वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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ये जंगल तो हमारे मायका हैं

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"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Sep 26, 2019

एक चिड़िया का क्रंदन...

Photo courtsey: Wikipedia, Karthik Easvur

मेरा ठौर ठिकाना छीना
दाना पानी खाना छीना
रैन बसेरा कहाँ बनाऊं
धरती अम्बर जंगल छीना

कलरव को ही दूर भगाया
घर पिंजरा जैसा बनवाया
पिंजरे में तो हम रहते थे
अब पिंजरे में खुद बंद कराया

आले ताखे में रहती थी
था वह मेरा रैन बसेरा
खिड़की से आती जाती थी
नही किसी ने मुझको घेरा

दादी नानी दाना देकर
मुझे बुलाती रहती थी
अम्माँ चावल बिखराती थी
हम दिनभर खाती रहती थी

अम्माँ रंग में मुझे थी रंगती
यह कहती जा फिर से आना
दादी दाना मुझे खिलाकर
पानी भी भरपेट पिलाती

अब भय्या ने ए सी लगवाया
खिड़की को दीवाल बनाया
छत पर टावर लगा हुआ है
जान का दुश्मन बना हुआ है

बेटे के हाथों में गन देकर
 बेटे के आंसू पोंछ दिए
मेरे बेटे की बलि लेकर
मुझको आँसू सौप दिए

मैं शाप भी दे दूं कैसे तुमको
तेरा दाना खाया है
अपने बेटे की बलि देकर
पन्ना का धर्म निभाया है

रमा शंकर मिश्र "मृदुल"
हिंदी सभा सीतापुर

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