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Feb 3, 2011

दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के स्थापना दिवस पर गोष्ठी का आयोजन

मानव-वन्य जीव संघर्ष निवारण विषय पर हुई चर्चा-
स्थापना:
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान
2 फ़रवरी 1977

(दुधवा लाइव डेस्क 2 फ़रवरी 2011) पलियाकलां-खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक शैलेष प्रसाद ने कहा कि पूरे संसार में दुधवा नेशनल पार्क की अपनी एक अलग पहचान स्थापित हो चुकी है यहां जैव विविधता का अमूल्य खजाना मौजूद है। इसके कारण दुधवा को  विश्व की धरोहर बनाने की चर्चा शुरू हो गई है लेकिन यह तभी संभव होगा जब वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा तथा संरक्षण में सभी का सक्रिय सहयोग प्राप्त होगा। 

एफडी श्री प्रसाद दुधवा पर्यटन परिसर के सभागर में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान सृजन दिवस पर आयोजित मानव वन्यजीव संघर्ष निवारण गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में दुधवा अतुलनीय है इसकी चर्चा विश्व बैंक द्वारा बैंकाक एवं वाशिंगटन में कराई गई दुधवा की जैव विधिता संरक्षण में क्षेत्रीय लोंगों द्वारा दिए जा रहे सहयोग में उनकी अहम भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां सब कुछ है इसीलिए वयंजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन्यजीव और मानव एक ही परिवार के दो पार्टस है जिससे संघर्ष की स्थितियां पैदा हो जाती है इस समस्या का आपस में समाधान किया जाना चाहिए। श्री प्रसाद ने दुधवा की प्रगति उन्नति में क्षेत्र के समस्त नागरिकों से सहयोग दिए जाने की अपील की। 

विश्व प्रकृति निधि भारत के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डा. मुदित गुप्ता ने मानव तथा वन्यजीवों के बीच बढ़ रहे संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वनों पर दबाव कम करने में गांवों में बनी ईको विकास समितियां महत्वपूर्ण योगदान कर रही हैं। किन्तु अनेक गांवों में निष्क्रिय समितियों को सक्रिय करने की जरूरत है इसमें सभी का सहयोग जरूरी है तभी यह आगे बढ पाएगी। डा. गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए शीघ्र ही गांव-गांव कार्यशाला एवं प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे।

दुधवा के उपनिदेशक संजय पाठक ने कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए वन्यजीवों का संरक्षण किया जा रहा है हमने जो देखा है वह अगली भी देखे ऐसे प्रयास सभी को करने होंगे। उन्होंने कहा कि पेड़ से ज्यादा दुनिया में कोई भी परोपकारी नहीं है बावजूद इसके उसकी अहमियत को नहीं समझ रहे हैं वनों का विनाश जारी रहा तो बढ़े प्रदूषण के कारण जैसे आज पानी बोतल में बिक रहा है उसी तरह भविष्य में एक दिन लोग आक्सीजन पैक साथ लेकर चलेंगे। श्री पाठक ने सवाल उठाया कि वन्यजीव जब किसी को नुकसान पहुंचाते हैं तो सभी देखते हैं लेकिन मानव क्या कर रहा है वह स्वंय नहीं देखता है आज मानव द्वारा बनाए गए संसाधनों से सर्वाधिक नुकसान मानव को हो रहा है उसकी अपेक्षा वन्यजीवों द्वारा पहुंचाई जाने वाली क्षति नगण्य है। श्री पाठक ने कहा कि वन्यजीव जंगल के गहने हैं उनकी रक्षा की जानी चाहिए इसके लिए क्षेत्र के निवासियों को भी सक्रिय होना पड़ेगा। दुधवा के पड़ोसियों को गर्व होना चाहिए कि वह यहां पैदा हुए हैं इसी बहाने वह वन्यजीवों की आगे बढ़कर सुरक्षा करें। 

पत्रकार डीपी मिश्र ने वन अपराध रोकने एवं वन्यजीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए जन सहयोग जरूरी बताते हुए उनको जागरूक करने पर बल दिया। थारू क्षेत्र के बिट्टा राना, राधेश्याम भार्गव, आदर्श मिश्रा आदि वयंजीव संरक्षण में सहयोग देने की बात कहते हुए ग्रामीणों को घासफूस आदि की सुविधा भी दिए जाने की बात कही।
दक्षिण सोनारीपुर रेंजर एसपी सिंह एवं उत्तर सोनारीपुर रेंजर गिरधरी मौर्या ने जंगल में घुसपैठ करके ग्रामीणर प्राकृतिक वास को क्षति पहुंचाते हैं इससे संघर्ष उत्पन्न होता है। इन परिस्थितियों को टालकर सभी लोग वन्यजीवों के संरक्षण में आगे बढ़ें। इसके अतिरिक्त वन क्षेत्र में ऐसी व्यवस्थाएं की जानी चाहिए जिससे चारा आदि के लिए वनपशु जंगल के बाहर न जाएं। गोष्ठी का संचालन करते हुए डा. मुदित गुप्ता ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर थारूक्षेत्र के प्रधान एवं तमाम ग्रामीण तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।

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