डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Aug 5, 2016

उत्तर प्रदेश के तराई का पहला वन्य जीवन एवं कृषि पर आधारित हिन्दी-अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल दुधवा लाइव





आदरणीय पद्मभूषण बिली अर्जन सिंह की प्रेरणा और उनके आशीर्वाद का नतीजा है दुधवा लाइव- 

DudhwaLive-International Journal of Environment and Agriculture



दुधवा लाइव कृषि एवं पर्यावरण पर आधारित लखीमपुर खीरी जनपद का पहला अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल
जर्मनी के डायचे वेले संस्थान से द बाब्स एवार्ड और उत्तर प्रदेश सरकार से ई-उत्तरा सम्मान से सम्मानित हिंदी-अंग्रेजी में प्रकाशित व् प्रसारित दुधवा लाइव पत्रिका जो की यूनेस्को फ्रांस द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आई एस एस एन प्राप्त वैज्ञानिक जर्नल के तौर पर वन्य जीवन, पर्यावरण, एवं कृषि से सम्बंधित शोधपत्र, आलेख व् ख़बरें प्रकाशित करता है, जनवरी २०१० से शुरू होकर दुधवा लाइव वाइल्ड लाइफ से सम्बंधित हिन्दी की प्रथम वेबसाईट से २०१६ तक आते आते वैश्विक मानचित्र पर वैज्ञानिक जर्नल के तौर पर स्थापित हो चुकी है, दुधवा लाइव पत्रिका एवं दुधवा लाइव डॉट कॉम बैनर तले गौरैया बचाओ जन अभियान-२०१०, १८५७ की क्रान्ति के महानायक राजालोने सिंह गढ़ी सरंक्षण अभियान २०१५, तालाब सरंक्षण अभियान २०१६ तथा वृक्षारोपण व् जल सरंक्षण से सम्बंधित सफल जागरूकता अभियान चलाये जा चुके हैं.


डायरेक्टरी ऑफ़ रिसर्च जर्नल्स इंडेक्सिंग ने दुधवा लाइव जर्नल को किया सूचीबद्ध


अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी पत्रिका अथवा जर्नल की रैंकिंग व् प्रतिष्ठा इस बात से निर्धारित की जाती है की वह कितनी वैश्विक वैज्ञानिक जर्नल की संस्थाओं में सूचीबद्ध व् प्रमाणित की गयी है, दुधवा लाइव तमाम वैश्विक वैज्ञानिक संस्थानों में सूचीबद्ध है, कल डायरेक्टरी ऑफ़ रिसर्च जर्नल्स इंडेक्सिंग रोमानिया, ब्राजील और इंडिया द्वारा दुधवा लाइव जर्नल को सूचीबद्ध कर प्रामाणिक अंतर्राष्ट्रीय जर्नल के तौर पर मान्यता दी.
वन्यजीवन, पर्यावरण और कृषि पर आधारित रिसर्च पेपर दुधवा लाइफ में प्रकाशन हेतु भेज सकते हैं 


email- editor.dudhwalive@gmail.com 

दुधवा लाइव डेस्क 

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विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
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धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

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अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
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मुद्दा

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कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

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भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
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