वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Mar 13, 2014

जंगल का राजा सरकारी गिरफ्त में....



कब्जे में आए 'बिगड़ैल नवाब दुधवा में होगी मुलाकात

ढाई माह से इलाके में थी मौजूदगी, डिमरौल गांव की घटना के बाद बढ़ी थी दहशत

बिजुआ। अपने घर 'जंगल से खफा होकर निकले 'बिगड़ैल नवाब बाघ को सोमवार को पकड़े जाने के साथ इलाके के लोगों के दिलों से दहशत भी बिदा हो गई। बाघ पकड़ जाने की खबर सुनते ही लोगों का मजमा लग गया, हर कोई डिमरौल गांव के उस 'गुनाहगार को देख लेना चाहता था, जिसके सिर पर एक इंसानी कत्ल का इल्जाम था।

दिसंबर की २९-३० तारीख को सौनाखुर्द गांव में सुअर व उसके १० बच्चों को एक बाघ मार कर खा गया था। तीन दिन बाद एक बार फिर  गांव में बने पशुबाड़े से बाघ एक सुअर को घसीट ले गया। पहले तो वन विभाग इसे गुलदार बताता रहा, बाद में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रोजेक्ट आफीसर दबीर हसन ने गांव का दौरा कर पगमार्क देखे और बाघ की पुष्टि की। इसके बाद बहादुरनगर गांव के प्रधान के कुत्ते का शिकार हो जाने पर लोगों ने कहा कि बाघ ने ही मारा है। इस दौरान बाघ महेशापुर, गुलाबटांडा, रामालक्ष्ना, बहादुरनगर, अमरपुर, नौरंगाबाद, अंबारा में बाघ बकरी व कुत्तों को मारता रहा। इसी बीच लोगों ने गन्नों में नीलगाय के शिकार भी देखे। सौनाखुर्द में पहली आमद के बाद से महकमा मानता रहा कि बाघ जंगल चला गया। २०-२१ फरवरी की रात में डिमरौल गांव में शौच कर रहे छैलबिहारी को जब बाघ ने अपना शिकार बनाया तो महकमे बाघ की मौजूदगी मानी। 




....अब दुधवा में होगी इनसे मुलाकात

बिजुआ। भीरा रेंज के बहादुरनगर से पकड़ा गया बाघ देर शाम को दुधवा नेशनल पार्क के वान खेड़ा एरिया में बाघ को पिंजरे से रिलीज कर दिया गया। डब्ल्यूटीआई टीम के डा. देवेंद्र चौहान, डा. सौरभ सिंघई के अलावा पार्क प्रशासन के कर्मचारी, व वन महकमे के अफसर मौजूद रहे। टीम ने बताया कि करीब ४.३० बजे शाम को जैसे ही पिंजरे से बाघ छोड़ा गया, वह फुर्ती से दुधवा के खूबसूरत जंगल में चला गया।
सलीम



बाघ के खौफ में बंद रहे थे १७ स्कूल

बिजुआ। खीरी जिले में पहली बार हुआ था कि बाघ के खौफ में एक साथ १७ स्कूल बंद किए गए हों। 
जी हां, डिमरौल गांव की घटना के बाद बाघ के खौफ के चलते बच्चे व अध्यापक स्कूल आने से कतराने लगे, क्यों कि इस इलाके में बाघ की जहां मौजूदगी मिल रही थी, वहां के स्कूल गांव से बाहर खेतों में व जंगल के नजदीक बने हुए थे। 
सलीम

आपरेशन की कामयाबी में रहे सबके अहम रोल

बिजुआ। बाघ को बा-हिफाजत पकड़कर जंगल तक ले जाने में हर एक ने अहम किरदार निभाए। दुधवा नेशनल पार्क के कर्मचारी के अलावा हाथियों के दल, डब्ल्यूटीआई की टीम, वन विभाग के डीएफओ, एसडीओ व रेंजर के अलावा कर्मचारी, भीरा पुलिस, खाबड़ लगाने वाले दल के साथ लखनऊ चिडिय़ाघर से आए डा. उत्कर्ष शुक्ला समेत सभी का अहम रोल रहा। 

डब्ल्यूटीआई की टीम ने संभाली बड़ी जिम्मेदारी

बिजुआ। डब्ल्यूटीआई दुधवा नेशनल पार्क में एअरसेल के सहयोग से दो साल से बाघ-मानव संघर्ष को कम करने के प्रोजेक्ट के अलावा बाघ संरक्षण पर काम कर रही है। फरवरी २०१३ में साउथ खीरी रेंज में एक बाघ के लोहे फंदे में फंस गया था, तब इसी टीम ने बाघ को ट्रैंक्यूलाइज कर छुड़ाया था, अब वह बाघ लखनऊ के चिडिय़ाघर में है। सोमवार को एक बार फिर टीम को कामयाबी मिली।


.....एक शॉट और हो गया काम, शाबास-डा. उत्कर्ष
बिजुआ। जिले के आलाअफसरों की राय के बाद रविवार को लखनऊ से पहुंचे डा. उत्कर्ष शुक्ला ने कमान संभाली। सोमवार को करीब ११.४० मिनट पर हाथियों के दल ने बाघ को पछाड़ा,.... हाथी पर सवार डा. उत्कर्ष ने एक ट्रैंक्युलाइज शॉट मारा और टीम को संकेत दिया कि काम हो गया। उसके बाद टीम के लोग एक दूसरे को बधाई देने लगे। 



अब्दुल सलीम खान की शानदार रिपोर्ट भीरा-खीरी के जंगलों से, एक बाघ की मानव आबादी में मौजूदगी, घटनाएं और सरकारी कवायदों को बड़ी खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है, जंगल और जानवरों और इसानों के मध्य संघर्ष का एक बेहतरीन दस्तावेज। 
salimreporter.lmp@gmail.com




सभी फोटो अब्दुल सलीम खान 

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