वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Apr 30, 2011

अरे वे तो उसी के रंग में रंग गये !

एक पहेली-
जानवर और वृक्ष- एक जैसी शक्ल-ओ-सूरत !
वनस्पति और जन्तु जो ढल गये एक ही शक्ल-ओ-सूरत में आखिर कैसे और क्यों ? 
जवाब आप से चाहिए !

मदार के पौधे के इस गहरे हरे रंग के माँसल पत्ते पर पर यह कौन ? सा जीव है जिसकी वाह्य सरंचना हूबहू मदार के इस पत्ते की तरह है ! क्या आप बतायेंगे इस खूबसूरत रचना का नाम जिसे प्रकृति ने कभी गढा था ।


Photo by: © Krishna Kumar Mishra


 प्रकृति के इस रूप को पहचानिए और अपने एहसासातों को जरूर जाहिर करिए दुधवा लाइव के माध्यम से...वैज्ञानिक नज़रिए के अलावा प्रकृति की इस सुन्दर कृति की अतुलनीयता, साज-सज्जा, एवं अनकहे रहस्यों को परिभाषित अवश्य करें ।

हमें इन्तजार है आप की महत्वपूर्ण टिप्पड़ियों का !

 
दुधवा लाइव डेस्क




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