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Mar 30, 2011

गोमती की कथा-व्यथा

प्रदूषण और अवैध कब्जौं के चलते घुट रही गोमती की सांस
- गोमती यात्रा करेगी आक्सीजन का काम
हरिओम त्रिवेदी
पुवायां (शाहजहांपुर)। इंद्र भगवान को गौतम ऋषि के श्राप से मुक्ति दिलाने वाली गोमती नदी सिसक रही है। प्रदूषण के चलते उसकी सांस घुट रही है। कुछ लोग नदी की धार तक पर अवैध कब्जा कर उसका अस्तित्व मिटाने पर तुले हैं। गोमती यात्रा से एक उम्मीद जगी है कि लोग यात्रा के माध्यम से मिलने वाले संदेश से जागरूक होंगे और पतित पावनी गोमती को प्रदूषण मुक्त कर उसकी अविरल धारा बहते रहने का प्रयास करने में सहभागिता करेंगे।
कहा जाता है कि इंद्र ने एक बार गौतम ऋषि का रूप धर कर उनकी पत्नी अहिल्या से छल किया था। कुपित गौतम ऋषि ने इंद्र और अहिल्या कौ श्राप दे दिया था। काफी अनुनय-विनय करने पर गौतम ऋषि ने श्राप मुक्ति के लिए इंद्र को पतित पावनी गोमती नदी के तटों पर १००० स्थानों पर शिवलिंग स्थापित कर तपस्या करने को कहा। इंद्र ने ऐसा ही किया, तब कहीं जाकर उनको ऋषि के श्राप से मुक्ति मिल सकी।
इंद्र को श्राप मुक्त कराने वाली आदि गंगा आज खुद की मुक्ति के लिए छटपटा रही है। तमाम स्थानों पर नदी तट तक कब्जा कर खेती की जा रही है तो घरों का मलवा और गंदगी नदी में डालकर उसका दम घोटने का प्रयास किया जा रहा है। अवैध खनन से भी नदी को गहरे घाव दिए जा रहे हैं। जीवनदायिनी को बचाने के लिए हम सबको आगे आना होगा। सोंचे ? जब जीवन देने वाली सदानीराएं ही नहीं रहेंगी तो धरती पर जीवन कैसे बचेगा।


आदि गंगा की यात्रा
गोमती का उद्गम स्थल पीलीभीत के माधौटांडा कसबे के पास (गोमत ताल) फुलहर झील है। पीलीभीत से चलकर आदिगंगा के नाम से मशहूर गोमती शाहजहांपुर, लखीमपुर, हरदोई, सीतापुर, मिश्रिख, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, वाराणसी के बीच ९६० किमी का सफर तय कर बनारस जिले के कैथी स्थित मारकंडेय महादेव के पास मां गंगा की गोद में विश्राम लेती हैं।


तटों पर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल
० पीलीभीत- उद्गम स्थल, त्रिवेणी बाबा आश्रम, इकोत्तरनाथ
० शाहजहांपुर- सुनासिरनाथ (बंडा), बजरिया घाट, पन्नघाट, मंशाराम बाबा, भंजई घाट, मंझरिया घाट,
० लखीमपुर-सिरसाघाट, टेढ़ेनाथ बाबा, मढि़या घाट,
० हरदोई- धौबियाघाट, प्राकृतिक जलस्रोत, हत्याहरण, नल दमयंती स्थल
० सीतापुर- नैमिषारण्य, चक्रतीर्थ, ललिता देवी, अठासी कोस परिक्रमा, दधीचि आश्रम, मनोपूर्णा जल प्रपात।
० लखनऊ- चंद्रिका देवी मंदिर, क्डिन्य घाट, मनकामेश्वर मंदिर, संकटमौचन हनुमान मंदिर
० बाराबंकी- महदेवा घाट, टीकाराम बाबा
० सुल्तानपुर- सीताकुंड तीर्थ, धौपाप
० प्रतापगढ़- ढकवा घाट
० ज्नपुर- जमदग्नि आश्रम
० वाराणसी- गौमती गंगा मिलन स्थल, (कैथी) मारकंडेय महादेव


आदि गंगा (गोमती की सहायक नदियां)
नदी मिलन स्थल

वर्षाती नाला - घाटमपुर (पीलीभीत)
झुकना, भैंसी, तरेउना - शाहजहांपुर
छौहा,अंधराछौहा, '- लखीमपुर
कठिना, सरायन, गौन - सीतापुर
सरायन - सीतापुर
कुकरैल, अकरद्दी - लखनऊ
रेठ, कल्याणी - बाराबंकी
कादूनाला - सुल्तानपुर
सई - जौनपुर

कैसे हो रहा नुकसान
० नदी तटों तक कब्जा कर खेती करने से
० प्रदूषित जल नदी में गिराने और मछलियौं के शिकार के लिए जहर डालने से
० नदी तटों के पेड़ काटने से
० जल प्रवाह रोंकने का प्रयास करने से
० गंदगी डालने से


क्या करना होगा
० नदी के किनारे पौधारोपण
० गंदगी और गंदे पानी को नदी में पहुंचने से रोकना
० नदी धारा को सुचारू बहने की व्यवस्था में सहयोग
0 पूजन सामग्री को नदी में नहीं डाल कर भू विसर्जन करना
० जल प्रबंधन करना, श्रमदान से सफाई आदि करना
० अवैध खनन रौकना, नदी के किनारों पर अवैध कब्जे रोंकना


यात्रा को लेकर उत्साह
गौमती यात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। २८ मार्च को बंडा से चलकर खुटार, गुटैया, पुवायां, पन्नघाट होते हुए बनारस जाने तक यात्रा का तमाम स्थानों पर भव्य स्वागत किया जाएगा। कई जगह गोष्ठियों का आयोजन लोगों को गोमती और उसकी सहायक नदियों को बचाने के लिए लोगों को  जागरूक किया जाएगा।





हरिओम त्रिवेदी (लेखक हरिओम त्रिवेदी अमर उजाला पुवायां शाहजहांपुर के तहसील प्रभारी हैं। निवास रायटोला खुटार, जनपद शाहजहांपुर, इनसे मोबाइल नंबर - 09935986765 एवं ई-मेल hariomreporter@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं)

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