International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Jun 9, 2018

जहरीली हवा से मुक्ति के 13 रास्ते


वायु प्रदूषण से मुक्ति संभवः अमरीकी विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट ने सुझाए वायु प्रदूषण से निपटने के 13 तरीकेअगर सुझाव पर अमल हुआ तो देशभर में 40% कम हो जायेगा वायु प्रदूषण

नई दिल्ली। 30 मई 2018 अमेरिका की लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी (एलएसयू) की एक नयी रिपोर्ट में उन 13 उपायों के बारे में बताया गया है जिससे देश में वायु प्रदूषण को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है। साथ हीहर साल होने वाली लाख लोगों को मौत से बचाया जा सकता है। इन 13 उपायों को अपनाकर सर्दियों के समय दिल्ली सहित उत्तर भारत के पीएम 2.5 स्तर को 50 से 60 फीसदी तक कम भी किया जा सकता है।

इस रिपोर्ट में प्रदूषण के विभिन्न कारणों से निपटने के लिये बनी नीतियों का विश्लेषण किया गया है जिसमें थर्मल पावर प्लांट (चालूनिर्माणाधीन और नये पावर प्लांट)मैन्यूफैक्चरिंग उद्योगईंट भट्ठीघरों में इस्तेमाल होने वाले ठोस ईंधनपरिवहनपराली को जलानाकचरा जलानाभवन-निर्माण और डीजल जनरेटर का इस्तेमाल जैसी बातें शामिल हैं।

ग्रीनपीस के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया का कहना है, “हम लोग पहली बार विस्तृत और व्यावहारिक नीतियों को सामने रख रहे हैं जिससे सर्दियों में उत्तर भारत के वायु प्रदूषण को घटाकर आधा कम किया जा सकता है। हम पर्यावरण मंत्रालय से गुजारिश करते हैं कि वे इन उपायों को स्वच्छ वायु के लिये तैयार हो रहे राष्ट्रीय कार्ययोजना में शामिल करे और पावर प्लांट के लिये दिसंबर 15 में अधिसूचित उत्सर्जन मानकों को कठोरता से पालन करे। साथ ही अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कठोर मानकों को लागू करके प्रदूषण नियंत्रित करे।

रिपोर्ट के लेखक होंगलियांग जेंग कहते हैं, “हमारे शोध बताते हैं कि थर्मल पावर प्लांट के उत्सर्जन को कम करकेऔद्योगिक ईकाइयों के उत्सर्जन मानको को मजबूत बनाकर और घरों में कम जिवाश्म ईंधन जलाकर,ईंट भट्टियों को जिग-जैग पद्धति में शिफ्ट करके तथा वाहनों के लिये कठोर उत्सर्जन मानक लागू करके वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। हालांकि 13 उपायों के साथ-साथ एक व्यापक योजना बनाकर ही वायु प्रदूषण को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है और हर साल होने वाले लाख लोगों की मौत से बचा जा सकता है।


रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले कारकों से निपटने के लिये थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों के कठोर उत्सर्जन मानकों को लागू करने के बाद ही वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लायी जा सकती है। इसलिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना को मज़बूत बनाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा मांगे गए जन सुझावों के रूप में सीविल सोसाइटी संगठनोंकार्यकर्ताओं,वकीलों और अन्य विशेषज्ञों द्वारा दिये गए सुझावों में भी थर्मल पावर प्लांट के उत्सर्जन मानको को कठोरता से लागू करने की मांग की गयी थी।

सुनील कहते हैं, “एलएसयू के शोघ ने एकबार फिर वही बातें दुहराई है जिसकी मांग देश के लोग बहुत लंबे से समय से कर रहे हैं जिसमें थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों के लिये कठोर उत्सर्जन मानक बनाया जाना भी शामिल है। हालांकि पर्यावरण मंत्रालय लगातार थर्मल पावर प्लांट को उत्सर्जन मानकों के लिये छूट देने की कोशिश में है। दिसंबर 2015 में पर्यावरण मंत्रालय ने थर्मल पावर प्लांट को दो सालों के भीतर उत्सर्जन मानकों को पूरा करने की अधिसूचना जारी की थीजिसे अब वे अवैद्य तरीके से पांच साल और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के ड्राफ्ट में भी मंत्रालय ने विभिन्न सेक्टरों जैसे थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों के उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य को शामिल नहीं किया है।

सुनील अंत में कहते हैं, “इस रिपोर्ट में शामिल नीतियों के विश्लेषण से भारत के स्वच्छ वायु आंदोलन को बड़ी मदद मिलेगी। अगर पर्यावरण मंत्रालय लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में क्लीन एयर कलेक्टिव के सुझावों के साथ-साथ एलएसयू द्वारा इस रिपोर्ट में शामिल 13 उपायों को भी शामिल करना चाहिएजिससे सच में भारत की हवा को साफ बनायी जा सके।


For further details-
Avinash Kumar, Greenpeace India, avinash.kumar@greenpeace.org ; +91 8882153664
Sunil Dahiya, Greenpeace India, sdahiya@greenpeace.org; +91 9013673250
Professor Hongliang Zhang, Author of Report- hlzhang@lsu.edu

वानर शिशु के आँसू




                                                                            

                                                                  ------------------------------------------------

भारत के एक जंगल में बंदरों की एक अनोखी प्रजाति मकाका सिलेंस पाई जाती है। उस प्रजाति के अब अधिकतम लगभग 4000 बन्दर ही रह गए, कहे जाते हैं और वे सब भी विलुप्त होने के कगार पर खड़े है। 

एक दिन एक मदारी उस प्रजाती के नन्हे से बंदर को उठाकर उस जंगल से रवाना हो गया। मदारी ने उस नन्हे वानर को घर न ले जा कर पैसों की तात्कालिक ज़रूरतों के दबाव में शहर के चिड़ियाघर में बेच दिया। चिड़ियाघर में आने के बाद वह वानर घर से बिछड़ने के कारण दुःख और घबराहट में चीखने - चिल्लाने लगा, लेकिन उसका दुःख और दर्द किसी ने नहीं सुना। दूसरी तरफ उस जंगल में नन्हे वानर के परिवार में मातम छाया हुआ था। 

हर चिड़ियाघर में सुबह और शाम दो मीटिंग ही जीवों को खाना खिलाया जाता है। उस चिड़ियाघर में दिन के वक्त रमन जीवों को खाना खिलाता तो रात के वक्त अमित जो की बुज़ुर्ग था वह खाना खिलाता। रमन थोड़ा गड़बड़ आदमी था, वह नन्हे वानर का केला उसे खिलाने के बजाय खुद खा जाता था और वह नन्हा वानर कुछ न कर पाता सिवाय भूखे रहने के। शाम के वक्त जब अमित की बारी आती तो वह उस नन्हे वानर को केला खिलाने जाता था। उस वानर को देखते ही वह चकित सा रह जाता था, वह देखता था की नन्हे वानर का हाल अधमरा सा होता जा रहा है। वह देखते ही समझ गया की इस नन्हे वानर के खाने में ज़रूर कोई लापरवाही की जा रही है। वह उसे सारा केला खिला दिया और नन्हे वानर को अमित अच्छा लगने लगा था क्योंकि अमित ने उसे सारा केला खिला दिया और अब वह नन्हा वानर ठीक लग रहा था लेकिन उस नन्हे वानर का हाल बेहाल देखकर अमित का मन आत्मग्लानि से भरा पड़ा था। वह सोच रहा था की “हम इंसान कैसे होते जा रहे हैं, जीवों का खाना भी नहीं छोड़ रहे हैं, हम इंसानियत भूलते जा रहें हैं। हम इंसान ही अब अपनी गलती सुधर सकतें हैं।” अमित ने तुरंत चुपके से नन्हे वानर को चिड़ियाघर के पिंजड़े से निकालकर अपने झोले में छिपा लिया और वहां से निकल गया बिना किसी के नज़र में आए और इस काम में नन्हे वानर ने भी अमित का साथ दिया और शांति से उसके झोले में बैठा रहा। 

अमित उस वानर को अपने घर ले जा कर उसके हुलियानुसार अपने कम्प्यूटर पर उसके बारे में सर्च करने लगा, काफी सर्च करने के बाद उसे उस जगह का पता चल गया जहाँ पर उस नन्हे वानर की प्रजाती पाई जाती है और वह जगह पूरी दुनिया में एक थी, वह भारत में स्थित थी और उसका नाम भी उसमे अंकित  था। अमित बिना वक्त ज़ाया किए नन्हे वानर के संभावित स्थान के लिए उस नन्हे वानर के साथ निकल पड़ा। वह रास्ते भर यही मना रहा था कि बस इस नन्हे वानर का समूह मिल जाए तो मेरा यहाँ आना सफल हो जाएगा। उस नन्हे वानर को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह बूढ़ा व्यक्ति उसे कहाँ ले जा रहा है लेकिन फिर भी वह नन्हा वानर उसपर विश्वास किए शांति से बैठा हुआ था। नन्हे वानर के संभावित स्थान से चार किलोमीटर पहले ही अमित ने नन्हे वानर जैसे कुछ वानरों को देखा उन्हें देखते ही उसने नन्हे वानर को उन्हें दिखाया, उन्हें देखते ही नन्हे वानर ने उनकी ओर हाँथ फेंका। नन्हे वानर को हाँथ फेंकता देख अमित समझ गया कि वह सही गजह आया है और अमित फॉरन अपने वाहन से उतरकर नन्हे वानर को जमीन पर छोड़ दिया। छूटते ही नन्हा वानर अपने वानरी समूह के पास दौड़ पड़ा। यह सब देखकर अमित की आँखों में बिछड़े परिवार से मिलन सुख के आँसू सहसा निकल पड़े।



-वैशम्पायन चतुर्वेदी

कक्षा :- X-C, सेंट जॉन्स स्कूल, डी.एल. डब्लू., वाराणसी -221005

निवास :- 3/16, कबीर नगर, दुर्गाकुंड, वाराणसी-221005

Cell : 9415389731


विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था