है।

राम के अयोध्या लौटने पर कैसे अयोध्या दीपों से उज्ज्वलित हुई थी, आप सभी तुलसी के मनोभावों में सुन सकते हैं जो शब्द  बन कर स्फ़ुटित हुए और राम चरित मानस का निर्माण हुआ।

रामचरितमानस के उत्तर काण्ड के उस अनुपम वर्णन को यहाँ सुने, जिसमें प्रेम, करूणा, सत्य, ज्ञान, नैतिकता, आर्दशता के सभी उच्च मापदण्ड मौजूद हैं।



दुधवा लाइव के पाठको एंव लेखकों को दीपों के पर्व पर मेरी तमाम शुभकामनायें।

मॉडरेटर-दुधवा लाइव
कृष्ण कुमार मिश्र




7 comments:

राजकुमार ग्वालानी said...

हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई
जब सब हैं हम भाई-भाई
तो फिर काहे करते हैं लड़ाई
दीवाली है सबके लिए खुशिया लाई
आओ सब मिलकर खाए मिठाई
और भेद-भाव की मिटाए खाई

Suman said...

ज्योति पर्व के अवसर पर आप सभी को लोकसंघर्ष परिवार की तरफ हार्दिक शुभकामनाएं।

संगीता पुरी said...

दीपावली का ये पावन त्‍यौहार,
जीवन में लाए खुशियां अपार।
लक्ष्‍मी जी विराजें आपके द्वार,
शुभकामनाएं हमारी करें स्‍वीकार।।

संगीता पुरी said...

दीपावली का ये पावन त्‍यौहार,
जीवन में लाए खुशियां अपार।
लक्ष्‍मी जी विराजें आपके द्वार,
शुभकामनाएं हमारी करें स्‍वीकार।।

sanu shukla said...

दीपमालिका के दीप-पर्व पर एक दीप हमारी मंगलकामनाओं का भी स्वीकार करें ....ईश्वर से प्रार्थना है कि खुशियों के दीपक
हमेशा आपके और दुधवा लाइव के प्रत्येक सदस्य k जीवन में अपनी रोशनी बिखेरते रहें...!!

Udan Tashtari said...

सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

-समीर लाल 'समीर'

एस.एम.मासूम said...

दीयों के इस पर्व दीपावली की आप को हार्दिक शुभकामनाएं
ये दीप पर्व आपके और आपके परिजनों के जीवन को खुशियों के प्रकाश से भर कर दे

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Featured Post

क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!