वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

Breaking

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

ये जंगल तो हमारे मायका हैं

Jun 2, 2016

खंड-खंड होता बुंदेलखंड



'गौरहारी में अवैध खनन से श्रमिक की मौत,कई घायल'  



आगामी 31 मई को बुंदेलखंड आने वाले योगेन्द्र यादव,राजेन्द्र सिंह राणा और मेधा पाटेकर को इसके लिए आन्दोलन करना चाहिए ! इस डिजास्टर को रोकना बुंदेलखंड जल संकट का मूल हल है !

बुंदेलखंड- चरखारी ( गौरहारी गाँव )महोबा में गत 27 मई को दोपहर गौरा पत्थर की खदान में किये जा रहे अवैध खनन से मजदूरों की दबकर मौत हो गई ! दो सौ फिट गहरी अवैध पत्थर खदान को स्थानीय ठेकेदार देवेन्द्र सिंह के नाम से पट्टा था जिसको गाँव के मूंगालाल संचालित करते थे ! पट्टे का नवीनीकरण कई साल से नही हुआ है क्योकि आवश्यकता से अधिक पत्थर खनन किया जा चूका था ! बाजजूद इसके जिला खनिज अधिकारी बीपी यादव,जिलाधिकारी की चुप्पी के यह लाल पत्थर का खूनी आतंक चरम पर है ! उत्तर प्रदेश का खनिज मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति से लेकर जिलाधिकारी वीरेश्वर सिंह तक शामिल रहते है इस अवैध खनन में जो अधिकारी महोबा आता है वो जाने का नाम नही लेता है ! यही सूरत बाँदा और चित्रकूट की है ! सूखा प्रभावित क्षेत्र में यह तस्वीर लोकतंत्र के सरकार की है ! इस हादसे के बाद आला अधिकारी गौरहारी पहुंचे और देर रात तक रेस्क्यू आपरेशन करते रहे लेकिन भारी चट्टान में दबे अन्य श्रमिक अभी तक निकाले नही जा सके है ! मुआवजे के रूप में मृतक परिवार को दो लाख रूपये देने का निर्देश मुख्यमंत्री ने खनिज अधिकारी को निलंबित करके किये है ! गौरतलब है पिछले तीन दशक से यह गाँव गौरा पत्थर के खनन से पूरी तरह खोखला हो गया है,गाँव में आंतरिक सुरंगे बन चुकी है जिसमे अब तक सैकड़ों मजदूर अपांग और मौत के मुंह में जा चुके है ! इस पत्थर से टेलकम पाउडर और मूर्तियाँ बनती है ! गाँव के लोग ही अपनी समिति बनाकर लघु उद्योग के नाम पर मानकों को धता बतलाकर यह पताल तोड़ खनन उसी तर्ज पर करते है जैसे महोबा की अन्य बड़ी पत्थर मंडी में यह खेल चलता है ! गौरहारी में गाँव ही माफिया है जबकि बाकि हिस्से में नेता,विधायक सब एक पाले में है ! मै बीते दिन महोबा की धरती से यह सब देख रहा था ! 



क्या है मानक- 
मानक के मुताबिक रेलवे ट्रैक से 500 मीटर की दूरी पर क्रेशर जैसी गतिविधि मान्य है ! 

-किसी भी ऐतहासिकपुरातत्व स्थल के 100 मीतक खनन् कार्य वर्जित है तथा 200 मीतक खनन् व निर्माण कार्य के लिये पुरातत्व विभाग से एन00सी0लेना अनिर्वाय है जो कि नही ली जाती है।

-खदानों में ब्लास्टिंग का समय दोपहर से 12 बजे के अन्तराल है लेकिन 24 घन्टे होते है धमाके।

-एक क्रशर उद्योग से कच्चेमाल के रूप में स्टोन बोल्डर का प्रयोग कर लगभग 10,000 सी0एफ0टी की दर से ग्रेनाइट का उत्पादन किया जाये।

-क्रशर प्लान्ट में आकस्मिक स्वास्थ /ऐम्बुलेंस / डाक्टर की व्यवस्था हो जो कि किसी भी प्लान्ट में बुन्देलखण्ड मे नहीं है।

-क्रशर प्लान्ट में मजदूरों को पत्थरगिटटी तोडनेब्लास्टिंग करते समय मास्कहेलमेट उपलब्ध हो जो कि नहीं दिये जाते है।

-नेशनल हाइवेकृषि भूमिहरित पटिट्का से 1.0 किलो मीदूर स्थापित हो क्रशर उद्योगबालू खदान नदी से 500 मीकी दूरी पर लगाई जाय मगर यहाँ लगे है नेशनल हाइवेकृषि भूमि पद सैकड़ो प्लान्ट।

क्या होता है इस खनन के खेल में -
अमोनियम नाइट्रेट और जिलेट की छड़ से हैवी इंच का होल करके ड्रिलिंग मशीन से ब्लास्टिंग होती है ! नेचुरल डिजास्टर की तरफ है बुंदेलखंड का यह इलाका !

दिन - रात अर्थ मूविंग मशीन मसलन पोकलैंड,जेसीबी लगाकर दो सौ मीटर पहाड़ों को पताल तक खोदा जाता है जब तक पानी न निकले !

सूखे बुंदेलखंड में पानी की तबाही का नंगा नाच समाजवादी सरकार और बसपा सरकार ने हमेशा किया है,माफिया को सरकार का संरक्षण प्राप्त है ! जब कोई बड़ा हादसा हुआ तो निलंबन से होती है खानापूर्ति ! खनिज रायल्टी एमएम 11 प्रपत्र की चोरी करके तीन घनमीटर में 100 फिट दिखलाते है जबकि यह ओवेर्लोंडिंग सैकड़ो टन में है !

आशीष सागर (पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता)
बांदा, बुंदेलखंड 
 ashishdixit01@gmail.com


No comments:

Post a Comment

आप के विचार!

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

Post Top Ad

Your Ad Spot