डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Apr 2, 2010

खीरी जनपद में तेंदुआ की खाल एंव हड्डियां बरामद

देवेन्द्र प्रकाश मिश्र*  पलियाकला-खीरी । सम्पूर्णानगर थाना पुलिस ने गुलदार की एक खाल बरामद करके चार अभियुक्तियों को गिरफतार किया है। इस तेंदुआ का शिकार साउथ-खीरी वन प्रभाग के भीरा परिक्षेत्र के जंगल में किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार सम्पूर्णानगर थाना पुलिस ने भारत-नेपाल सीमावर्ती ग्राम मिर्चिया के आगे नेपाल जाते समय चार अभियुक्तों को गिरफतार किया है। इनके पास से लुप्तप्रय वन्य-जीवों  की सूची में प्रथम पायदान पर चिन्हित गुलदार यानी तेंदुआ की एक खाल एवं उसकी हड्डिया बरामद की हैं। गिरफतार अभियुक्तों के नाम अल्लूराम पुत्र रंगीलाल, मूलचंद्र पुत्र हेमराज, पप्पू पासी पुत्र बदलू दाताराम पुत्र बालकराम ग्राम महेशापुर थाना भीरा का निवासी होना बताया गया है। 
जानकार सूत्रो ने बातया कि पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर उपरोक्त अभियुक्तों को मय तेंदुआ खाल सहित पलियाकलां पर स्टेशन स्थानीय पुलिस के सहयोग से पकड़ा था । यह अभियुक्त भीरा से ट्रेन द्वारा आए थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस तेंदुआ का शिकार किशनपुर वन- पशु विहार से सटे साउथ-खीरी वन प्रभाग की भीरा रेंज के जंगल क्षेत्र से किया गया होगा । इस बात को इससे भी बल मिल रहा है कि विगत दिनों भीरा रेंज क्षेत्र जंगल व ग्रामीण क्षेत्र में तेंदुआ घूमने का ढिंढोंरा वन विभाग के आलाअफसरों ने अखबारों में बयानबाजी करके कई बार पीटा था। इससे शिकारियों को तेंदुआ की लोकेशन आसानी से मिल गई और उसे मौत के घाट उतार दिया।
गौरतलब है कि वन विभाग के आला अफसर हो या फिर दुधवा नेशनल पार्क के उच्चधिकारी हों, यह स्वयं की पीठ थपथपाने के लिए बाघ, तेंदुआ, बाघिन या शावकों के घूमने की लोकेशन अखबारों में बयानबाजी करके उजागर कर देते हैं। जिसका फायदा शिकारी या वंयजीवों की खालों एवं उनके अंगो का अवैध कारोबार करने वाले तस्कर यूँ उठाते है क्योंकि लोकेशन का पता लगाने में उन्हे मशक्कत करनी होती है वह उन्हे आसानी से मिल जाती है । हाल ही में अखबारों में अधिकारियों के छपे बयानों को देखा जाए तो लगभग चार दर्जन शावकों के ऊपर खतरे की तलवार लटकी हुई है।

देवेन्द्र प्रकाश मिश्र (लेखक- स्वतंत्र पत्रकार एवं वाईल्ड लाईफर हैं, पेशे से एडवोकेट, दुधवा टाइगर रिजर्व के निकट पलिया में रहते हैं, इनसे dpmishra7@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।) 


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