वन्य जीवन एवं पर्यावरण

International Journal of Environment & Agriculture ISSN 2395 5791

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ये जंगल तो हमारे मायका हैं

बीती सदी में बापू ने कहा था

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jan 28, 2010

किशनपुर वन्य जीव विहार

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* दुधवा लाइव डेस्क: उत्तर प्रदेश के खीरी जनपद में स्थित यह वन सन १९७२ ईस्वी में वन्य जीवों के लिये संरक्षित किया गया। टाइगर प्रोजेक्ट शुरू होने पर इसे दुधवा टाइगर रिजर्व का हिस्सा बनाया गया। दुधवा से किशनपुर की दूरी लगभग ३० कि०मी० है। शाखू के घने वनों में अदभुत वन्य संपदा का विस्तार है।

यह जंगल बारहसिंघा और बाघों के लिये पूरी दुनिया में मशहूर है। यहाँ मानव आबादी के बढ़ते दबाव के कारण लगातार वन्य संपदा को नुकसान पहुंच रहा हैं। और शारदा नदी  में प्रत्येक वर्ष आती बाढ़  ने किशनपुर के झादी ताल की पारिस्थितिकी को काफ़ी प्रभावित किया है।

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