International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Feb 28, 2015

भाषागिरी ने ईज़ाद किया शुद्ध हिन्दी लिखने का आसान तरीका


www.bhashagiri.com






हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा और भारत की मातृभाषा होते हुए भी कंप्यूटर तकनीकी Computer Technology) में अपना स्थान बनाने के लिये संघर्षरत है, बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां भी अब हिन्दी के लिये सुविधाएं प्रदान कर रही है । जिससे सामान्य जन के लिये कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करना आसान हुआ है । मगर हिन्दी लिखते समय होने वाली वर्तनी (स्पेलिंग) अशुद्धियां अभी भी एक बड़ी समस्या है । इसका आसान और सुलभ तकनीकी समाधान ना होने के कारण अशुद्ध हिन्दी काफी प्रचलन में आ गयी हैं । कई गलत शब्द इतने प्रयोग में आ गये हैं कि युवा पीढ़ी उन्हें ही सही समझने लगी हैं ।

पूरा लेख मेन्युअली पढ़कर वर्तनी अशुद्धियां सुधारने में काफी समय बर्बाद होता है। इन्हीं सब समस्याओं का सामना करना पड़ा बेंगलोर में रहने वाले अर्पित और श्वेता पालीवाल को जब वो एक आध्यात्मिक हिन्दी मासिक पत्रिका के डिजिटिलाइजेशन प्रोजेक्ट में अपना समयदान कर रहे थे । यहीं से शुरूआत हुई भाषागिरी की । हिन्दी भाषा पर काफी शोध करने के बाद एक विशेष तकनीक ईजाद की और Spell Guru सॉफ्टवेयर बनाया । इस नयी तकनीक के लिये उन्होंने पेटेंट भी फाइल किया है । इस सॉफ्टवेयर में आप आसानी से हिन्दी लिख सकते है । गलत शब्द लिखते ही यह आपको सूचित कर देगा और शब्द की वर्तनी सुधारने के लिए सुझाव भी देगा । यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित हिन्दी मानकीकरण पर आधारित है । Spell Guru इस प्रकार का पहला सॉफ्टवेयर है जो मंगल, कृतिदेव और चाणक्य फाॅण्ट में काम करता है । भाषागिरी शीघ्र ही नया सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराने वाली है जो कि सीधे MS Word में काम करेगा ।

श्वेता 
भाषागिरी 
support@bhashagiri.com

अन्य जानकारी के लिये देखे www.bhashagiri.com

वन्य जीवन व् पर्यावरण  पर आधारित दुनिया की पहली दुधवा लाइव  डिजिटल मैगज़ीन  की ज़ानिब से  हिन्दी  लिखने के लिए किये गए इस  सुन्दर कार्य  के लिए भाषागिरी  के आविष्कारकों  को शुभकामनाएं। . 

दुधवा लाइव डेस्क 

Feb 21, 2015

लखीमपुर खीरी में तोतों की खरीद फ़रोख्त...





कभी खीरी जिला मशहूर था तोतों की भारी तादाद में 

बाग़ बगीचों के कटान और फसलों में आई तब्दीली ने संकट उत्पन्न किया इस प्रजाति पर 



हमारे आस-पास आमतौर पर दिखने वाले तोतों में रोज रिंग्ड पेराकीट आसानी से मिल जाता था । यहाँ तक कि हर सुबह-शाम ये आस-पास के पेडों पर शोर मचाते, मस्ती करते दिख जाते थे। तोता पक्षियों के सिटैसी (Psittaci) गण के सिटैसिडी (Psittacidae) कुल का पक्षी है, जो गरम देशों का निवासी है। तोता! इसका प्रचलित नाम है लेकिन इसका अंग्रेजी नाम रोज रिंग्ड पेराकीट है और वैज्ञानिक नाम सिटाक्यूला क्रेमरी है। 



आज अधाधुंध वनो की कटाई और इनके घटते शरण स्थलों की कमी के चलते इनकी संख्या प्रभावित हुई है .....कई हफ्तों से लखीमपुर खीरी शहर इन बेजुबानों की खरीद फरोख्त का गढ़ बनता चला जा रहा है .....शहर की मुख्य रेलवे क्रासिंग पर उपर्गामी सेतु के नीचे और बाजपेयी कालोनी का मुख्य द्वार इसका प्रमुख अड्डा बन चुका है सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि बाजपेयी कालोनी का यह खरीद फरोख्त स्थल नगर पालिका परिषद से महज चंद क़दमों की दूरी पर है 

.......समझ नहीं आता की शहर के वन्य जीव प्रमियों/ वन्य जीव संरक्षकों/ दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों को यह दिखता नहीं या अधिकारीगण अपने कार्य को सिर्फ कागजों पर ही अंजाम देते है .......साथ ही मुझे लगता है की आपने आप को शहर के वन्य जीव प्रमी / वन्य जीव संरक्षक कहलाने वाले गणमान्य व्यक्ति सिर्फ सस्ती लोकप्रियता बटोरने के कारण ही इस मुहीम से जुड़ने का दम भरते है वास्तविकता से दूर दूर तक इनका कोई सम्बन्ध नहीं है !!!


अमित वर्मा 
https://www.facebook.com/avermaaa

Feb 20, 2015

गौरैया की घर वापसी- दुधवा लाइव का एक अभियान



पांच वर्षों से गौरैया सरंक्षण की लगातार मुहिम

दुधवा लाइव के द्वारा मनाए गए गौरैया दिवस व् गौरैया वर्ष 

पक्षी सरंक्षण में भारत की तराई से खीरी जनपद सबसे अग्रणी 

सन २०१० में दुधवा लाइव द्वारा शुरू किए गए गौरैया बचाओ अभियान ने तराई जनपदों के अतिरिक्त पूरे भारत व् दुनिया में अपना जागरूकता सन्देश पहुंचाया, विगत पांच वर्षों के सतत प्रयासों ने मानव सवेंद्नाओं को प्रभावित किया पशु पक्षियों के सरंक्षण के लिये, नतीजतन अब खीरी जनपद में ही नहीं अन्य जगहों में गौरैया की संख्या में इजाफा हुआ है, इस वर्ष मार्च में गौरैया दिवस के साथ गौरैया सरंक्षण की मुहिम दुधवा लाइव द्वारा फिर शुरू की जा रही है, जिसमे जनपद की वन्य जीवन से जुड़ी संस्थाओं व् लोगों से साथ आने की अपील है की विगत पांच वर्षों में जिस तरह खीरी जनपद के लोगों ने हमारे इस अभियान को पूरी दुनिया में पहुंचाने में मदद की है इस  बार भी यह सन्देश दूर दूर तक जाए और हमारे घरों का यह खूबसूरत चिड़िया फिर से घर वापसी कर सके.

दुधवा लाइव द्वारा गौरैया वर्ष एवं गौरैया दिवस की जो शुरूवात की गयी उसने पक्षियों के सरंक्षण में अभूतपूर्व योगदान मिला, लोग घरों में इस चिड़िया के लिए पानी दाना रखते है और संवेदनाएं भी.

सन २०१५ की इस शुरूवात में जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार व् उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित दुधवा लाइव प्रोजेक्ट ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में गौरैया सरंक्षण के लिए लोगों के साथ बैठके प्रारम्भ कर दी है, आज मोहम्मदी तहसील के बेलहा फ़ार्म में वन्य जीव प्रेमियों व् समाज के विभिन्न वर्गों के साथ दुधवा लाइव के संस्थापक ने एक बैठक का आयोजन किया जिसमे मोहम्मद रईस अहमद सतपाल सिंह, तारिक, विक्रम तिवारी, पुष्पेन्द्र वर्मा, शौकत अली, ने भाग लिया, और मोहम्मदी तहसील में गौरैया बचाओ अभियान की रूपरेखा तैयार की गयी.

आने वाले समय में जिले भर में ये गोष्ठियां आयोजित की जायेंगी और गौरैया की घर वापसी के वो सारे प्रयास किए जायेंगे ताकि हमारे घरों के पारिस्थितिकी तंत्र  का यह टाइगर जो हमारे घरों के आसपास की जैव विविधता के स्वस्थ्य होने का संकेत है को दुबारा बुलाया जा सके अपने गाँव व् घरों में (कृष्ण कुमार मिश्र, संस्थापक दुधवा लाइव)

दुधवा लाइव कराएगा पक्षियों की गणना

दुधवा लाइव इस बार मोहम्मदी बर्ड काउंट के सह-आयोजक के तौर पर गोमती नदी के किनारों पर मौजूद जैव विविधता का अध्ययन कराएगा, नदियों के प्रदूषण व् नदियों के किनारों पर हो रहे अतिक्रमण के कारणों का अध्ययन होगा ताकि भविष्य में खीरी की नदियों और उनमे मौजूद जलीय जैव विवधिता का सरंक्षण किया जा सके.

दुधवा लाइव डेस्क 

Feb 19, 2015

मध्य भारत के बचे हुए साल फारेस्ट को बचाने की मुहिम में प्रिया पिल्लई

प्रिया पिल्लई ने सरकार के प्रतिबंध प्रस्ताव की निंदा की
कोर्ट कल तक के लिये स्थगित किया गया

नई दिल्ली। 18 फरवरी 2015। ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने आज सरकार के'प्रतिबंधप्रस्ताव को नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक कलंक करार दिया। सरकार ने पेशकश की थी कि प्रिया यात्रा करने के लिये स्वतंत्र है यदि वो एक शपथ पत्र प्रस्तुत करे कि वह विदेशों में इस तरह की प्रस्तुतियां नहीं करेगी। प्रिया ने कहा, मैं ऐसे किसी भी प्रतिबंध प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करुंगी। मैं अपनेमौलिक अधिकारों के तहत काम कर रही थी और यह मेरे ही नहीं बल्कि देश के हरनागरिक  के अधिकार के बारे में है दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई के दौरान उपस्थित प्रिया ने कहा, यदि मैं इस प्रस्ताव को स्वीकार करती हूं कि सरकार मुझे बतायेगी कि मैं क्या बोल सकती हूं और क्या नहीं बोल सकती तो इसका मतलब होगाअभिव्यक्ति की आजादी को खो देना जो मुझे एक भारतीय नागरिक के बतौर मिला है।इसलिए मैं इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकती


.प्रिया ने आगे कहा, मेरे खिलाफ सरकार का तथाकथित केस खतरनाक है। इसमें कहा गया है कि ब्रिटिश पंजीकृत कंपनी द्वारा सिंगरौली में किये जा रहे गतिविधियों को ब्रिटिश सासंदों को बताना राष्ट्रीय हित के खिलाफ है। महान, सिंगरौली, मध्यप्रदेश में भारतीय कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। ऐसे में एक कोयला खदान को फायदा पहुंचाने के लिये हजारों लोगों के हित को खतरे में डालने के खिलाफ जागरुकता पैदा करना राष्ट्रीय हित के खिलाफ कैसे हो गया? मुझे भारतीय होने पर गर्व है और मैं चुप नहीं रह सकती।

कोर्ट में प्रिया पिल्लई की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, मैं सरकार के हित को राष्ट्र के हितों के साथ मिलाने को लेकर चकित हूं। मैं मानती हूं कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकार से इंकार करना है। मैं अपने मुवक्किल को एएसजी के  उस सुझाव से सहमत होने की सलाह नहीं दूंगी जिसमें उसे एक शपथ पत्र देने को कहा गया है कि वो विदेश जाकर अपनी बात नहीं रखेगी तभी उसे यात्रा करने की स्वतंत्रता दी जाएगी। यह सेंसरशिप नहीं, पूर्व सेंसरशिप है

अविनाश कुमार 
ग्रीनपीस भारत 
avinash.kumar@greenpeace.org

Feb 18, 2015

आसमान के बादशाह गिद्धों की संख्या में हो रही वृद्धि



पन्ना टाइगर रिजर्व बना इन पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना 
गणना में नौ प्रजाति के 1676 गिद्ध पाये गये 
पन्ना, मध्य प्रदेश, विलुप्त होने की कगार में पहुंच चुके आसमान के बादशाह कहे जाने वाले मांसाहारी पक्षी गिद्धों की संया पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगल में तेजी से बढ़ रही है. यहां की प्राकृतिक आबोहवा व अनुकूल रहवास स्थानीय गिद्धों के अलावा प्रवासी गिद्धों को भी रास आ रही है. आकाश में ऊंची उड़ाने भरते गिद्ध यहां सहज ही नजर आते हैं, जो पर्यावरण व पक्षी प्रेमियों के लिए एक सुखद समाचार है. पन्ना टाइगर रिजर्व में 5 से 8 फरवरी तक हुई गिद्धों की गणना में विभिन्न प्रजाति के कुल 1676 गिद्ध पाये गये हैं जो बीते वर्ष हुई गणना 910 की तुलना में काफी अधिक है. 

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आर.श्रीनिवास मूर्ति ने जानकारी देते हुए आज बताया कि इस वर्ष हुई गिद्ध गणना में एस.ओ.पी. तकनीक का उपयोग किया गया है, जबकि इसके पूर्व वर्ष 2011 से 2014 तक पी.पी.पी. पद्धति से गिद्धों की गणना की जाती रही है. श्री मूर्ति ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के 28 गिद्ध गणना स्थलों में 12 राज्यों के 68 प्रतिभागियों सहित 12 स्थानीय गाइडों ने गिद्धों की गणना में सहभागिता निभाई. प्रतिभागियों द्वारा एकत्रित की गई जानकारी की विश्वसनीयता को कायम रखने के लिए मौके पर जी.पी.एस. का अभिलेखन भी किया गया. गणना की इस प्रक्रिया में टेलिस्कोप का भी उपयोग हुआ है. गिद्धों की संया के साथ - साथ गिद्धों के घोसलों की भी गिनती एस.ओ.पी. के माध्यम से बेहतर संभव हो सकी है. इस पूरी प्रक्रिया को विकसित करने में हैदराबाद के अरूण वासि रेड्डी एवं कीर्ति कुमार अनुमूला व उनके सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. 

गिद्धों की हुई गणना के आंकडों से स्पष्ट होता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में लांग विल्ड वल्चर की संया उत्साह जनक रूप से बढ़ी है. इनकी संया 1191 पाई गई है तथा लांग विल्ड वल्चर के 398 जीवित घोसले भी पाये गये हैं जो एक शुभ संकेत है. गणना में व्हाइट बैक्ड वल्चर 45, इजिप्सियन वल्चर 12 तथा रेड हेडेड वल्चर 20 पाये गये हैं. प्रवासी गिद्धों में यूरेसियन ग्रिफन वल्चर 139, हिमालयन ग्रिफन 144 तथा सेनरस वल्चर की संया 1 पाई गई है. गणना में जिन गिद्धों की पहचान नहीं की जा सकी है उनकी संया 124 है. आंकड़ों में व्हाइट बैक्ड वल्चरों की संख्या विगत वर्षां की तुलना में कम है जो चिंता की बात है. इस वर्ष इनकी संया 45 आंकी गई है, जबकि 2013 में 146 तथा 2014 में 54 थी. बताया गया है कि व्हाइट बैक्ड वल्चर के घोसले फरवरी के बाद बनाये जाते हैं, अत: इनके बारे में अलग से अध्ययन करने की योजना है. पन्ना टाइगर रिजर्व में सपन्न हुई इस वर्ष की गणना में 1260 से अधिक स्थानीय गिद्ध एवं 260 से अधिक प्रवासी गिद्ध चिन्हित किये गये हैं. उल्लेखनीय बात यह है कि इस वर्ष भी 18 की संख्या में पेरीग्रीन फलकन पिक पाये गये हैं. 

सबसे तेज रफ़्तार पक्षी पेरीग्रीन फलकन भी मिले 
पन्ना टाइगर रिजर्व में चार दिनों तक चली गिद्धों की गणना के दौरान दुनिया के सबसे तेज रफ़्तार पक्षी पेरीग्रीन फलकन पिक भी पाये गये हैं. इन मांसाहारी पक्षियों की संया यहां पर 18 है जो निश्चित ही उल्लेखनीय और आश्चयजनक बात है. उप संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व अनुपम सहाय इस अनूठे पक्षी के बारे में बताया कि पेरीग्रीन फलकन पिक 320 किमी. प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ान भरता है जो दुनिया के तेज रफ़्तार पक्षियों में सबसे ज्यादा है. इस पक्षी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उड़ान भरते हुए जीवित पक्षियों को ही पकड़कर खाता है. यह पक्षी चिडिय़ों का शिकार करके जिन्दा रहता है. श्री सहाय ने बताया कि इस बार पन्ना टाइगर रिजर्व के अलावा पवई में भी गिद्धों की गणना कराई गई जहां विभिन्न प्रजाति के 235 गिद्ध पाये गये हैं. 


अरुण सिंह 
पन्ना, मध्य प्रदेश भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

Feb 7, 2015

वन्य जीवन फोटोग्राफी में सतपाल सिंह को अंतरराष्ट्रीय सम्मान



 मेलवीटा नेचर इमेजेज अवार्ड्स 2014

 - ‘स्टोरीज आफ स्पीसीज’ श्रेणी में मिला तीसरा पुरस्कार

- इस वर्ष यह पुरस्कार पाने वाले एक मात्र भारतीय
युवा वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सतपाल सिंह ने फोटोग्राफी के क्षेत्र में दुनिया का प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है। उन्हें मेलवीटा नेचर इमेजेज अवार्ड्स 2014 में पर्यावरण फोटोग्राफी के लिए तीसरा स्थान मिला है। वह इस साल यह पुरस्कार हासिल करने वाले इकलौते एशियाई है। उन्हें पुरस्कार राशि के तौर पर 500 यूरो (करीब 38 हजार रुपए) मिले हैं। सालाना होनी वाली इस प्रतियोगिता को टेरे सौवेज मैग्जीन (फ्रांस) और आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन आफ नेचर) आयोजित करता है। आईयूसीएन पर्यावरण के लिए काम करने वाला दुनिया का अग्रणी संगठन है। इससे 1200 से अधिक सरकारी व गैर सरकारी संगठन और 160 देशों के  लगभग 11,000 स्वयंसेवक विशेषज्ञ  जुड़े हुए हैं। इस प्रतियोगिता दुनिया भर के नामी-गिरामी फोटोग्राफर्स हिस्सा लेते हैं। इस अवॉर्ड समारोह में 10 श्रेणियां, 68 नामांकन और कुल 36 पुरस्कार दिए जाते हैं।



सतपाल को ‘स्टोरीज आफ स्पीसीज’ श्रेणी में तीसरा पुरस्कार मिला है। इस में सतपाल सिंह ने 12 फोटोग्राफ्स के द्वारा नन्ही सी जीव (वीवर आंट) चींटी की हरकतों , गतिविधियों व उसकी जीवन के विशेष पहलूओं को दुनिया के सामने रखना था।


एशिया से एकमात्र विजेता
सतपाल की यह उपलब्धि इस लिए भी खास है कि वह इस वर्ष यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले इकलौते एशियाई हैं। इससे पहले भी सतपाल ने देश-विदेश में फोटोग्राफी में कई पुरस्कार जीतकर देश को गौरवांवित किया है। सतपाल ने अमेरिका, इंग्लैंड, ग्रीस, सिंगापुर, रूस आदि देशों में अवार्ड्स जीतें है।   



गांव के होनहार की बड़ी छलांग

युवा फोटोग्राफर सतपाल सिंह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के एक गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता जसवंत सिंह  खेती करते हैं। मोहम्मदी कस्बे के समीप एक छोटे से गांव अलीनगर से निकलकर सतपाल ने विश्व पटल पर अपने प्रतिभा की छाप छोड़ी है व  देश का नाम ऊंचा कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद नाम अंकित करना उनके परिवार के साथ-साथ देश के मध्यमवर्ग और छोटे जगहों पर मौजूद प्रतिभा और काबिलियत को दर्शाता है। उन्होंने साबित किया कि इंसान कहां जन्म लेता हैं, उसके इरादों और हौसलों के सामने यह मायने नहीं रखता। अपनी कामयाबी पर सतपाल का कहना है कि यह मेरे फोटोग्राफी करियर की सबसे बड़ी उप्लब्धियिों में से एक है आईयूसीएन द्वारा मेरे काम को पहचाने जाने से मैं खुद को ऊर्जावान महसूस कर रहा हूं।

सतपाल सिंह फोटोग्राफी फेसबुक पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें।

(स्रोत- सतपाल सिंह, satpalsinghwlcn@gmail.com)

दुधवा लाइव डेस्क 

Feb 4, 2015

एक तेंदुए का क़त्ल- जहां इंसानियत और दरिन्दगी में फ़र्क को ही मिटा दिया गया

हापुड़ में हथियार बिना ही मार गिराया तेंदुआ

-शुक्रवार की रात को पहुंचा था जंगल में
-शनिवार की सुबह दो कुत्तों को बनाया निवाला
-आठ घंटे के आप्रेशन में ग्रामीणों ने बिना हथियार के मार दिया तेंदुआ
-पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की टीम पड़ी रही जंगल में
हापुड़। मुलित त्यागी
थाना हापुड़ देहात अन्तर्गत गांव वझीलपुर के जंगल में शुक्रवार की रात को पहुंचे तेंदुए ने शनिवार की सुबह दो कुत्तों को अपना निवाला बना डाला। जिसके बाद ग्रामीणों ने जंगल में तेंदुए की तलाश शुरू करते हुए अधिकारियों को सूचना दी। वन विभाग और ग्रामीण आठ घंटे तक तेंदुए को घेरने में लगे रहे जिसके बाद दोपहर तीन बजाकर दस मिनट पर छ ग्रामीणों ने सरसो के खेत में घुसकर तेंदुए को दबोच लिया। आधा घंटे तक ग्रामीणों और तेंदुए के बीच चली मुठभेड़ के बाद तेंदुआ मारा गया जबकि ग्रामीण बुरी तरह जख्मी हो गए। पुलिस ने घायलों को नर्सिंग होम में भर्ती कराया जबकि तेंदुए के  शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जिले की तीनों तहसीलों में दहशत का पर्याय बन रहे तेंदुए को शनिवार की दोपहर थाना हापुड़ देहात के गांव वझीलपुर-धनौरा के जंगल में उस समय मार डाला जब वह सरसो के खेत में घुस गया। शुक्रवार की रात को सूदने गांव की पुलिया पर परितोष त्यागी निवासी असौड़ा ने तेंदुआ देखा। जिसके बाद सूदना निवासी हरेन्द्र को दिखाई दिया। जिसके चलते रात में ही गांव में लाउडस्पीकर से एनोउंस करा दिया। शनिवार की सुबह होने पर तेंदुए वझीलपुर के जंगल में पहुंचा और दो कुत्तों पर हमला बोल दिया। सूचना मिलते ही धनौरा और वझीलपुर के ग्रामीणों जंगल में पहुंच गए और प्रशासनिक व वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। जिसके बाद वन विभाग, प्रशासन औप पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। डीएम के आदेश पर तेंदुए की पुष्टि होने पर मेरठ, गाजियाबाद से जाल मंगवाकर टीम को बुलाने के लिए कॉल कर दी गई। 


इस दौरान ग्रामीण जंगल में अडे रहे। तेंदुए ने राजकुमार त्यागी की सरसो के खेत में घुसकर दो बार खेत में खड़े यूकेलिप्टिस और नीम के पेड़ पर छलांग लगाते हुए दहाड़ लगाई। जिसके चलते वन विभाग और पुलिस टीम के साथ ग्रामीण भी पीछे हट गए। अपराहन करीब ढाई बजे वझीलपुर निवासी संदीप त्यागी, संजीव त्यागी, छोटू, भूरे, रिंकू, यूनूस आदि दिलेरी दिखाते हुए खेत में घुस गए। जहां पर बैठे तेंदुए से उनकी भिड़ंत हो गई। करीब तीस मिनट तक ग्रामीण युवाओं की टीम और तेंदुए के बीच कुश्ती चलती रही जबकि वहां पर खड़ी फोर्स और वन विभाग की टीम पीछे हट गई। करीब तीन बजकर दस मिनट पर ग्रामीणों की टीम ने तेंदुए को मार गिराया। जिसके बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। परंतु तीस मिनट तक चले संघर्ष में संदीप के सिर और चेहरे पर तेंदुए ने अपने पंजे से गंभीर घाव कर दिए जबकि अन्य युवक भी घायल हो गए। घायलों को एम्बुलेंस में तुरंत हापुड़ के नर्सिंग होम भेज दिया गया। जबकि पुलिस ने ग्रामीणों के विरोध के बीच तेंदुए के शव को वज्र वाहन में रखकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ग्रामीणों ने घायलों के इलाज व खेत में फसल क्षति होने पर पीड़ित किसान को मुआवजा दिलाए जाने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया।



आधा घंटे तक चली कुश्ती
तेंदुआ चित्त
लाइव---

सरसो के खेत से आ रही दहाड़ और पेड़ पर हो रही उछल कूद ने सैकड़ों ग्रामीणों समेत पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की टीम के होश उड़ा दिए। आठ घंटे तक चल रहे आप्रेशन तेंदुआ में शनिवार की दोपहर एक लाइव कहानी ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। सरसो के खेत में घुसे 6 युवाओं की करीब तीस मिनट तक तेंदुए से कुश्ती चली। जिसमें फिल्म हिम्मतवाला और सिलसिले की तरह संदीप ने तेंदुए के गले में हाथ डालकर कोली भर ली। आधा किलोमीटर के दायरे में फैली जनता की सांसें रुक गई।

राजकुमार त्यागी के सरसो के खेत में तेंदुआ घुस गया। किसान अपने खेत में घुसने से सभी को रोक रहा था तो लोगों की भी खेत में घुसने की हिम्मत नहीं थी। वन विभाग की टीम और पुलिस बाहर से खेत को घेर रही थी। सुबह सात बजे शुरू हुआ आप्रेशन तेंदुआ दो बजे तक यूं ही चलता रहा। जिसमें एसडीएम, डीएसपी समेत वन विभाग के अधिकारी और एसओ देहात नरेन्द्र शर्मा मय पुलिस बल के मौके पर पहुंचे। परंतु इस दौरान खेत से आ रही तेंदुए की दहाड़ से सबके दिल कांप रहे थे। तेंदुए ने दो बार नीम के पेड़ और यूकेलिप्टिस के पेड़ पर चढ़ाई की। किसी ग्रामीण ने तमंचे से गोली भी चलाने की कोशिश की। लेकिन इस बीच तेंदुआ नीचे आ गया। दो बजे वझीलपुर निवासी संदीप त्यागी उर्फ मोटा अपने दोस्तों के साथ बैठा। और करीब 2.30 बजे अपने साथियों के साथ खेत में जा घुसा। सरसो के बीच में बैठा तेंदुआ अपने पास ग्रामीणों को देख भड़क उठा और उनपर हमला बोल दिया। परंतु संदीप ने पीछे हटने के स्थान पर तेंदुए की गर्दन में हाथ फंसा दिए। जिसके बाद दूसरे साथियों ने उसपर बलकटी से प्रहार किया। परंतु खाल में बलकटी ने कोई काम नहीं किया। अन्य साथी लाठी और डंडे के साथ लात घुसे से उसपर वार करते रहे। तेंदुआ भी पंजे से उनपर बार बार हमला करता रहा। लोगों की सांसे थम गई और किसी ने अंदर घुसने की कोशिश नहीं की। सिर और हाथ पैरों पर हुए हमले से युवा टीम के खून निकल कर नीचे गिरने लगा। परंतु किसी भी युवक ने साहस नहीं छोड़ा और बिना किसी हथियार के ही तेंदुए को चित्त कर दिया। तीन बजकर दस मिनट पर तेंदुआ नीचे गिर गया। जिसके बाद साहसी युवओं की टीम खेत से बाहर निकल आई। वन विभाग और पुलिस टीम ने तेंदुए को कब्जे में ले लिया। जिसके बाद उसको वन विभाग ने मृत घोषित कर दिया।


-फिल्मी शूटिंग की तरह था नजारा---

वझीलपुर और धनौरा गांव के बीच जंगल में आज एक फिल्मी शूटिंग की तरह नजारा देखने को मिल रहा था। हाथों में लाइसैंसी हाथियार लिए ग्रामीण घूम रहे थे तो सिपाहियों के हाथ में भी राइफल्स थी। लाठी-डंडे भी खूब थे। खेतों में आवाज आ रही थी , भगदड़ मच रही थी। आठ घंटे तक ग्रामीण और तंत्र के गण वहीं लगे हुए थे। बीच बीच में तेंदुए की दहाड़ सुनाई पड़ रही थी। एक दहशत सबके चेहरे पर थी। लेकिन जब गांव के बहादुरों ने तेंदुए से कुश्ती लड़ी तो पूरे जंगल में लोग एसे खड़े हो गए जैसे फिल्मी शूटिंग देख रहे हो।

-मेरठ से भी पहुंच गई फ्लायंग स्कवायड--

रात से सूदना, धनौरा और वझीलपुर के जंगल में तेंदुआ की आवक को लेकर शनिवार की सुबह डीएम के आदेश पर जहां हापुड़ वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। वहीं मेरठ से भी फ्लाइंग स्कवायड़ की टीम पहुंच गई थी।

-वझीलपुर के बहादुरों की हुई जय-जयकार---

तेुंदआ के मरने के बाद ग्रामीण एकत्र हो गए। जिन्होंने संदीप समेत सभी युवकों के नाम से जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। काफी देर तक जंगल में नारेबाजी होती रही। हर युवा और ग्रामीण खुश था। वी व्हाटसऐप पर वीडियो और इमेज लिए जा रहे थे।

-फसलों के नुकसान का मुआवजा मांगा---

राजकुमार त्यागी की सरसो और जेई की फसल पूरी तरह चौपट हो गई। जिसको लेकर ग्रामीणों में भारी रोष भी व्याप्त है। ग्रामीणों ने मांग की तेंदुआ आप्रेशन में जिस फसल का नुकसान हुआ है उसका शासन से मुआवजा दिलाया जाए।


-नहीं उठने दिया तेंदुए का शव---

तेंदुए के शव को लेकर वन विभाग की टीम ने कार स्टार्ट की तो ग्रामीणों का पारा ऊपर चढ़ गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए कार को रोक लिया। इस दौरान कार से तेंदुए का शव बाहर निकाल लिया गया। जिसके बाद पुलिस ने शव को वज्र वाहन में रखा।


--बहादुरों की जुबानी तेंदुआ आप्रेशन की कहानी---
किसान और टाटा चलाने वाले संदीप का कहना था कि जब खेत में घुस गए तो तेंदुए ने झपट्टा मार दिया। हमे लगा कि भागे तो भी तेंदुआ मार डालेगा। इससे क्यों न इससे मुकाबला किया जाए। जिसके बाद मैने तेंदुए की गर्दन में हाथ डाल दिए। उसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता चला और उससे लड़ाई होती रही।
-संजीव त्यागी हापुड़ पैथोलॉजी पर काम करता है। जिसका कहना था कि जब संदीप और अन्य साथी उससे भिड़ गए तो हमने भी पीछे नहीं मुडकर देखा। और उनके साथ ही तेंदुए पर भिड़ गए।
-यूनूस भी मजदूरी करता है। जिसने बताया कि तेंदुए की दहशत से हर आदमी परेशान था। जब वह सामने आ गया तो फिर पीछे हटने को दिल नहीं करा और भिड़ गए।
-सैनी का कहना था कि तेंदुए से भिड़ने से पहले दहशत थी परंतु जब तेंदुए ने हमला किया तो अपने बचाव के साथ उससे लड़ना पड़ा।
वही राष्ट्रीय सैनिक दल के कार्यकर्ता ज्ञानेन्द्र त्यागी ने बताया कि तेंदुए ने इन युवकों पर झपट्टा मारा। उसके बाद ये भिड़ गए तो फिर पूरे गांव ने ही तेंदुए पर हमला बोल दिया और लात घुसे व लाठी डंडों से प्रहार किया। बाकि पल पल की सूचना ज्ञानेन्द्र पुलिस प्रशासन औप वन विभाग को देते रहे।


-हापुड़ जिले में दूसरी बार मारा गया तेंदुआ---

करीब दस साल से हापुड़ की गढ़ और धौलाना तहसील में तेंदुए का आतंक था। करीब पांच साल पहलरे जनपद गाजियाबाद के समय थाना बहादुरगढ़ के गांव सेहल के जंगल में भी ग्रामीणों और तेंदुए के बीच भिड़ंत हुई थी। जिसमें सिपाही समेत 21 किसान घायल हो गए थे। इस भिड़ंत में भी तेंदुए को मार गिराया गया था।

-अभी एक तेंदुआ और है जंगल में---

ग्रामीणों की माने तो एक तेंदुआ अभी भी जंगल में है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सरसो में घुसा था जबकि दूसरा गन्ने के खेत में घुसा हुआ था। ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक दूसरे तेंदुए को न पकड़ा जाए तब तक वन विभाग की टीम जंगल में ही डेरा डाले।

-लगातार काम्बिंग होगी--

वन विभाग के उप प्रभागीय निदेशकर केसी वाजपेयी का कहना है कि मृतक तेंदुए की उम्र करीब तीन या चार साल है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद तेंदुए का हाफिजपुर में अंतिम संस्कार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण एक और तेंदुआ बता रहे है जिसके लिए वन विभाग जंगल में लगातार काम्बिंग करेगा।

-घटते जंगल बन रहे तेंदुआ प्रजाति के लिए काल--

हापुड़ जिले में अब तक दो तेंदुए को मार दिया गया है। जबकि इसके अलावा मेरठ और हस्तिनापुर में भी तेंदुआ मारा जा चुका है। वहीं लखीमपुर और बिजनौर में भी तेंदुओं की मौत हुई है। जिसमें विशेषज्ञों का कहना है कि घटते जंगल के चलते तेंदुए आबादी की तरफ भाग रहे है। जहां पर इनकी भिड़ंत इंसानों से हो रही है। तेंदुआ आबादी की तरफ आकर गन्ने के खेत को अपने लिए सुरक्षित मानता है परंतु इन दिनों गन्ने की कटाई के चलते तेंदुआ किसानों के सामने आ जाता है। डीएफओ केसी वाजपेयी का कहना है कि गन्ने के खेत में तेंदुआ इस लिए घुसता है क्योंकि जंगल से भाग कर आने के बाद वह ईख को ही जंगल मानता है।


न जाल और न गन, खाली हाथ कैसे पकड़ती वन विभाग की टीम तेंदुआ

-चार साल में दो तेंदुआ बने काल के ग्रास
-अपनी जान पर खेल कर ग्रामीणों ने दिया साहस का परिचय
-न मारते तो आदमखोर बन जाता तेंदुआ
हापुड़। वरिष्ठ संवाददाता


तेंदुए का शोर मचने और जिले में दर्जनों कुत्तों व नील गाय का शिकार करने वाले तेंदुए को भले ही ग्रामीणों ने अदम साहस का परिचय देकर मार डाला परंतु इस आप्रेशन ने वन विभाग की पोल खोल कर रख दी है। बिना जाल और बिना बंदूक के पहुंची टीम बस खेत के बाहर खड़ी होकर औपचौरिकता निभाती रही। अगर आज तेंदुआ बच जाता तो वह आदमखोर होकर ग्रामीणों के लिए खतरा बन सकता था।
पिछले सात साल से तेंदुआ गढ़ और हापुड़ के लिए दहशत बना हुआ है क्योंकि जहां गढ़ क्षेत्र में तेंदुआ अब तक कई लोगों को घायल कर चुका है वहीं दर्जनों कुत्ते व नील गायों का भक्षण भी कर चुका है। इसके अलावा शनिवार की सुबह भी वझीलपुर के जंगल में तेंदुए ने दो कुत्तों पर हमला बोल दिया। खेतों में काम कर रहे किसानों के सामने जान बचाने का संकट उत्पन्न हो गया। रात को ही वन विभाग को तेंदुआ आने की सूचना दे दी गई जबकि सुबह को मीडिया ने भी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। परंतु उसके बाद भी वन विभाग की टीम की पोल उस समय खुल गई जब तेंदुआ होने के वझीलपुर के जंगल में पुष्टि हो गई और पूरी टीम खाली हाथ खड़ी रही। टीम के पास न जाल था और न ही बेहोश करने वाली बंदूक थी। सुबह सात बजे से हजारों ग्रामीण खेतों पर थे। लेकिन वन विभाग कीीटम आराम से खेतों के बाहर घूमकर कर ही औपचारिकता निभा रही थी। तेंदुए की दहाड़ औक पेड़ पर चढ़ने से गांव दहशत में आ गए थे।


-साहस न दिखाते तो दर्जनों ग्रामीणों को मार देता तेंदुआ---
खेत में घुसे युवकों पर तेंदुए ने हमला बोल दिया। हमला बोलते ही संदीप और संजीव व यूनूस घायल हो गए और खून से लथपथ हो गए। साहस का परिचय देते हुए युवकों ने तेंदुए को खेत में ही रोक लिया और बिना हथियार के उससे भिड़ गए। ग्रामीणों ने लात घूसों से ही उसको इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। परंतु चर्चा है कि अगर 6 लोग साहस न दिखाते तो आदमखोर बनकर उन लोगों पर हमला करने वाला तेंदुआ दर्जनों ग्रामीणों को मार देता। क्योंकि वहां पर खड़े वन विभाग की टीम खाली हाथ खड़ी हुई थी।
-डीएफओ का कहना है कि जिले में बेहोश करने वाली बंदूक व जाल नहीं है। जिसको मंगाया गया था। उन्होंने दावा किया मेरठ से फ्लाइंग स्कावयड की टीम पहुंच गई थी।



500 अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी

हापुड़। वन विभाग ने तेंदुआ की मौत के बाद हापुड़ देहात थाना में पांच सौ लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। डीएफओ केसी वाजपेयी ने जानकारी देते हुए बताया कि वाइल्ड़ लाइफ प्रोटेक्शन के अन्तर्गत पांच सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई है।





मुलित त्यागी (वरिष्ठ पत्रकार)
हापुड़ 




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