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International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Oct 19, 2011

मातृत्व- प्रकृति की अनुपम भेट

'मां तो आखिर मां 'है, इस ममता से हारी दुनिया सारी

कुदरत ने मां शब्द बनाया, लेकिन सीमांए नहीं बांधीं


फोटो एल्बम- कभी दुलारती है, तो कभी पुचकारती है, इस छबीली ने अभी अपनी कोख से बच्चों को भले जन्म न दिया हो लेकिन एक मां के नाते उसे बखूबी पता है, कि मां का दिल मां का होता है। इन फोटो में सिर्फ एक शब्द मां ही नजर आता है। कुत्ते व बिल्ली तो लड़ाई की बात है। गुलरिया में बिल्ली के बच्चों को कुतिया अपना दूध पिला रही है।

बिजुआ-लखीमपुर खीरी। वैसे तो कुत्ते एवं बिल्ली के बीच पुश्त दर पुश्त की दुश्मनी से जमाना बावस्ता है, लेकिन इनकी फितरत पर एक मां की ममता भारी है, एक मां के दिल में वही ममता होती है, फिर वो चाहे इन्सान हो या जानवर ही क्यों न हों। गुलरिया में कुछ ऐसी ही तसवीर सामने आई है, जिससे यह बात तो साफ हो गई कि मां का दिल कोई जाति-धर्म एंव वर्ग नही देखता।


बिल्ली के बच्चों को कुतिया पिला रही आंचल का दूध


अमूमन बिल्ली और कुत्ते के बीच दुश्मनी कहानी से लेकर हकीकत तक नजर आती है। लेकिन जब गुलरिया में एक बिल्ली दो बच्चों को जन्म देने के बाद मर गई, और बिल्ली के बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे, ऐसे में पालतू कुतिया ने इन बच्चों को मां का दुलार ही नही दिया, बल्कि अपने आंचल का दूध भी पिलाया। १३ दिन हो गए हैं, अब बिल्ली के बच्चे अपनी मां के लिए नही रोते, भूख लगने पर अपनी दुश्मन-माई के पास जाकर दूध पीते हैं। गुलरिया में लालाराम के घर के पास एक रात को बिल्ली ने आकर दो बच्चों को जन्म दिया। अगले दिन न जाने कैसे बिल्ली की मौत हो गई। एक दिन पहले पैदा हुए बिल्ली के बच्चे भूख से तडफ़ रहे थे। बच्चों को रोता देख लालाराम की कुतिया छबीली बच्चों के पास पहुंच गई, बिल्ली के पास छबीली को जाता देख घर वाले दौड़ पड़े, सोंचा कहीं इन बच्चों को ये मार न डाले। लेकिन छबीली इन बच्चों को चाटने लगी, और पास बैठ गई, अपनी बंद आंखों को लिए ये बच्चे उठे और कुतिया छबीली के आंचल से दूध पीने लगे। अब १३ दिन हो गए हैं, इस अनोखे मां के प्यार को लोग देखकर यही सोचते हैं, कि मां का दिल मां का ही होता है, जो न वर्ग देखता है, और न ही स्वभाव। अब बच्चों के कूं- कूं की आवाज न जाने कैसे छबीली तक पहुंच जाती है, और वह दौड़ती हुई अपने 'गोद लिए बच्चों को प्यार देने और भूख मिटाने आ जाती है। ये बच्चे भी अपनी मुंहबोली मां के साथ वैसे ही चिपक जाते हैं, जैसे वह ही इनकी पैदा करने वाली मां हो।



अब्दुल सलीम खान, (लेखक अब्दुल सलीम खान, प्रतिष्ठित दैनिक अमरउजाला के युवा पत्रकार हैं, जंगल एवं वन्यजीवों समेत जमीनी मसलों पर तीक्ष्ण लेखन, एवं खीरी जनपद के गुलरिया (बिजुआ) में निवास करते हैं, इनसे salimreporter.lmp@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं।)

3 comments:

  1. प्रेम और ममता प्राणियों के स्वाभाविक गुण हैं......हिंसा और शत्रुता इनके सामाजिक गुणों की विकृतियाँ हैं

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  2. तभी तो कहते हैं कि मातृत्‍व भगवान का दिया सबसे बड़ा वरदान है।

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  3. ye salim ji ka najariya hai, aur maa ki mamta

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