International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Aug 25, 2015

ऐ खुदा ! रुखसाना मरने पर आमादा क्यों है?


तुझे जीना होगा रुखसाना। बांदा के शेखनपुर गांव की रुखसाना खेती में नुकसान के बाद दाने-दाने को मोहताज।- 
बाँदा से सामाजिक कार्यकर्ता व् पत्रकार आशीष सागर की रिपोर्ट 

केंद्रीय कृषि मंत्री राधा कृष्ण मोहन ने कहा कि देश में पिछले साल हुई 1400 किसानों की मौत के पीछे प्रेम-प्रसंग और नपुंसकता जैसे कारण रहे हैं। राज्य सभा में एक प्रश्न (पिछले साल किसानों की मौत के पीछे क्या कारण रहे) के लिखित जवाब में उन्होंने कहा, श्नैशनल क्राइम रिकार्डस ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक किसानों की आत्महत्या के पीछे पारिवारिक कारण, बीमारी, नशा, दहेज, प्रेम-प्रसंग और नपुंसकता जैसे कारण हैं। उन्होंने देश में एक भी मौत को कर्ज से इंकार किया है! नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरों के अनुसार वर्ष 2009 में यहां 568ए 2010 में 583ए 2011 में 519ए 2012 में 745ए 2013 में 750 और दिसंबर 2014 तक 58 किसान आत्महत्या किए हैं। वहीं वर्ष 2015 अगुवाई ही किसान आत्महत्या के साथ हुई। ऐसे दोयम दर्जे के केन्द्रीय मंत्री को बुंदेलखंड और विदर्भ के गाँवो में लेकर आना चाहिए किसान संघठन के सभी साथियों को जहाँ किसानो का कफन और उनके अनाथ बच्चे , बेवाये मौजूद  है. बानगी के लिए बाँदा के वो अनाथ बालक भी जो आज मुझे एक हफ्ते से इसलिए फोन कर रहे है कि भैया दो हजार रूपये दे दो बहन की स्कूल की ड्रेस ध् किताबे लानी है पंचमुखी उच्तर माध्यमिक,बघेलाबारी में अंतिमा यादव का दाखिला करवाना है छठवीं में मगर कमबख्त मै हूँ कि शर्म से मोबाइल नही उठा पा रहा...आये केन्द्रीय मंत्री इनके , इन जैसे दर्जन भर किसान के घर ले चलता हूँ ! फिलहाल ये केस रिपोर्ट की  पेशगी ...
         

दो पल को इस तस्वीर पर आपकी निगाहें टिकी रह जाएं, तो फिर इस रिपोर्ट के मायने खुद-ब-खुद खुलते चले जाएंगे। रुखसाना अपनी बेटियों के साथ न जाने किन चिंताओं में पड़ी है। बाँदा जिले के नरैनी तहसील के शेखनपुर गाँव की रुखसाना अकेली अपनी दुनिया को सहेजने और संवारने की कोशिशें कर रही हैं। पति इरशाद खां अल्लाह को प्यारे हो गए हैं। और अल्लाह ही जाने रमजान के पाक महीने में इबादत के बाद भी राहत की नेमत घर तक क्यों नहीं बरसी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री साहेब, देखिये न रुखसाना अब इस समाजवादी दुनिया में नहीं रहना चाहती ! भूख-गरीबी और जवान बेटियों के ब्याह की चिंता उसको जीने नहीं दे रही! आलम ये कि रुखसाना के जेहन में ‘पूरे परिवार के साथ खुदकुशी’ जैसे नामुराद खयाल भी आने लगे हैं ! वो खुले आम अब इसे अपने गांव के लोगों के बीच बयां भी कर रही है।

ऐसी खबरें अखबार में छपी तो मेरे कदम गत 22 जुलाई को शेखनपुर की तरफ बढ़ चले। जेहन में एक ही सवाल था-क्या संवेदना और समाज का रिश्ता इतना बिखर चुका है कि एक बेवा अपने परिवार के साथ सिर्फ इसलिए मरना चाहती है कि आज उसका कोई रहबर नहीं है! गाँव से लेकर जिला मुख्यालय तक फैले समाजसेवा के कुनबे, ग्राम की महिला प्रधान और प्रशासनिक जमात में क्या किसी को इस ‘आवाज’ में लिपटा दर्द महसूस नहीं होता? क्या हमारा फर्ज बस इतना कि रुखसाना को खबर बनाकर छोड़ दिया जाये? तमाम तरह की आंतरिक जिरह के बीच उलझा मैं गाँव पहुंचा।

रुखसाना के शौहर इरशाद पत्नी और बूढ़े पिता के भरोसे किसानी छोड़कर गोवा मजदूरी के लिए चले गये। 2 बीघा जमीन में परिवार ने खेती की। इरशाद का सपना एक ही था- ”फसल बेहतर हुई तो अबकी समीम बानो और नसीन बानो का निकाह करूँगा!’ वो सपने गुनता मजदूरी करता रहा और इधर खड़ी फसल पर तेजाब बनकर ओला और पानी बरसा तो सपनों के साथ परिवार की खुशियाँ भी खाक हो गयीं! पूरी खेती में महज 6 मन (करीब 237 किलो) अनाज हुआ!

मुआवजा अभी तक मिला नहीं क्योंकि लेखपाल और पटवारी ने ऐसी रिपोर्ट ही नहीं लगाई! कहते हैं 500 रुपया जब तक इनकी जेब में न डालो, मुआवजे की रिपोर्ट न तो बनती है, न आगे खिसकती है।

रुखसाना ने फसल तबाही की बात दबे गले से इरशाद को बता दी। परदेस में मजदूरी कर रहे किसान को बड़ा झटका लगा, दिल का दौरा पड़ा और सब कुछ खतम ! इरशाद अल्लाह को प्यारा हो गया। पहले से 4 बेटियों और दो पुत्रों से लदी रुखसाना को जिस वक्त ये ख़बर लगी, उसके पेट में इरशाद की आखरी निशानी सांसें लेने लगी थी। एक और जिंदगी अपने अँधेरे आज और कल का इंतजार मानो गर्भ में ही कर रही हो। जब मैंने इस बारे में बात की तो शर्मिंदा होकर अपना पल्लू पेट से लगा लिया!


22 अप्रैल 2015 को इरशाद का इंतकाल हुआ। खेतिहर जमीन अभी ससुर के नाम है। एक देवर है जो गूंगा है। समीम, नसीन बानो, सनिया, दानिस और सेराज की अम्मी रुखसाना आज पूरे परिवार के साथ जान देने पर आमादा है। अफसोस ये कि जब रुखसाना के लिए मैंने नरैनी उपजिलाधिकारी से बात करनी चाही तो उन्होंने समाचार पत्र फेंकते हुए कुछ भी कहने से मना कर दिया!

देश के प्रधानमंत्री मोदी जी और मुखिया अखिलेश जी देख लें अपने साम्राज्य की दम तोड़तीं ये तस्वीरें हो सकता है उनकी नजर भर से बेजान सूरतों में थोड़ी जान आ जाए।

Aug 23, 2015

रोटरी क्लब ने मनाया विश्व फ़ोटोग्राफी दिवस


लखीमपुर शहर में पहली बार दुधवा लाइव द्वारा लगाई गयी चित्र प्रदर्शनी-

लखीमपुर-खीरी : 22 अगस्त 2015, रोटरी क्लब लखीमपुर द्वारा आयोजित विश्व फोटोग्राफी दिवस पर दुधवा लाइव संगठन ने कुंवर खुशवक्त राय विद्यालय में चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया, इस कार्यक्रम में शहर के तमाम गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, चित्र दीर्घा के अतिरिक्त, शहर में पहली बार फोटोग्राफी में नए  लोगों के लिए  फोटोग्राफी कम्पटीशन की भी शुरुवात की गयी, इस प्रदर्शनी में दुधवा लाइव संगठन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फोटोग्राफर्स सतपाल सिंह, अजीत कुमार शाह एवं कृष्णकुमार मिश्र की वन्य जीवन पर खींची गयी तस्वीरें प्रदर्शित की गयी.






कार्यक्रम का आयोजन रोटेरियन चन्द्र शेखर सिंह ने किया, फोटोग्राफी चैलेन्ज में  राजू रस्तोगी को पुरस्कृत किया गया, कार्यक्रम में अतिथि फोटोग्राफर अजीत कुमार शाह व् कृष्ण कुमार मिश्र को रोटरी क्लब द्वारा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के लिए प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया.



कार्यक्रम में रोटरी क्लब लखीमपुर के अध्यक्ष विजय कुमार नागर, सेक्रेटरी कमल कुमार मेहरोत्रा, रोटेरियन डा. जयशंकर बाजपेयी, अशोक तौलानी, अमिताभ निगम, के अतिरिक्त कई वरिष्ठ रोटेरियन मौजूद रहे.

दुधवा लाइव डेस्क 


Aug 20, 2015

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन की संदिग्ध मौत



वन परिक्षेत्र पन्ना के बीट राजाबरिया में मृत पाई गई बाघिन पन्ना - 233 
घटना से टाइगर रिजर्व में शोक का माहौल 

पन्ना, 14 अगस्त का. 
म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व में दो वर्ष की आयु वाली अर्धवयस्क बाघिन पन्ना 233 संदिग्ध परिस्थितियों में आज पन्ना वन परिक्षेत्र के बीट राजाबरिया में मृत पाई गई है। बाघिन की मौत की खबर से पन्ना टाइगर रिजर्व में जहां शोक का माहौल है वहीं वन्य जीव प्रेमी भी हैरान हैं. बाघिन की मौत कैसे व किन परिस्थतियों में हुई अभी इस बात का खुलासा नहीं हो सका है. 

उल्लेखनीय है कि बाघिन पन्ना-233 कान्हा टाइगर रिजर्व सेे आई बाघिन टी-2 की तीसरी संतान की तीसरी अर्धवयस्क बाघिन है.  इसका जन्म 13 जुलाई 2013 को हुआ था। यह अपनी मां टी-2 के साथ लगभग 20 माह रहने के बाद जब मां से अलग रहने लगी तो इसके अनुश्रवण के उद्देश्य से 24 मई 2015 को रेडियो कालर किया गया था। रेडियो कालर पहनाने के बाद इसकी सतत मानीटरिंग की जा रही थी। पन्ना-233 एवं पन्ना-234 दोनों बाघिनें एक ही क्षेत्र में अपनी जगह स्थापित करने के प्रयास में थी। क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आलोक कुमार ने बताया कि 09 अगस्त 2015 को दोनों के बीच में आपसी लड़ाई भी हुई थी। इसके बाद दोनों बाघिनों की लगातार मानीटरिंग की जा रही थी। इस मानीटरिंग के दौरान ही इसे आज दिनांक 14 अगस्त को मृत पाया गया है।


मृत बाघिन के सभी अबयब सुरक्षित पाये गये। पन्ना-233 का पोस्ट मार्टम डा0 संजीव कुमार गुप्ता, वन्यप्राणी चिकित्सक पन्ना टाइगर रिजर्व के द्वारा किया गया है। इसके बिसरा आदि के सेम्पल एकत्रित किये गये हैं जिन्हें परीक्षण हेतु सेण्टर फार वाइल्ड लाइफ  फॉरेन्सिक एण्ड हेल्थ जबलपुर एवं फॉरेन्सिक लैब सागर एवं रायबरेली भेजा जा रहा है। रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरान्त ही मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। पोस्ट मार्टम उपरान्त मृत बाघिन का दाह संस्कार किया गया। इस सम्पूर्ण कार्यवाही में क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व, सहायक संचालक पन्ना, मड़ला, अधीक्षक केन घडिय़ाल अभयारण्य खजुराहो, परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना, राजेश दीक्षित एडवोकेट प्रतिनिधि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एवं पत्रकार शामिल रहे।

अरुण सिंह 
पन्ना - मध्य प्रदेश 
aruninfo.singh08@gmail.com

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था