International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Jul 2, 2015

दुधवा नेशनल पार्क में फिर एक गैंडे की मौत



दुधवा में  गैंडा परियोजन को एक और झटका

पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क की सोनारीपुर रेंज के सलूकापुर गैंडा परियोजना क्षेत्र में बुधवार को दो गैंडों के बीच संघर्ष हो गया। संघर्ष इतना जोरदार था कि इसमें एक गैंडे की मौत हो गई। सूचना मिलते ही वार्डेन एनके उपाध्याय मौके पर पहुंच गए और मौका मुआयना किया। 

दुधवा नेशनल पार्क के सोनारीपुर रेंज में सलूकापुर गैंडा परियोजना क्षेत्र के अम्हा फांटा में बुधवार को दोपहर में एक गैंडे का शव देखा गया। उसके शरीर पर कई जख्म थे सूचना वार्डेन को दी गई जिस पर वार्डेन एनके उपाध्याय मौके पर पहुंचे और मुआयना किया। घटना स्थल पर गैंडों में संघर्ष की पुष्टि हुई है। पार्क अधिकारियों के मुताबिक गैंडों में काफी देर तक संघर्ष हुआ है जिससे एक गैंडे की मौत हो गई है। उसके शरीर पर कई जगह जख्म मिले हैं। गैंडे की संघर्ष में हुई मौत से पार्क को एक और तगड़ा झटका लगा है।
---------
तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
मृत गैंडे का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने पार्क में ही किया है। पैनल में डॉ. जेबी सिंह, डॉ. सौरभ सिंघई और डॉ. नेहा सिंघई शामिल रहे।
----------
सुहेली की बताई जा रही तीसरी संतान,  छह साल थी उम्र
मरने वाला गैंडा सुहेली मादा की तीसरी संतान बताई जा रही है। बताया गया है कि उसकी उम्र करीब छह साल थी।
----------
पोस्टमार्टम रिपोर्ट घहरे घावों की वजह से हुई मौत
तीन डॉक्टरों के पैनल ने गैंडे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पार्क प्रशासन को सौंप दी है। वार्डेन के मुताबिक रिपोर्ट में गैंडे की मौत आपसी संघर्ष में आए गहरे जख्मों की वजह से होना पाया गया है।
------




महबूब आलम 
पलिया -खीरी 
 m.alamreporter@gmail.com


Jul 1, 2015

बाघ शावकों से गुलजार हुआ पन्ना टाइगर रिजर्व



तीन माह की अवधि में तीन बाघिनों ने दिया शावकों को जन्म
वयस्क सभी 6 बाघिनों के साथ घूम रहे 15 से अधिक शावक 

बाघों के बावत पन्ना टाइगर रिजर्व से अरुण सिंह की ख़ास रिपोर्ट
पन्ना, 1 जून -
म.प्र. का पन्ना टाइगर रिजर्व इन दिनों बाघ शावकों से गुलजार है. यहां विगत तीन माह की अवधि में तीन बाघिनों ने 6 शावकों को जन्म दिया है. इस तरह से टाइगर रिजर्व में मौजूद सभी वयस्क 6 बाघिनें अपने 15 से भी अधिक शावकों को साथ में लेकर स्वच्छन्द विचरण कर रही हैं. पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुर्नस्थापना योजना की यह अनोखी सफलता विस्मय विमुग्ध कर देने वाली है. वर्तमान में यहां बाघों की कुल संख्या 32 हो गई है, जबकि 8 नर बाघ बाहर हैं.

उल्लेखनीय है कि जिस जंगल में बाघ का रहवास होता है वह जंगल समृद्ध और अच्छा माना जाता है. बाघ की मौजूदगी जंगल के बेहतर स्वास्थ्य का परिचायक है. इस लिहाज से पन्ना का जंगल बाघों के लिए अनुकूल और उत्तम रहवास साबित हुआ है. बाघ पुर्नस्थापना योजना शुरू होने के बाद बीते पांच सालों में यहां 41 बाघ शावकों का जन्म हुआ, जिनमें सिर्फ 6 शावकों की मृत्यु हुई. इस तरह से यहां पर बाघ शावकों का सरवाइवल रेट 85 फीसदी से भी अधिक है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है. पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक आर.श्रीनिवास मूर्ति इस अनोखी सफलता का श्रेय टीम वर्क तथा पन्ना एवं बुन्देलखण्ड के सभी आम व खास लोगों को देते हैं. श्री मूर्ति ने आज पत्रकारों को बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व में मौजूद सभी वयस्क बाघिनें शावकों के साथ हैं, इन शावकों में ढाई माह से लेकर 18 माह तक के शावक हैं.

क्षेत्र संचालक श्री मूर्ति ने बताया कि विगत तीन माह के अन्तराल में जिन तीन बाघिनों ने शावकों को जन्म दिया है, उनमें बाघिन टी - 2, टी - 5 एवं पन्ना - 222 हैं. बाघिन टी - 2 ने तीन शावकों को जन्म दिया है जो लगभग 3 माह के आयु के हैं. जबकि बाघिन टी - 5 के सिर्फ एक शावक को ही प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सका है. बाघिन पन्ना - 222 के साथ दो शावक देखे गये हैं. इन तीन बाघिनों के अलावा पन्ना - 213 के साथ चार शावक, बाघिन टी - 1 के साथ 2 शावक तथा बाघिन टी - 6 के साथ 3 शावक विचरण कर रहे हैं. इन बाघिनों में सिर्फ पन्ना - 213 के चार शावकों के लिंग की पहचान हुई हैं, जिनमें 3 मादा व एक नर शावक है.

बाघों का लिंग अनुपात भी हुआ बेहतर
सबसे उत्साहजनक और सुखद बात यह है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में नर व मादा बाघों की संख्या का अनुपात पूर्व से काफी बेहतर हुआ है. क्षेत्र संचालक श्री मूर्ति ने बताया कि यहां पर वयस्क बाघिन 6 व अर्ध वयस्क बाघिनों की संख्या 5 है. जबकि नर वयस्क 4 व अर्ध वयस्क 5 हैं. इस तरह से मौजूदा समय बाघों की तुलना में बाघिनों की संख्या अधिक है जो शुभ संकेत है. श्री मूर्ति ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों की नर्सरी के रूप में विकसित हुआ है. यहां जन्म लेने वाले शावक अब कोर क्षेत्र से बाहर निकल कर समूचे विन्ध्य व बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जंगल को आबाद कर रहे हैं. पन्ना के बाघों के दहाड़ आने वाले समय में हर तरफ सुनाई देगी.
फोटो  - पन्ना की बाघिन अपने दो शावकों के साथ 

अरुण सिंह 
पन्ना- मध्य प्रदेश, भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था