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International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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Jul 23, 2016

आइये, जल मैत्री बढ़ायें

Water well of Raja Lone Singh of Mitauli





आइये, पानी से रिश्ता बनायें



नदियों को जोङने, तोङने, मोङने अथवा बांधने का काम बंद करो। रिवर.सीवर को मत मिलने दो। ताजा पानी, नदी में बहने दो। उपयोग किया शोधित जल, नहरों में बहाओ। जल बजट को जल निकासी में कम, वर्षा जल संचयन में ज्यादा लगाओ। नहर नहीं, ताल, पाइन, कूळम आदि को प्राथमिकता पर लाओ। 'फाॅरेस्ट रिजर्व' की तर्ज पर 'वाटर रिजर्व एरिया' बनाओ। ये सरकारों के करने के काम हो सकते हैं। पानी की ग्राम योजना बनाना, हर स्थानीय ग्रामीण समुदाय का काम हो सकता है। आप पूछ सकते हैं कि निजी स्तर पर मैं क्या कर सकता हूं  ? 
संभावित उत्तर बिंदुओं पर गौर कीजिए :

1.     पानी, ऊर्जा है और ऊर्जा, पानी। कोयला, गैस, परमाणु से लेकर हाइड्रो स्त्रोतों से बिजली बनाने में पानी का उपयोग होता है। अतः यदि पानी बचाना है, तो बिजली बचाओ; ईंधन बचाओ; सोलर अपनाओ। 

2.    दुनिया का कोई ऐसा उत्पाद नहीं, जिसके कच्चा माल उत्पादन से लेकर अंतिम उत्पाद बनने की प्रक्रिया में पानी का इस्तेमाल न होता हो। अतः न्यूनतम उपभोग करो; वरना् पानी की कमी के कारण कई उत्पादों का उत्पादन एक दिन स्वतः बंद करना पङ जायेगा। 

3.    एक लीटर बोतलबंद पानी के उत्पादन में तीन लीटर पानी खर्च होता है। एक लीटर पेटा बोतल बनाने में 3.4 मेगाज्युल ऊर्जा खर्च होती है। एक टन पेटा बोतल के उत्पादन के दौरान तीन टन कार्बन डाइआॅक्साइड निकलकर वातावरण में समा जाती है। लिहाजा, बोतलबंद पानी पीना बंद करो। पाॅली का उपयोग घटाओ।

4.    आर ओ प्रणाली, पानी की बर्बादी बढ़ाती है; मिनरल और सेहत के लिए जरूरी जीवाणु घटाती है। इसे हटाओ। अति आवश्यक हो, तो फिल्टर अपनाओ। पानी बचाओ; सेहत बचाओ।

5.    पानी दवा भी है और बीमारी का कारण भी। पानी को बीमारी पैदा करने वाले तत्वों से बचाओ। फिर देखिएगा, पानी का उचित मात्रा, उचित समय, उचित पात्र और उचित तरीके से किया गया सेवन दवा का काम करेगा।

6.    सूखे में सुख चाहो, तो कभी कम बारिश वाले गुजरात.राजस्थान के गांवों में घूम आओ। उनकी रोटी, खेती, मवेशी, चारा, हुनर और जीवन.शैली देख आओ। बाढ़ के साथ जीना सीखना चाहो, तो कोसी किनारे के बिहार से सीखो। बाढ़ और सुखाङ के कठिन दिनों में भी दुख से बचे रहना सीख जाओगे।

7.    प्याऊ को पानी के व्यावसायीकरण के खिलाफ औजार मानो। पूर्वजों के नाम पर प्याऊ लगाओ। उनका नाम चमकाओ; खुद पुण्य कमाओ।

8.    स्नानघर.रसोई की जल निकासी पाइप व शौचालय की मल निकासी पाइप के लिए अलग-अलग चैंबर बनाओ। गांव के हर घर के सामने सोख्ता पिट बनाओ। छत के पानी के लिए 'रूफ टाॅप हार्वेस्टिंग' अपनाओ। 

9.    जहां सीवेज न हो, वहां सीवेज को मत अपनाओ। शौच को सीवेज में डालने की बजाय, 'सुलभ' सरीखा टैंक बनाओ। 

10.    बिल्डर हैं, तो अपने परिसर में वर्षा जल संचयन सुनिश्चित करो। खुद अपनी जल-मल शोधन प्रणाली लगाओ। पुनर्चक्रीकरण कर पानी का पुर्नोपयोग बढ़ाओ। मल को सोनखाद बनाओ।

11.    फैक्टरी मालिक हैं, तो जितना पानी उपयोग करो उतना और वैसा पानी धरती को वापस लौटाओ। शोधन संयंत्र लगाओ। तालाब बनाओ।

12.    कोयला, तैलीय अथवा गैस संयंत्र के मालिक हैं, तो उन्हे पानी की बजाय, हवा से ठंडा करने वाली तकनीक का इस्तेमाल करो।

13.    किसान हैं, तो खेत की मेङ ऊंची बनाओ। सूखा रोधी बीज अपनाओ। कम अवधि व कम पानी की फसल व तरीके अपनाओ। कृषि के साथ बागवानी अपनाओ। देसी खाद व मल्चिंग अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ताा व नमी बचाओ। बूंद.बूंद सिंचाई व फव्वारा पद्धति अपनाओ। 

14.    जन्म, ब्याह, मृत्यु में जलदान, तालाब दान यानी महादान का चलन चलाओ। मानसून आने से पहले हर साल नजदीक की सूखी नदी के हर घुमाव पर एक छोटा कुण्ड बनाओ। मानसून आये, तो उचित स्थान देखकर उचित पौधे लगाओ। नदी किनारे मोटे पत्ते वाले वृक्ष और छोटी वनस्पतियों के बीज फेंक आओ।

15.    ''तालों में भोपाल ताल और सब तलैया'' जैसे कथानक सुनो और सुनाओ। जलगान गाओ। बच्चों की नदी.तालाब.कुओं से बात कराओ। पानी का पुण्य और पाप समझाओ। जल मैत्री बढ़ाओ। असल जल स्त्रोताें से रिश्ता बनाओ।

 अरुण तिवारी 
दिल्ली
amethiarun@gmail.com
9868793799

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