वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jan 29, 2014

तराई के जंगलों में फिर मिली एक तेंदुए को मौत



लखीमपुर खीरी  और शाहजहांपुर के बार्डर पर छापा भोजी गाँव में लगभग तीन साल के तेंदुए का शव संधिग्द हालत में मिला , मोके से वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी नदारद ग्रामीण कर रहे है शव की रखवाली । लोगो का कहना है ये तेंदुआ कई दिनों से इलाके में घूम रहा था । उन्हें शंका है इसे किसी ने जहर दिया है ।यह बात सनद रहे की दुधवा नेशनल पार्क समेत पूरे खीरी जनपद के जंगलों में कभी तेंदुओं की तादाद बहुत थी जो आवासों के नष्ट होने से शिकार के चलते अब सिर्फ दहाई में इनकी सख्यां बची हुई है। इन हालातों में सरकार व् वन्य जीवन पर कार्य करने वाली संस्थाओं ने जल्दी कोइ मौजू कदम नहीं उठाये तो यह प्रजाति विलुप्त हो जायेगी खीरी जनपद से।

मनोज शर्मा
टी वी पत्रकार
मैलानी लखीमपुर खेरी

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