वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

Breaking

ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Feb 2, 2010

कतरनियाघाट वन्य जीव विहार

CROCODIL
* दुधवा लाइव डेस्क: संमुद्र तल से १७०-१९० मीटर ऊंचाई पर कतरनियाघाट वन्य जीव विहार बहराइच जनपद, उत्तर प्रदेश में स्थित है, इसकी सीमायें खीरी जनपद व नेपाल राज्य से सटी हुई है। सन १९७६ ईस्वी में इसे वाइल्ड-लाइफ़ सेन्क्चुरी का दर्जा हासिल हुआ। यहां टाइगर प्रोजेक्ट की शुरूवात की गयी और यह वन्य जीव विहार अब दुधवा टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत है। इस वन का विस्तार ४०० वर्ग किलो मीटर में है।

घाघरा व गेरुआ नदी के मध्य यह वन अदभुत वन्य संपदा का स्थल, जहाँ बाघ, तेन्दुयें, हाथी व गैंडों के अलावा पक्षियों, तितलियों एंव जलीय जीवों का सुन्दर व अदभुत संसार है।
विषेश रूप से पूरी दुनियां में कतरनियाघाट घड़ियाल, सूस व लुप्त हो रहे गिद्धों की वजह से मशहूर है।

No comments:

Post a Comment

आप के विचार!

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Post Top Ad

Your Ad Spot