International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Dec 31, 2015

पद्म भूषण बिली अर्जन सिंह की सातवीं पुण्यतिथि पर बाघ सरंक्षण पर कार्यशाला

Jasbeer Nagar-Pallia

विश्व विख्यात बाघ सरंक्षक पद्म भूषण बिली अर्जन सिंह की स्मृति में बाघ सरंक्षण पर कार्यशाला का आयोजन-

Billy Arjan Singh 
(15 Agust 1917-01 Jan 2010)
पलिया-खीरी, कल दिनांक एक जनवरी 2016 को पद्म भूषण स्वर्गीय बिली अर्जन सिंह की 7वीं पुण्यतिथि पर दुधवा लाइव संगठन द्वारा टाइगर मैन बिली अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि दी जायेगी जिसमें अर्जन सिंह से जुड़े हुए लोग, पर्यावरणविद्, वन्य जीव प्रेमी व् जनपद के छात्र छात्राएं उपस्थित रहेंगें। कार्यक्रम के संयोजक वन्य जीव विशेषज्ञ व् संस्थापक दुधवा लाइव कृष्ण कुमार मिश्र के संयोजन में यह कार्यक्रम कराये जाएंगे।
कार्यक्रम रूपरेखा- 

1-प्रात: बिली अर्जन सिंह की टाइगर हैवेन स्थित समाधि पर पुष्पांजलि।

2-दोपहर सम्पूर्णानगर मार्ग पर स्थित बिली साहब के आवास पर बाघ सरंक्षण जागरूकता विषय पर गोष्ठी।
3- सांयकालीन जसवीर नगर में बिली अर्जन द्वारा बाघ व् तेंदुओं पर किए गए प्रयोगों से सम्बंधित फ़िल्में दिखाई जाएंगी।
बिली अर्जन सिंह के जसवीर नगर स्थित आवास के मौजूदा सरंक्षक व् ऑनर वन्य जीव प्रेमी व् बिली के जीवन पर आधारित पुस्तक टाइगर ऑफ़ दुधवा के लेखक शमिन्दर बोपाराय कार्यक्रम का संचालन करेंगें।

बाघ सरंक्षण व् दुधवा नेशनल पार्क की अतुलनीय जैवविवधिता पर वन्य जीव विशेषज्ञ गोष्ठी में एक विमर्श आयोजित करेंगे ताकि तराई की इस हरी भरी धरती को सरंक्षित व् सवंर्धित किया जा सके।

कार्यक्रम में दुधवा नेशनल पार्क के उप निदेशक पी पी सिंह, राज्य सभा सांसद रवि प्रकाश वर्मा, डॉ वी पी सिंह  वन्य जीव बोर्ड उत्तर प्रदेश के सदस्य विधायक सुनील कुमार लाला, स्थानीय विधायक पलिया रोमी साहनी, वनस्पति विज्ञान प्रवक्ता ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, और बिली अर्जन सिंह से जुड़े हुए तमाम लोग महान बाघ सरंक्षक को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र छात्राएं इस आयोजन में हिस्सा लेंगे जिन्हें बिली अर्जन सिंह के बाघ सरंक्षण की महान कहानियों से परिचित कराया जाएगा ताकि भविष्य में यह नही पीढ़ी बाघ और जंगल के रिश्ते को समझ सके और समाज में वन्य जीवन के सरंक्षण का सन्देश प्रसारित व् प्रचारित करने के लिए प्रेरित हो।

दुधवा लाइव डेस्क 

Dec 25, 2015

नार्थ खीरी वन प्रभाग में एक जंगली हाथी की मौत



लखीमपुर-खीरी, बुधवार २३ दिसम्बर को दुधवा नेशनल पार्क से सटे नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन में एक जंगली हाथी की मौत हो गयी, घटना नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन की पलिया रेंज के मकनपुर बीट की बताई जा रही हैं, ग्रामीणों ने जंगली हाथी के शव को देखकर वन विभाग को सूचित किया, वन अधिकारी मौके पर पहुँच कर शव को अपने कब्जे में लिया, मौत के कारण अज्ञात बताये जा रहे हैं, सूत्रों के मुताबिक़ हाथी के शरीर पर कोइ भी चोट के निशान मौजूद नही हैं और न ही आपसी संघर्ष के कोइ चिन्ह मिले हैं.



डाक्टर नेहा सिंघई, सौरभ सिंघई, डी आर निगम ने हाथी के शव का पोस्टमार्टम किया, रिपोर्ट में मौत का कारण स्वाभाविक बताया गया है. पोस्टमार्टम के बाद शव को मौके पर दफ़न कर दिया गया, इस दौरान दुधवा नेशनल पार्क के डी डी पी पी सिंह, एस डी ओ अशोक कुमार, नार्थ खीरी वन प्रभाग पलिया के रेंजर आर के दीक्षित मौजूद रहें.

गौर तलब है दुधवा नेशनल पार्क से सटे नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से हाथियों का माइग्रेशन दुधवा व् खीरी के नार्थ फारेस्ट डिवीजन में प्रत्येक वर्ष होता है, साथ ही स्थाई तौर पर भी दुधवा में जंगली हाथी मौजूद हैं.

दुधवा लाइव डेस्क    

Dec 16, 2015

पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघिन ने उ.प्र. में दी दस्तक



बाघों के पुराने कॉरीडोर को चिन्हित कर रही है यह बाघिन 
सुरक्षा हेतु अनुश्रवण दलों व दो हांथियों को किया गया तैनात 
पन्ना, 10 दिसम्बर - 
म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व में जन्में बाघ अब पडोसी राज्यों के जंगल में भी दस्तक देने लगे हैं. यहां बाघों का घनत्व अधिक होने के कारण युवा नर व मादा बाघ अपने लिए नये घर की तलाश में बाहर निकल रहे हैं. बीते माह 24 नवम्बर को पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से बाहर निकली दो वर्ष की युवा बाघिन पन्ना - 213 (22) उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में पहुंच गई है, फलस्वरूप बांदा, कर्बी व चित्रकूट वन मण्डल के अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है. 

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आलोक कुमार ने बताया कि मौजूदा समय बाघिन पन्ना - 213 (22) उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में विचरण कर रही है. इस बाघिन की सुरक्षा हेतु पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के द्वारा अनुश्रवण दलों के साथ दो प्रशिक्षित हांथियों को तैनात किया गया है. टाइगर रिजर्व के अधिकारी उत्तर प्रदेश वन विभाग के आला अफसरों, वन संरक्षक बांदा, वन मण्डलाधिकारी कर्बी तथा वन मण्डल चित्रकूट के सतत संपर्क में हैं. आलोक कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग एवं जिला प्रशासन से बाघिन की सुरक्षा एवं अनुश्रवण में आवश्यक सहयोग प्राप्त हो रहा है. क्षेत्र संचालक ने बताया कि चूंकि पन्ना टाइगर रिजर्व से पहली बार किसी बाघिन के इस तरह से बाहर लम्बी दूरी पर निकलने की जानकारी हुई है, इसलिए उसके स्वभाव तथा नये भौगोलिक क्षेत्र में विचरण की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है. 

दिसम्बर 2013 में जन्मी थी यह बाघिन 
पन्ना बाघ पुर्नस्थापना योजना की सफलतम रानी कही जाने वाली कान्हा की बाघिन टी - 2 ने पन्ना - 213 को अक्टूबर 2010 में जन्म दिया था. बाघिन पन्ना - 213 ने नर बाघ पन्ना - 111 से जोड़ा बनाकर दिसम्बर 2013 में चार शावकों को जन्म दिया जिनमें तीन मादा व एक नर शावक हैं. इन्हीं तीन मादा शावकों में से एक बाघिन पन्ना-213 (22) है जो इन दिनों उ.प्र. के जंगलों में विचरण कर रही है. मालुम हो कि विगत 24 नवम्बर को पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र से बाहर निकलकर यह बाघिन उत्तर वन मण्डल पन्ना के परिक्षेत्र विश्रामगंज व देवेन्द्रनगर होते हुए सतना वन मण्डल के सिंहपुर एवं बरौंधा वन परिक्षेत्र में पहुंची. जहां से विचरण करते हुए यह पडोसी राज्य उ.प्र. के जंगल में प्रवेश कर गई है. 

अपने पूर्वजों का कर रही है अनुकरण 
पन्ना टाइगर रिजर्व से नर बाघों के बाहर निकलने के कई उदाहरण हैं, लेकिन मादा बाघिन के पहली बार बाहर जाने की बात प्रकाश में आई है. यह इसलिए ज्ञात हो सका क्यों कि बाघिन पन्ना - 213 (22) रेडियो कॉलर पहने है. जाहिर है कि पूर्व में नर व मादा बाघ इसी तरह से बाहर जाते रहे होंगे, लेकिन रेडियो कॉलर न होने के कारण उनके बाहर निकलने की जानकारी नहीं हो पाती थी. अब इस बाघिन ने लम्बी दूरी तय करते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि उनके पूर्वज इस मार्ग का उपयोग करते रहे हैं. बाघों का यह पुराना कॉरीडोर है जिससे होकर यहां के बाघ उ.प्र. तथा वहां के बाघ यहां आते - जाते रहे हैं. इससे यह भी पता चलता है कि जंगली बाघों में इन ब्रीडिंग की समस्या कभी नहीं रही. 

बाघिन की सुरक्षा में जुटे हैं दो प्रान्त 
पन्ना टाइगर रिजर्व की इस युवा बाघिन की सुरक्षा में म.प्र. के साथ - साथ उत्तर प्रदेश का वन विभाग भी जुट गया है. क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आलोक कुमार ने यूनीवार्ता को बताया कि इस बाघिन के संबंध में मुख्यालय से मार्गदर्शन मिलने पर उसे पन्ना टाइगर रिजर्व में वापस लाने का कार्यक्रम बनाया जायेगा. आपने कहा कि आगे की कार्यवाही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली, वन विभाग म.प्र. एवं उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर की जावेगी. श्री कुमार ने सभी आम और खास से आग्रह किया है कि जन समर्थन से बाघ संरक्षण की दिशा में बाघिन पन्ना - 213 (22) की सुरक्षा में आवश्यक सहयोग प्रदान करें. 

अरुण सिंह 
पन्ना, मध्य प्रदेश, भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

Dec 12, 2015

भारत वायु प्रदूषण पर त्वरित कार्यवाही करने में असफलः अपर्याप्त व्यवस्था होने से लोगों का स्वास्थ्य खतरे में

Photo Courtesy: Getty Images/The Telegraph 

नई दिल्ली, 10 दिसम्बर, 2015 ग्रीनपीस ने कहा है कि यदि आज कहा कि भारत में भी बीजिंग की तरह हवा की गुणवत्ता मापने का अलार्म सिस्टम होता तो उत्तर भारत के अधिकतर हिस्से में नवंबर 2015 से ही रेडएलर्ट घोषित हो गया होता। भारत के वायु गुणवत्ता सूचकांक नेशनल एयर क्लालिटी इंडेक्स (एन ए क्यू आई ) के वेबसाइट से सितबंर से लेकर नवबंर तक 91 दिनों के एकत्रित किए गए आकड़ों से पता चलता है किचीन के रेड एलर्ट के मापदंड अनुसार दिल्ली में 33 दिनों और लखनऊ में 41 दिनों का रेड एलर्ट घोषित किया जा चुका होता। ये समस्या सिर्फ दिल्ली की ही नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर भारत के कई शहरों में भी प्रदूषण काइतना ही बुरा हाल है।

ग्रीनपीस एशिया के ग्लोबल कैंपेनर लौरी मिल्लीविर्ता का कहना है, “बीजिंग ने अपना पहला रेड एलर्ट जारी करके न सिर्फ स्कूलों को बंद किया है बल्कि कारखानों, वाहनों, निर्माण कार्यों और अन्य गतिविधियों सेप्रदूषण कटौती करने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। इस कार्यवाही से निश्चित रूप से पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण पर असर दिखा। हालांकि चीन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि वह बिजली संयत्रों,उद्योगों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाए और नई उत्सर्जन प्रणाली से कोयले की खपत को कम करके प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर पर अन्य और कई उपाय लागू करे।”

भारत चीन के अनुभव का लाभ उठाकर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करने की दिशा में एक लंबी छंलाग लगा सकता है। उदाहरण के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय यह है कि भारत अपने राष्ट्रीय और क्षेत्रीयस्तर पर कार्यनीति के लिए ठोस, समयबद्ध लक्ष्य सुनिश्तित करे।

चीन में यदि एक्यूआई सिस्टम वायु गुणवत्ता सूचनांक 200 के स्तर पर दर्शाए ( जो कि पी एम 10 की गहनता 350 माइक्रोग्राम / मीटर क्यूब दर्शाता है ) और अगर यह स्तर अगले तीन दिनों तक लगातार वैसे रहनेकी भविष्यवाणी हो, तो रेड एलर्ट जारी किया जाएगा। लेकिन भारत में यह स्तर 300 पर तय की गई है, परंतु इसका असर क्या होगा इसका कोई आकलन नहीं किया जाता है, न ही कोई चेतावनी जारी करने की हीकोई व्यवस्था है । इसलिए इस तरह के प्रोटोकॉल को लागू करने की जरूरत है जिससे कि जनता को सूचना मिले और उनके उपर पड़ने वाले प्रभाव पर इसका असर हो। दूसरी तरफ दीर्धकालीन स्वच्छ हवा के लिएपरंपरागत बिजली उत्पादन से हटकर जीवाश्म आधारित बिजली संयत्रों पर फोकस करने की जरूरत है। इसलिए ग्रीनपीस ने पेरिस में चल रहे जलवायु वार्ता में भारत के महत्वाकांक्षी सौर ऊर्जा के लक्ष्यों के लिए भारतसरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया है।

ग्रीनपीस इंडिया के कंपैनर सुनील दहिया का कहना है, “सरकार के खुद के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के अनेक शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर बीजिंग से भी ज्यादा बदतर है लेकिन अभी भी हम इस वायु प्रदूषण केप्रकोप को पहचाने में झिझक रहे हैं। यह जरूरी है कि एक ठोस नीति बनाई जाए जिससे कि वायु प्रदूषण संकट का समाधान खोजा जा सके। इसके साथ ही लोगों को निजी स्तर पर खुद पर नियंत्रण करना होगा, नएनियम-कानूनों का पालन करना पड़ेगा चाहे वह कितने भी सख्त क्यों न हो। हमारे लिए चुनौती ये है कि हम देश को ’क्लीन एयर नेशन’ की दिशा में किस तरह ले जा सकते हैं।”

CityNo. of days that would have qualified as ‘Red Alert’ Total days of data captured
Agra2030
Ahmedabad57
Delhi2930
Faridabad2130
Jaipur1011
Kanpur2130
Lu           Lucknow2930
Muzaffarpur2630
Patna2226
Pune1130
Varanasi2330


--
जितेन्द्र कुमार
Jitendra Kumar 
jitendra.kumar@greenpeace.org

सीतापुर में शिकारियों के जाल में फंसा तेंदुआ...


कौतूहल, और दहशत के वो आठ घंटे.............
शिकारी ने ऐसा बिछाया जाल ’तेंदुआ’ हुआ बेहाल 
जाल में फंसकर आठ घंटे तक छटपटाता रहा तेंदुआ, पैर हुआ घायल, बेहोश कर पिंजरे में ले गई लखनऊ से आई विशेषज्ञों की टीम 

पंकज सिंह गौर। सीतापुर 
बाघ और तेंदुआ के अनेकों किस्से आपने सुने और देखे होंगे, लेकिन थाना इमलिया सुल्तानपुर इलाके के कोरैय्या उदयपुर में तेंदुए की दीन हीन दशा पहली बार देखने को मिली। जिसके चलते हर कोई सिहरन लेकर उसके करीब तक पहुँच गया और बेचारा तेंदुआ उसे देखकर गुर्राने के अलावा कुछ नही कर सका, कारण गन्ने के खेत को बचाने के लिये शिकारी द्वारा जंगली सूकर के लिये लगाये गये जाल के लोहे के फन्दे में तेंदुए का एक पैर बुरी तरह फंस गया। अपने को छुड़ाने के लिये उसने हर जतन की पर उसकी एक नही चल सकी। यह खबर इलाके में जंगल में आग की तरह फैल गयी, 30 किलोमीटर की दूरी के लोग वहां जा पहुंचे। तेंदुए की एक झलक पाने के लिये लोगों में कौतूहल मच गया जिसने तेंदुए को देख लिया वह रोमांचित हो गया और दहशत में पुलिस और वन विभाग की टीम रही .



जनपद मुख्यालय से करीब 15 किमी. दूर कोरैय्या उदयपुर में सुबह तेंदुए के जाल में फंस जाने की खबर फैली। गांव के रामकुमार शुक्ला ने बताया कि उन्होंने गन्ने के खेत को जंगली सूकरों और नीलगाय से बचाने के लिये जाल लगवाया था जिसमें तेंदुआ फंस गया। गांव वालों के मुताबिक रात में लगाये गये जाल को देखने के लिये सुबह जब शिकारी खेत पर पहुंचा तो उसमें तेंदुए को फंसा देख उसका हाल बेहाल हो गया और उसने इसकी खबर गांव में दी फिर फरार हो गया। इसके बाद गांव के लोगों की भीड़ वहां पहुंचने लगी थोड़ी ही दूरी पर स्थित थाना इमलिया सुल्तानपुर के एसओ बेनीमाधव त्रिपाठी अपने दल-बल के साथ वहां पर जा पहुंचे तत्काल झरेखापुर चैकी इंचार्ज सतीश यादव, इमलिया सुल्तानपुर के एसआई शिवकुमार सिंह को भी बुला लिया और तेंदुए से कुछ दूर रहकर लोगों को वहां आने जाने से रोकते रहे।



 भीड़ बढ़ते देख एसओ ने एसपी को जानकारी देकर अन्य थानों की फोर्स मांगी। इधर डीएम डा. इन्द्रवीर सिंह यादव और एसपी कवीन्द्र प्रताप सिंह को इसकी जानकारी फोन से लोग देने का प्रयास करते रहे पर मीटिंग में व्यस्त होने के चलते किसी भी अधिकारी ने खबर लेने की जरूरत नही समझी। डीएफओ एपी त्रिपाठी को तत्काल एसओ ने सूचना दी पर उनके स्तर से भी वन विभाग के अन्य अधिकारियों को तत्काल नही भेजा जा सका। इधर तेंदुआ को देखने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही थी, जाल में फंसा तेंदुआ लोगों को अपने पास आते देख हमलावर होता जा रहा था जिसको देखकर सुरक्षा कर्मियों की हालत पतली होती जा रही थी कि कहीं अगर तेंदुआ छूट गया तो फिर मौजूद लोगों को जान बचाना मुश्किल हो जायेगा। सूचना के 7 घंटे बाद डीएफओ एपी त्रिपाठी लहरपुर के वन क्षेत्राधिकारी एसपी सिंह, सीतापुर के वनक्षेत्राधिकारी एस तोमर, वन दरोगा राजकुमार अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे।


 8 घंटे बाद लखनऊ जू से विशेषज्ञों की टीम वरिष्ठ पशु चिकित्सक वन्य जन्तु डा. उत्कर्ष शुक्ला के नेतृत्व में पहुंची। जीप पर सवार रहकर ट्रेन्क्यूलाइज गन से डा. उत्कर्ष शुक्ला ने निशाना साधते हुए तेंदुए पर बेहोशी का पहला इंजेक्शन चलाया, लगने के बाद भी तेंदुआ पूरी तरह बेहोश नही हो सका। दस मिनट बाद जीप से उतरकर पास में जाकर पुनः ट्रेन्क्यूलाइज गन से बेहोशी का इंजेक्शन चलाया और फिर पांच मिनट बाद तेंदुआ बेहोश हो गया जिसे जाल में डाल कर साथ लाये पिंजड़े में रखने के बाद लखनऊ लेकर चले गये। इस बीच 8 घंटे तक तेंदुआ जाल से छूटने के लिये छटपटाता रहा।



कोरैय्या उदयपुर गांव के जिस गन्ने के खेत में जाल में तेंदुआ फंसा था उससे महज दस मीटर दूर कार में रहकर जान जोखिम में डाल तेंदुए की हर गतिविधि और फिर उसको बेहोश करने से लेकर उसे पिंजड़े में कैद करने के साथ ही तेंदुए को देखने के लिये उमड़ी भीड़ और सफल आपरेशन करने वाली लखनऊ से आई टीम की हर कार्रवाई पर वरिष्ठ पत्रकार पंकज सिंह गौर, शेर सिंह, फोटोग्राफर दुर्गेश शुक्ला, बबलू सिंह चैहान व उदय सिंह की रही नजर इस दौरान अनेकों बार हमारी टीम पर तेंदुआ ने हमलावर होने का प्रयास भी किया।


पहले होगा इलाज फिर छोड़ा जायेगा जंगल में-डा. उत्कर्ष
तेंदुए को बेहोश कर पिंजड़े में कैद करने वाले डिप्टी डायरेक्टर लखनऊ जू व वरिष्ठ पशु चिकित्सक वन्य जन्तु डा. उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि यह काफी बड़ा तेंदुआ है इसे वह ट्रेन्क्यूलाइज कर जू लखनऊ ले जा रहे हैं, जाल में फंसने से इसका पैर बुरी तरह घायल हो गया है पहले इसका इलाज होगा ठीक होने पर इसे जंगल में छोड़ा जायेगा। 15 दिन पूर्व अलादादपुर में आये तेंदुए को भी डा. शुक्ला ने ट्रेन्क्यूलाइज कर पिंजड़े में कैद किया था बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया।


मैटिंग सीजन के चलते मैदानी भाग में आ गए बाघ और तेंदुए-डीएफओ
डीएफओ डा. एपी त्रिपाठी ने बताया कि कोरैय्या उदयपुर में लोगों द्वारा अपनी फसलों को जंगली सूकर व नीलगाय आदि से बचाने के लिये लगाये गये खेतों में जाल में तेंदुआ फंस गया था। जिससे उसका पैर जख्मी हो गया है, लखनऊ जू ले जाकर उपचार किया जायेगा। सीतापुर में बाघ और तेंदुए के आने के मामलों में बताया कि पहली वजह है कि यह इनका मैटिंग सीजन है जिससे यह डिस्टर्ब होते हैं और जंगल से भाग कर गन्ने के खेतों में शरण ले लेते हैं और दूसरा कारण है कि यह टेरेटोरियल जानवर हैं, जिसमें हर जानवर का अपना एक सुरक्षित इलाका होता है और वहां किसी भी घुसपैठिये को दूर खदेड़ दिया जाता है। इसलिये यह जानवर जंगल से बाहर चले आते हैं।
सभी फोटो-दुर्गेश शुक्ला

पंकज सिंह गौर  
वरिष्ठ पत्रकार
सीतापुर 
pankaj.singh.gaur22@gmail.com

Dec 7, 2015

केन - बेतवा जोड़ से डूबेगा पन्ना के बाघों का बसेरा



नदियों को जोडऩे की नहीं बल्कि नदियों से जुडऩे की जरूरत 
जीवनदायिनी नदी के नैसर्गिक प्रवाह को रोकना खतरनाक 

पन्ना,
बाघों से आबाद हो चुके म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व को फिर से उजाडऩे की तैयारियां चल रही हैं. जिस टाइगर रिजर्व के वजूद को कायम रखने के लिए पन्ना वासियों को प्रगति व आर्थिक समृद्धि से वंचित होना पड़ा है, अब उसे कहीं अन्यत्र खुशहाली लाने के लिए नष्ट किया जा रहा है. जंगल व वन्य प्रांणियों को सहेजने व उन्हें संरक्षित करने के लिए पन्ना के नागरिकों ने जो कुर्बानी दी है, उसके एवज में उन्हें पुरस्कार मिलना तो दूर उनकी राय जानने की भी जरूरत नहीं समझी गई. सरकार की इस हिटलरशाही से पन्ना जिले के लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. 

उल्लेखनीय है कि लगभग 17 हजार करोड़ रू. की लागत वाली केन - बेतवा लिंक परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार दोनों ही संकल्पित नजर आ रहे हैं, जिससे पन्ना जिले के नागरिक चिन्तित हैं. इस परियोजना के तहत निर्मित किये जाने वाला ढोढऩ बांध पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बनेगा, फलस्वरूप कोर क्षेत्र का 58 वर्ग किमी. डूब से नष्ट हो जायेगा. इसके अलावा पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र का 105 वर्ग किमी. का किशनगढ, पलकोहा एवं भुसौर क्षेत्र अलग - थलग पड़ जायेगा. इतना ही नहीं बफर क्षेत्र का भी 34 वर्ग किमी. वन क्षेत्र डूब से प्रभावित होगा. इस तरह से पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र का 163 वर्ग किमी. जिसमें घना जंगल है नष्ट हो जायेगा, परिणाम स्वरूप पन्ना टाइगर रिजर्व का वजूद ही नहीं बचेगा. जन समर्थन से बाघ संरक्षण के नारे को चरितार्थ करते हुए पन्ना वासियों ने जिस तरह से बाघों की उजड़ चुकी दुनिया को फिर से आबाद करने में कामयाबी पाई है, उससे पूरी दुनिया चमत्कृत है. यहां के अनूठे प्रयोग को देखने व समझने के लिए दुनिया भर के लोग टाइगर रिजर्व में आ रहे हैं, जिससे पर्यटन विकास की संभावनाओं को नई ऊर्जा मिली है. बाघ और वन्य प्रांणी अब यहां विकास में बाधक नहीं बल्कि विकास के वाहक बन रहे हैं. ऐसे में केन - बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर पन्ना के बाघों व जंगल की कुर्बानी कहां तक न्यायोचित है. 

शुरू से ही विवादों में घिरी रही यह परियोजना पन्ना जिले के लिए तो घातक है ही, यहां के अनगिनत वन्य जीवों, बाघों व जंगल के लिए भी विनाशकारी साबित होगी. देश की इकलौती प्रदूषण मुक्त जीवनदायिनी केन नदी का प्रवाह रूकने से वह भी मृतप्राय हो जायेगी. नदी के बहाव से छेड़छाड करना जीवन से छेड़छाड़ करने जैसा है. देश के ख्यातिलब्ध पर्यावरण विद एच.एस.पवांर (पद्मभूषण से सम्मानित) ने भी केन - बेतवा लिंक परियोजना के होने वाले घातक परिणामों से सरकार को सचेत किया है. जल बाबा के नाम से प्रसिद्ध मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त राजेन्द्र सिंह का भी यह कहना है कि केन - बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना जिले को कोई लाभ नहीं होगा, यह परियोजना सिर्फ ठेकेदारों की जेब भरेगी. उन्होंने कहा कि केन - बेतवा को जोडऩे की नहीं बल्कि केन - बेतवा से लोगों को जोडऩे की जरूरत है. समाज पानी के व्यापार और कुदरत के साथ खिलवाड़ की साजिश को समझे और योजना बद्ध तरीके से इसका पुरजोर विरोध करे तभी प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा संभव है. 


परियोजना पर पुर्नविचार जरूरी 
भाजपा के जिलाध्यक्ष एवं पन्ना जिले के विचारशील युवा नेता सतानंद गौतम ने केन - बेतवा लिंक परियोजना पर पुर्नविचार किये जाने की आवश्यकता जताई है. पन्ना के बाघों की वापसी पुस्तक के विमोचन समारोह में उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बाघ पुर्नस्थापना योजना की सफलता से पन्ना का गौरव बढ़ा है. पन्ना के विकास में पार्क सहभागी बने, इस दिशा में प्रयास होने चाहिए. 
सदानंद गौतम 
अरुण सिंह 
पन्ना- मध्य प्रदेश 
भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

पन्ना के बाघों को अब कुत्तों से ख़तरा



रवीन्द्र व्यास 
पन्ना। /M.P./ टाइगर रिजर्व के बाघों  पर  वाइरस के संभावित खतरा को देखते हुए यहां के बाघों का रक्त परीक्षण किया जा रहा है । पार्क प्रबंधन को बाघों पर वाइरस  की जानकारी  तब लगी जब एक बाघ की मौत हो गई , जब उसकी  ऍफ़ एस  एल रिपोर्ट  आई  तो  उसमे मौत का कारण  सीडीए ब्रेन वायरस को बताया गया। इस रिपोर्ट के बाद सकते में आया टाइगर रिजर्व  का स्टाफ  अब बाघों के रक्त परीक्षण में जुट गया है । यह वाइरस कुत्तों में पाया जाता है ।
  
दो माह पूर्व टाइगर रिजर्व में पी-233 बाघिन की मौत हुई थी।प्रारंभिक जांच में मौत का कारणबाघों के आपसी संघर्ष को बताया गया था ।  एफएसएलरिपोर्ट में खुलाशा हुआ की  बाघिन की मौत  सीडीए ब्रेन वायरस के कारण हुई है । यहां के फील्ड डायरेक्टर आलोक कुमार बताते हैं की वायरस की  जानकारी  लगते  ही हमने इससे निपटने की  कार्य योजना बना  ली है। दिसम्बर से आसपासके गांवों में कुत्तों का  टीकाकरण अभियान चलाया जायेगा। इन जानवरों से ही यह वायरस पनपता है। जहां तक नये बाघ की सिफ्टिंगकी बात है तो उसमें कोई समस्या नहीं है वे भरोषा दिलाते हैं की पार्क सुरक्षित है।  7 बाघों के सेंपल में कोई वायरस नहीं मिला है । 

जिन  7 बाघों के रक्त  परीक्षण किया गया उसमे  किसी में भीवायरस नहीं पाया गया है । अब  टाइगर रिजर्व के सभी  बाघों का रक्त परीक्षण किया जा रहाहै । जिनके रक्त  नमूमों को जांच के लिये बरेली के रिसर्च सेंटर भेजा  गया है । पन्ना  के  टाइगर  रिजर्व में  भोपाल से आये  बाघ टी-7 को मिलाकर 34 बाघ हैं, पन्ना टाइगर रिजर्व का अधिकांश  इलाका आसपास के गाँवों से घिरा है । सीडीए ब्रेन वायरस  आवारा कुत्तों और मवेशियों में होता है। इन जानवरों के शिकार से यह वायरस एक्टिव होकर बाघ तक पहुंच जाता है। जिससे बाघ के ब्रेन में संक्रमण के कारण उसकी मौत हो जाती है। 

बाघ को सुरक्षित रखने  और सीडीए वासरस से निपटनेके लिये पार्क प्रबंधन ने  पार्क के कोर जोन से लगे 15 गांवों  के पालतू जानवरो ,  कुत्तों काटीकाकारण कराया  जाएगा।  दिसम्बर से टीकाकारण का विशेष अभियान प्रारंभ होगा।  यह कोई पहला मौका नहीं है जब पार्क को कुत्तो से बाघ को बचाने के लिए यह जातां करना पद रहा हो , इसका पहले भी एक बार इस तरह की स्थिति बनी थी । 

रवीन्द्र व्यास 
पन्ना टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश 
भारत 
vyasmedia@gmail.com

विविधा

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