वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

Breaking

ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Mar 16, 2013

दुधवा नेशनल पार्क में एक चीतल का शिकार


 १६ मार्च (लखीमपुर-खीरी) दुधवा नेशनल पार्क की बेलाराया रेंज में कुछ  हथियार बंद शिकारी एक स्कार्पियों गाडी के साथ एक चीतल हिरन का शिकार करके भाग रहे थे, वन-विभाग की गस्त-टीम ने उनका पीछा किया मुठभेड़ के बाद एक शिकारी चीतल की लाश के साथ गिरफ्तार हुआ, सूत्रों के मुताबिक़ स्कार्पियों गाडी भी विभाग ने अपने कब्जे में ले ली है| पार्क प्रसाशन ने जल्द ही अन्य शिकारियों को गिरफ्तार कर लेने की बात कही है !

दुधवा में हिरणों की पांच प्रजातियाँ है जो की वन्य जीव अधिनियम १९७२ के अंतर्गत प्रतिबंधित सूची में है, साथ ही यह हिरन प्रजातियाँ बाघों का मुख्य आहार है| बाघों का मुख्य भोजन होने के कारण हिरणों की सुरक्षा व् उनकी सख्या में बढ़ोत्तरी हो इसके उपाय बेहद जरूरी है| ताकि तराई के इस जंगल में बाघों की मौजूदगी हमेशा बनी रह सके ! 


दुधवा लाइव डेस्क

No comments:

Post a Comment

आप के विचार!

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Post Top Ad

Your Ad Spot