वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jun 9, 2013

बोलती कहानी "वो पुलिया वाली बरगदिया"

अब सुनिए उस " वो पुलिया वाली बरगदिया" की कहानी अर्चना चावजी की ज़ुबानी...

जी हाँ कृष्ण कुमार मिश्र का यह संस्मरण जिसे अर्चना चावजी ने अपनी आवाज दी है







 











 अर्चना चावजी पेशे से अध्यापन कार्य से जुडी है. ब्लॉग-जगत में इनका एक खासा स्थान है, पाडकास्टिंग विधा में कुछ बेहतर करने की कोशिश, साहित्य की नगरी इंदौर मध्यप्रदेश में निवास, इनका ब्लॉग है "मेरे मन की". इनसे archanachaoji@gmail.com पर संपर्क कर सकते है 






* DudhwLive Desk 

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