वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

Breaking

ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jan 25, 2014

दुधवा पार्क में दो गैंडों की लड़ाई में एक की मौत



लखीमपुर-खीरी। उत्तर प्रदेश के एकमात्र दुधवा नेशनल पार्क के इतिहास में पहली बार राइनो इलाका में दो मदमस्त गैंडों के बीच हुए प्रणय युद्ध में एक युवा गैंडा की मौत हो गई है। जिसका शव सलूकापुर के जंगल में गश्त के दौरान मिला है। युवा गैंडा के शरीर पर गंभीर चोटों के कई निशान मिले हैं। वीडियोग्राफी की निगरानी में शव का मौके पर ही तीन डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। गैंडे की मौत से पार्क प्रशासन में हड़कंप मच गया है। गैंडा के शव को दफन करके निकाले गए सींग को पार्क अधिकारियों ने अपनी देखरेख में जला दिया है। इससे पहले लगभग पंद्रह दिन पूर्व पार्क में एक गैंडा शिशु की मौत ठण्ड से हो गई थी।


दुधवा नेशनल पार्क के तहत सोनारीपुर रेंज क्षेत्र में विश्व की एकमात्र गैंडा पुनर्वास परियोजना चल रही है। 27 वर्गकिमी के संरक्षित जंगल में 30 सदस्यीय गैंडा परिवार स्वछंद विचरण करता है। इन दिनों गैंडों का प्रणयकाल चल रहा है। इसमें कई दिनों से मदमस्त युवा गैंडा भीम, नकुल, सहदेव को एकसाथ अक्रामक स्थिति में देखा जा रहा था। गैंडों के प्रणयद्वंद में गंभीर रूप से घायल हुए सहदेव को दो दिन पहले निगरानी करने वाले पार्क कर्मचारियों ने गस्त के दौरान देखा था।

इस पर बीते दिवस मानीटरिंग करने वाली हाथियों की टीम उसे सलूकापुर क्षेत्र के सुरक्षित जंगल में हांक कर खदेड़ लाई थी। मीयटिंग फाइटिंग में गंभीर रूप से घायल हुए युवा गैंडा सहदेव का इलाज षुरू हो पाता इससे पहले ही उसकी बीती रात मौत हो गई। दुधवा नेषनल पार्क के इतिहास में पहली बार प्रणय युद्ध में युवा गैंडा की हुई असमय मौत की सूचना पर खासी सनसनी फैल गई और पार्क प्रषासन में हड़कंप मच गया है। मामले से उच्चाधिकारियो को अवगत कराया। मौके पर दुधवा नेषनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह, वार्डन एके श्रीवास्तव स्टाफ सहित मौके पर पहुंच गए और मौका मुआयना किया।

 6 अगस्त 2002 में पैदा हुआ सहदेव मादा गैंडा हिमरानी का चैथा पुत्र था। वीडियोग्राफी की निगरानी में गैंडा के शव का पोस्टमार्टम राजकीय पशु चिकित्सालय के डाक्टर राजेश निगम, डाक्टर नीरज कुमार और डब्ल्यूटीआई के डाक्टर सौरभ सिंघई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के राइनो एक्सपर्ट रूचिर शर्मा, प्रणव चंचानी की देखरेख में कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गैंडा की मौत का कारण षरीर के नाजुक अंगों में लगी गंभीर चोटों को बताया गया है। गैंडा के शव् को दफन करने के बाद उसके निकाले गए सींग को पार्क के अधिकारियों ने अपनी देखरेख में जला दिया।

 दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह ने बताया कि प्रणय युद्ध में घायल हुए दूसरे गैंडा भीम और नकुल की खोजबीन के लिए टीमों को लगा दिया गया है, ताकि अगर जरूरत हो तो उनका इलाज किया जा सके। उन्होंने बताया कि गैंडों के बीच होने वाले इस प्रणय द्वंद को समाप्त करने के लिए जल्दी ही नर गैंडों का निकट बन रहे राइनो क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया जाएगा, इसके लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति मांगी गई है।


देवेंद्र प्रकाश मिश्र 
dpmishra7@gmail.com 


No comments:

Post a Comment

आप के विचार!

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Post Top Ad

Your Ad Spot