वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

Breaking

ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Apr 18, 2016

तालाब क़त्ल कर दिए गए क्योंकि विकास हो रहा है !

तालाबों का स्वामी बुंदेलखंड सूखे की चपेट में !
आशीष सागर,समाज कर्मी / भारतीय किसान यूनियन(भानु) प्रवक्ता बुंदेलखंड.
'' हजारों तालाब की कब्रगाह वाले बुंदेलखंड में दो हजार नए तालाब और ''

दो हजार और नए तालाब बनवाने जा रही उत्तर प्रदेश सरकार जिस पर 181.65 करोड़ रूपये यानी एक तालाब में नब्बे हजार,आठ सौ पचीस रूपये अनुमानित लागत आएगी ! यह तालाब किसान अपने खेत में बनाएगा ! उधर मनारेगा से बनाये गए सोखता गड्ढे,चन्देल कालीन उजाड़ तालाब सूखे है जिनमे पानी नही है ! वर्षा जल प्रबंधन की मिशाल में बने ये तालाब आज छतरपुर,पन्ना,टीकमगढ़,चित्रकूट का कोठी तालाब,गणेश बाग (पुरातत्व संरक्षण ) तक धूल फांक रहे या अवैध कब्जे के शिकार है सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद ! इसमे शामिल है लेखपाल,अपर जिलाधिकारी राजस्व और दबंग नेता/ लोग !...सवाल यह कि ये तालाब भरे कैसे
जायेंगे ? ...मतलब साफ है हर हाल में सरकारी मशीनरी किसान के नाम पर धन खाना चाहती है और आश्चर्य ये है कि ऐसे योजना की सलाह बुंदेलखंड के कुछ पानी वाले डमरूबाज दे रहे है !..'अपना तालाब ' का नाम देकर यह सलाह गत दिनों बाँदा के दौरे पर आये प्रदेश सरकार के सचिव अलोक रंजन को पडुई सुहाना में दी गई थी ! ऐसी ही योजना पूर्व बसपा सरकार में 'खेत तालाब ' आई थी जिसमे किसान को तालाब के बदले सिचाईं के लिए एक वाटर स्प्रिंकलर सेट मिलना था जो नही मिला वो मंत्री जी खा गए !...तालाबो के सुखाड़ का यह खेल उतना ही घातक होगा किसान के लिए जितना की किसान क्रेडिट कार्ड से उपजी आत्महत्या !...तस्वीर में महोबा का विजय सागर तालाब है ! इस नए दो हजार तालाब के खेल पर महोबा के गुगोरा निवासी किसान पंकज सिंह परिहार कहते है कि जब अपना तालाब जैसी योजनाएं लोगो के दिमाग में घुसेड़ी जा रही तब हम बूँद बूँद पानी को तरस रहे है ! ' पंकज सिंह ने बाँदा जिलाधिकारी योगेश कुमार के सामने कहा कि जब खेत में तालाब बनेगा तब खेत की उपजाऊ मिट्टी बहकर उसमे जाएगी क्योकि ढाल वही होगा ...खेत उर्वरा शक्ति से नष्ट होगा ,उसकी उपरी परत कमजोर होगी तब जिलाधिकारी चुप हुए !....बोले अभी फौरी इलाज कर दे बाद की देखि जाएगी मेरे साथ समीर आत्मज मिश्रा भी थे बीबीसी हिंदी ! ' 


                                      
एक ज़माना था जब बुंदेलखंड के खेती वाले इलाके में पूरे के पूरे खेत 4 महीने तालाब बने रहते थे हम अन्न धन से दुखी नही थे.बिना किसी उर्वरक के खेती में खूब पैदा करते थे सरकारों ने हमें लालच दिखाकर रासायनिक खाद दी हम आलसी हो गए खेतों को भरना छोड़ दिया. खेतों को इतना मुफ्तखोरी का लती बना दिया कि रसायन खाद बिना एक दाना भी पैदा नहीं कर सकते ! खतरनाक रासायनिक उर्वरकों से पैदा अनाज खाकर हम ऐसे हो गए की अपने
खेतों में पड़ी बंधियों को रूंध नही पाते बरसात का पानी बहा कर बारिश ख़त्म होने के बाद ही सूखा सूखा चिल्लाने लगते है। कभी खेत में मेड और मेड में पेड़ की परंपरा को चकबंदी खा गई है ! आज किसान की मेड में पेड़ नही मिलता है ! गौरतलब है कि महोबा का विजय सागर तालाब एक पक्षी अभयारण्य भी है ! विजय सागर एक झील है, जिसे 11वीं शताब्दी में मध्यप्रदेश के विजय पाल चंदेला ने बनवाया था। यह अभयारण्य शहर से पांच किमी दूर है और पक्षियों की कई प्रजातियों को अपनी ओर खींचता है। तैराकी और वाटर स्पोर्ट्स को पसंद करने वालों के लिए यह एक आदर्श
जगह थी जो अब वीरान है। मगर आज महोबा के कीरत सागर(पुरातत्व के संरक्षण में है ),मदन सागर,बाँदा के छाबी तालाब,बाबू राव गोरे तालाब,बाबू साहेब कैंट बाग़ स्टेडियम मार्ग,अतर्रा कसबे के कभी सौ - सौ बीघे में फैले तालाब मसलन मूसा तालाब (1.97 एकड़),धोबा तालाब (1.44 एकड़),दामू तालाब(7.88 एकड़), गंगेही तालाब ( 4.93 एकड़ ),घुम्मा तालाब (3.32 एकड़),भवानी तालाब (2.0 एकड़ ), गोठिल्ला तालाब ( एक एकड़ ), खटिकन तालाब ( 6 एकड़ ),भीटा तालाब ( 11 एकड़ ) इसके अतिरिक्त टेकना,गर्गन,देउरा बाबा तालाब अपने अस्तित्व को खो चुके है ! यही सूरत झाँसी के लक्ष्मी तालाब की जिसमे जल मंत्री उमा भारती का साइबर ऑफिस खुला है और अब एक बड़ी आवासीय कालोनी इस तालाब की छाती पर सीना ताने है ! बुंदेलखंड कभी अथाह जल राशी वाले तालाबों का गर्भ गृह था जो आज सूखे और जल त्रासदी की चपेट में है ! समय रहते हमें आवश्यकता है अपने प्राचीन तालाबों / कुएं को सहेजने की नही तो यह नए - नए पानी बचाने वाले तमाशे कमाई का साधन मात्र साबित होंगे यथा हुयें भी है !
स्रोत: प्रवासनामा 


आशीष सागर 
बांदा, बुंदेलखंड 
भारत 
ashish.sagar@bundelkhand.in 

No comments:

Post a Comment

आप के विचार!

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Post Top Ad

Your Ad Spot