वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Dec 17, 2011

विकिपीडिया में दुधवा लाइव को मिला स्थान



दुधवा लाइव पत्रिका के दो वर्ष- एक सफ़र
2011 गुजर रहा है, 2012 के मिलन को आतुर- इस अनुभूति में जनवरी 2010 से शुरू की गई यह ई-पत्रिका अपने दो वर्ष पूरे करने को है, इस यात्रा में इस पत्रिका को कहां कहां गौरव हासिल हुआ इसका एक सिजरा मात्र है-

विकिपीडिया- एक मुक्त ज्ञानकोष में दुधवा लाइव ई-पत्रिका का पन्ना, विवरण यहाँ मौजूद है।

विकिपीडिया के एक पन्नें में जहां पर्यावरण पर आधारित पत्रिकाओं का उल्लेख है, वहां दुधवा लाइव को भी सम्मलित किया गया है, इस पन्ने पर जाने के लिए यहां क्लिक करे।

दुधवा लाइव डेस्क

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जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

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