International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Dec 31, 2015

पद्म भूषण बिली अर्जन सिंह की सातवीं पुण्यतिथि पर बाघ सरंक्षण पर कार्यशाला

Jasbeer Nagar-Pallia

विश्व विख्यात बाघ सरंक्षक पद्म भूषण बिली अर्जन सिंह की स्मृति में बाघ सरंक्षण पर कार्यशाला का आयोजन-

Billy Arjan Singh 
(15 Agust 1917-01 Jan 2010)
पलिया-खीरी, कल दिनांक एक जनवरी 2016 को पद्म भूषण स्वर्गीय बिली अर्जन सिंह की 7वीं पुण्यतिथि पर दुधवा लाइव संगठन द्वारा टाइगर मैन बिली अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि दी जायेगी जिसमें अर्जन सिंह से जुड़े हुए लोग, पर्यावरणविद्, वन्य जीव प्रेमी व् जनपद के छात्र छात्राएं उपस्थित रहेंगें। कार्यक्रम के संयोजक वन्य जीव विशेषज्ञ व् संस्थापक दुधवा लाइव कृष्ण कुमार मिश्र के संयोजन में यह कार्यक्रम कराये जाएंगे।
कार्यक्रम रूपरेखा- 

1-प्रात: बिली अर्जन सिंह की टाइगर हैवेन स्थित समाधि पर पुष्पांजलि।

2-दोपहर सम्पूर्णानगर मार्ग पर स्थित बिली साहब के आवास पर बाघ सरंक्षण जागरूकता विषय पर गोष्ठी।
3- सांयकालीन जसवीर नगर में बिली अर्जन द्वारा बाघ व् तेंदुओं पर किए गए प्रयोगों से सम्बंधित फ़िल्में दिखाई जाएंगी।
बिली अर्जन सिंह के जसवीर नगर स्थित आवास के मौजूदा सरंक्षक व् ऑनर वन्य जीव प्रेमी व् बिली के जीवन पर आधारित पुस्तक टाइगर ऑफ़ दुधवा के लेखक शमिन्दर बोपाराय कार्यक्रम का संचालन करेंगें।

बाघ सरंक्षण व् दुधवा नेशनल पार्क की अतुलनीय जैवविवधिता पर वन्य जीव विशेषज्ञ गोष्ठी में एक विमर्श आयोजित करेंगे ताकि तराई की इस हरी भरी धरती को सरंक्षित व् सवंर्धित किया जा सके।

कार्यक्रम में दुधवा नेशनल पार्क के उप निदेशक पी पी सिंह, राज्य सभा सांसद रवि प्रकाश वर्मा, डॉ वी पी सिंह  वन्य जीव बोर्ड उत्तर प्रदेश के सदस्य विधायक सुनील कुमार लाला, स्थानीय विधायक पलिया रोमी साहनी, वनस्पति विज्ञान प्रवक्ता ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, और बिली अर्जन सिंह से जुड़े हुए तमाम लोग महान बाघ सरंक्षक को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र छात्राएं इस आयोजन में हिस्सा लेंगे जिन्हें बिली अर्जन सिंह के बाघ सरंक्षण की महान कहानियों से परिचित कराया जाएगा ताकि भविष्य में यह नही पीढ़ी बाघ और जंगल के रिश्ते को समझ सके और समाज में वन्य जीवन के सरंक्षण का सन्देश प्रसारित व् प्रचारित करने के लिए प्रेरित हो।

दुधवा लाइव डेस्क 

Dec 25, 2015

नार्थ खीरी वन प्रभाग में एक जंगली हाथी की मौत



लखीमपुर-खीरी, बुधवार २३ दिसम्बर को दुधवा नेशनल पार्क से सटे नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन में एक जंगली हाथी की मौत हो गयी, घटना नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन की पलिया रेंज के मकनपुर बीट की बताई जा रही हैं, ग्रामीणों ने जंगली हाथी के शव को देखकर वन विभाग को सूचित किया, वन अधिकारी मौके पर पहुँच कर शव को अपने कब्जे में लिया, मौत के कारण अज्ञात बताये जा रहे हैं, सूत्रों के मुताबिक़ हाथी के शरीर पर कोइ भी चोट के निशान मौजूद नही हैं और न ही आपसी संघर्ष के कोइ चिन्ह मिले हैं.



डाक्टर नेहा सिंघई, सौरभ सिंघई, डी आर निगम ने हाथी के शव का पोस्टमार्टम किया, रिपोर्ट में मौत का कारण स्वाभाविक बताया गया है. पोस्टमार्टम के बाद शव को मौके पर दफ़न कर दिया गया, इस दौरान दुधवा नेशनल पार्क के डी डी पी पी सिंह, एस डी ओ अशोक कुमार, नार्थ खीरी वन प्रभाग पलिया के रेंजर आर के दीक्षित मौजूद रहें.

गौर तलब है दुधवा नेशनल पार्क से सटे नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से हाथियों का माइग्रेशन दुधवा व् खीरी के नार्थ फारेस्ट डिवीजन में प्रत्येक वर्ष होता है, साथ ही स्थाई तौर पर भी दुधवा में जंगली हाथी मौजूद हैं.

दुधवा लाइव डेस्क    

Dec 16, 2015

पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघिन ने उ.प्र. में दी दस्तक



बाघों के पुराने कॉरीडोर को चिन्हित कर रही है यह बाघिन 
सुरक्षा हेतु अनुश्रवण दलों व दो हांथियों को किया गया तैनात 
पन्ना, 10 दिसम्बर - 
म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व में जन्में बाघ अब पडोसी राज्यों के जंगल में भी दस्तक देने लगे हैं. यहां बाघों का घनत्व अधिक होने के कारण युवा नर व मादा बाघ अपने लिए नये घर की तलाश में बाहर निकल रहे हैं. बीते माह 24 नवम्बर को पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से बाहर निकली दो वर्ष की युवा बाघिन पन्ना - 213 (22) उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में पहुंच गई है, फलस्वरूप बांदा, कर्बी व चित्रकूट वन मण्डल के अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है. 

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आलोक कुमार ने बताया कि मौजूदा समय बाघिन पन्ना - 213 (22) उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में विचरण कर रही है. इस बाघिन की सुरक्षा हेतु पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के द्वारा अनुश्रवण दलों के साथ दो प्रशिक्षित हांथियों को तैनात किया गया है. टाइगर रिजर्व के अधिकारी उत्तर प्रदेश वन विभाग के आला अफसरों, वन संरक्षक बांदा, वन मण्डलाधिकारी कर्बी तथा वन मण्डल चित्रकूट के सतत संपर्क में हैं. आलोक कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग एवं जिला प्रशासन से बाघिन की सुरक्षा एवं अनुश्रवण में आवश्यक सहयोग प्राप्त हो रहा है. क्षेत्र संचालक ने बताया कि चूंकि पन्ना टाइगर रिजर्व से पहली बार किसी बाघिन के इस तरह से बाहर लम्बी दूरी पर निकलने की जानकारी हुई है, इसलिए उसके स्वभाव तथा नये भौगोलिक क्षेत्र में विचरण की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है. 

दिसम्बर 2013 में जन्मी थी यह बाघिन 
पन्ना बाघ पुर्नस्थापना योजना की सफलतम रानी कही जाने वाली कान्हा की बाघिन टी - 2 ने पन्ना - 213 को अक्टूबर 2010 में जन्म दिया था. बाघिन पन्ना - 213 ने नर बाघ पन्ना - 111 से जोड़ा बनाकर दिसम्बर 2013 में चार शावकों को जन्म दिया जिनमें तीन मादा व एक नर शावक हैं. इन्हीं तीन मादा शावकों में से एक बाघिन पन्ना-213 (22) है जो इन दिनों उ.प्र. के जंगलों में विचरण कर रही है. मालुम हो कि विगत 24 नवम्बर को पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र से बाहर निकलकर यह बाघिन उत्तर वन मण्डल पन्ना के परिक्षेत्र विश्रामगंज व देवेन्द्रनगर होते हुए सतना वन मण्डल के सिंहपुर एवं बरौंधा वन परिक्षेत्र में पहुंची. जहां से विचरण करते हुए यह पडोसी राज्य उ.प्र. के जंगल में प्रवेश कर गई है. 

अपने पूर्वजों का कर रही है अनुकरण 
पन्ना टाइगर रिजर्व से नर बाघों के बाहर निकलने के कई उदाहरण हैं, लेकिन मादा बाघिन के पहली बार बाहर जाने की बात प्रकाश में आई है. यह इसलिए ज्ञात हो सका क्यों कि बाघिन पन्ना - 213 (22) रेडियो कॉलर पहने है. जाहिर है कि पूर्व में नर व मादा बाघ इसी तरह से बाहर जाते रहे होंगे, लेकिन रेडियो कॉलर न होने के कारण उनके बाहर निकलने की जानकारी नहीं हो पाती थी. अब इस बाघिन ने लम्बी दूरी तय करते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि उनके पूर्वज इस मार्ग का उपयोग करते रहे हैं. बाघों का यह पुराना कॉरीडोर है जिससे होकर यहां के बाघ उ.प्र. तथा वहां के बाघ यहां आते - जाते रहे हैं. इससे यह भी पता चलता है कि जंगली बाघों में इन ब्रीडिंग की समस्या कभी नहीं रही. 

बाघिन की सुरक्षा में जुटे हैं दो प्रान्त 
पन्ना टाइगर रिजर्व की इस युवा बाघिन की सुरक्षा में म.प्र. के साथ - साथ उत्तर प्रदेश का वन विभाग भी जुट गया है. क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आलोक कुमार ने यूनीवार्ता को बताया कि इस बाघिन के संबंध में मुख्यालय से मार्गदर्शन मिलने पर उसे पन्ना टाइगर रिजर्व में वापस लाने का कार्यक्रम बनाया जायेगा. आपने कहा कि आगे की कार्यवाही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली, वन विभाग म.प्र. एवं उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर की जावेगी. श्री कुमार ने सभी आम और खास से आग्रह किया है कि जन समर्थन से बाघ संरक्षण की दिशा में बाघिन पन्ना - 213 (22) की सुरक्षा में आवश्यक सहयोग प्रदान करें. 

अरुण सिंह 
पन्ना, मध्य प्रदेश, भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

Dec 12, 2015

भारत वायु प्रदूषण पर त्वरित कार्यवाही करने में असफलः अपर्याप्त व्यवस्था होने से लोगों का स्वास्थ्य खतरे में

Photo Courtesy: Getty Images/The Telegraph 

नई दिल्ली, 10 दिसम्बर, 2015 ग्रीनपीस ने कहा है कि यदि आज कहा कि भारत में भी बीजिंग की तरह हवा की गुणवत्ता मापने का अलार्म सिस्टम होता तो उत्तर भारत के अधिकतर हिस्से में नवंबर 2015 से ही रेडएलर्ट घोषित हो गया होता। भारत के वायु गुणवत्ता सूचकांक नेशनल एयर क्लालिटी इंडेक्स (एन ए क्यू आई ) के वेबसाइट से सितबंर से लेकर नवबंर तक 91 दिनों के एकत्रित किए गए आकड़ों से पता चलता है किचीन के रेड एलर्ट के मापदंड अनुसार दिल्ली में 33 दिनों और लखनऊ में 41 दिनों का रेड एलर्ट घोषित किया जा चुका होता। ये समस्या सिर्फ दिल्ली की ही नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर भारत के कई शहरों में भी प्रदूषण काइतना ही बुरा हाल है।

ग्रीनपीस एशिया के ग्लोबल कैंपेनर लौरी मिल्लीविर्ता का कहना है, “बीजिंग ने अपना पहला रेड एलर्ट जारी करके न सिर्फ स्कूलों को बंद किया है बल्कि कारखानों, वाहनों, निर्माण कार्यों और अन्य गतिविधियों सेप्रदूषण कटौती करने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। इस कार्यवाही से निश्चित रूप से पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण पर असर दिखा। हालांकि चीन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि वह बिजली संयत्रों,उद्योगों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाए और नई उत्सर्जन प्रणाली से कोयले की खपत को कम करके प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर पर अन्य और कई उपाय लागू करे।”

भारत चीन के अनुभव का लाभ उठाकर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करने की दिशा में एक लंबी छंलाग लगा सकता है। उदाहरण के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय यह है कि भारत अपने राष्ट्रीय और क्षेत्रीयस्तर पर कार्यनीति के लिए ठोस, समयबद्ध लक्ष्य सुनिश्तित करे।

चीन में यदि एक्यूआई सिस्टम वायु गुणवत्ता सूचनांक 200 के स्तर पर दर्शाए ( जो कि पी एम 10 की गहनता 350 माइक्रोग्राम / मीटर क्यूब दर्शाता है ) और अगर यह स्तर अगले तीन दिनों तक लगातार वैसे रहनेकी भविष्यवाणी हो, तो रेड एलर्ट जारी किया जाएगा। लेकिन भारत में यह स्तर 300 पर तय की गई है, परंतु इसका असर क्या होगा इसका कोई आकलन नहीं किया जाता है, न ही कोई चेतावनी जारी करने की हीकोई व्यवस्था है । इसलिए इस तरह के प्रोटोकॉल को लागू करने की जरूरत है जिससे कि जनता को सूचना मिले और उनके उपर पड़ने वाले प्रभाव पर इसका असर हो। दूसरी तरफ दीर्धकालीन स्वच्छ हवा के लिएपरंपरागत बिजली उत्पादन से हटकर जीवाश्म आधारित बिजली संयत्रों पर फोकस करने की जरूरत है। इसलिए ग्रीनपीस ने पेरिस में चल रहे जलवायु वार्ता में भारत के महत्वाकांक्षी सौर ऊर्जा के लक्ष्यों के लिए भारतसरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया है।

ग्रीनपीस इंडिया के कंपैनर सुनील दहिया का कहना है, “सरकार के खुद के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के अनेक शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर बीजिंग से भी ज्यादा बदतर है लेकिन अभी भी हम इस वायु प्रदूषण केप्रकोप को पहचाने में झिझक रहे हैं। यह जरूरी है कि एक ठोस नीति बनाई जाए जिससे कि वायु प्रदूषण संकट का समाधान खोजा जा सके। इसके साथ ही लोगों को निजी स्तर पर खुद पर नियंत्रण करना होगा, नएनियम-कानूनों का पालन करना पड़ेगा चाहे वह कितने भी सख्त क्यों न हो। हमारे लिए चुनौती ये है कि हम देश को ’क्लीन एयर नेशन’ की दिशा में किस तरह ले जा सकते हैं।”

CityNo. of days that would have qualified as ‘Red Alert’ Total days of data captured
Agra2030
Ahmedabad57
Delhi2930
Faridabad2130
Jaipur1011
Kanpur2130
Lu           Lucknow2930
Muzaffarpur2630
Patna2226
Pune1130
Varanasi2330


--
जितेन्द्र कुमार
Jitendra Kumar 
jitendra.kumar@greenpeace.org

सीतापुर में शिकारियों के जाल में फंसा तेंदुआ...


कौतूहल, और दहशत के वो आठ घंटे.............
शिकारी ने ऐसा बिछाया जाल ’तेंदुआ’ हुआ बेहाल 
जाल में फंसकर आठ घंटे तक छटपटाता रहा तेंदुआ, पैर हुआ घायल, बेहोश कर पिंजरे में ले गई लखनऊ से आई विशेषज्ञों की टीम 

पंकज सिंह गौर। सीतापुर 
बाघ और तेंदुआ के अनेकों किस्से आपने सुने और देखे होंगे, लेकिन थाना इमलिया सुल्तानपुर इलाके के कोरैय्या उदयपुर में तेंदुए की दीन हीन दशा पहली बार देखने को मिली। जिसके चलते हर कोई सिहरन लेकर उसके करीब तक पहुँच गया और बेचारा तेंदुआ उसे देखकर गुर्राने के अलावा कुछ नही कर सका, कारण गन्ने के खेत को बचाने के लिये शिकारी द्वारा जंगली सूकर के लिये लगाये गये जाल के लोहे के फन्दे में तेंदुए का एक पैर बुरी तरह फंस गया। अपने को छुड़ाने के लिये उसने हर जतन की पर उसकी एक नही चल सकी। यह खबर इलाके में जंगल में आग की तरह फैल गयी, 30 किलोमीटर की दूरी के लोग वहां जा पहुंचे। तेंदुए की एक झलक पाने के लिये लोगों में कौतूहल मच गया जिसने तेंदुए को देख लिया वह रोमांचित हो गया और दहशत में पुलिस और वन विभाग की टीम रही .



जनपद मुख्यालय से करीब 15 किमी. दूर कोरैय्या उदयपुर में सुबह तेंदुए के जाल में फंस जाने की खबर फैली। गांव के रामकुमार शुक्ला ने बताया कि उन्होंने गन्ने के खेत को जंगली सूकरों और नीलगाय से बचाने के लिये जाल लगवाया था जिसमें तेंदुआ फंस गया। गांव वालों के मुताबिक रात में लगाये गये जाल को देखने के लिये सुबह जब शिकारी खेत पर पहुंचा तो उसमें तेंदुए को फंसा देख उसका हाल बेहाल हो गया और उसने इसकी खबर गांव में दी फिर फरार हो गया। इसके बाद गांव के लोगों की भीड़ वहां पहुंचने लगी थोड़ी ही दूरी पर स्थित थाना इमलिया सुल्तानपुर के एसओ बेनीमाधव त्रिपाठी अपने दल-बल के साथ वहां पर जा पहुंचे तत्काल झरेखापुर चैकी इंचार्ज सतीश यादव, इमलिया सुल्तानपुर के एसआई शिवकुमार सिंह को भी बुला लिया और तेंदुए से कुछ दूर रहकर लोगों को वहां आने जाने से रोकते रहे।



 भीड़ बढ़ते देख एसओ ने एसपी को जानकारी देकर अन्य थानों की फोर्स मांगी। इधर डीएम डा. इन्द्रवीर सिंह यादव और एसपी कवीन्द्र प्रताप सिंह को इसकी जानकारी फोन से लोग देने का प्रयास करते रहे पर मीटिंग में व्यस्त होने के चलते किसी भी अधिकारी ने खबर लेने की जरूरत नही समझी। डीएफओ एपी त्रिपाठी को तत्काल एसओ ने सूचना दी पर उनके स्तर से भी वन विभाग के अन्य अधिकारियों को तत्काल नही भेजा जा सका। इधर तेंदुआ को देखने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही थी, जाल में फंसा तेंदुआ लोगों को अपने पास आते देख हमलावर होता जा रहा था जिसको देखकर सुरक्षा कर्मियों की हालत पतली होती जा रही थी कि कहीं अगर तेंदुआ छूट गया तो फिर मौजूद लोगों को जान बचाना मुश्किल हो जायेगा। सूचना के 7 घंटे बाद डीएफओ एपी त्रिपाठी लहरपुर के वन क्षेत्राधिकारी एसपी सिंह, सीतापुर के वनक्षेत्राधिकारी एस तोमर, वन दरोगा राजकुमार अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे।


 8 घंटे बाद लखनऊ जू से विशेषज्ञों की टीम वरिष्ठ पशु चिकित्सक वन्य जन्तु डा. उत्कर्ष शुक्ला के नेतृत्व में पहुंची। जीप पर सवार रहकर ट्रेन्क्यूलाइज गन से डा. उत्कर्ष शुक्ला ने निशाना साधते हुए तेंदुए पर बेहोशी का पहला इंजेक्शन चलाया, लगने के बाद भी तेंदुआ पूरी तरह बेहोश नही हो सका। दस मिनट बाद जीप से उतरकर पास में जाकर पुनः ट्रेन्क्यूलाइज गन से बेहोशी का इंजेक्शन चलाया और फिर पांच मिनट बाद तेंदुआ बेहोश हो गया जिसे जाल में डाल कर साथ लाये पिंजड़े में रखने के बाद लखनऊ लेकर चले गये। इस बीच 8 घंटे तक तेंदुआ जाल से छूटने के लिये छटपटाता रहा।



कोरैय्या उदयपुर गांव के जिस गन्ने के खेत में जाल में तेंदुआ फंसा था उससे महज दस मीटर दूर कार में रहकर जान जोखिम में डाल तेंदुए की हर गतिविधि और फिर उसको बेहोश करने से लेकर उसे पिंजड़े में कैद करने के साथ ही तेंदुए को देखने के लिये उमड़ी भीड़ और सफल आपरेशन करने वाली लखनऊ से आई टीम की हर कार्रवाई पर वरिष्ठ पत्रकार पंकज सिंह गौर, शेर सिंह, फोटोग्राफर दुर्गेश शुक्ला, बबलू सिंह चैहान व उदय सिंह की रही नजर इस दौरान अनेकों बार हमारी टीम पर तेंदुआ ने हमलावर होने का प्रयास भी किया।


पहले होगा इलाज फिर छोड़ा जायेगा जंगल में-डा. उत्कर्ष
तेंदुए को बेहोश कर पिंजड़े में कैद करने वाले डिप्टी डायरेक्टर लखनऊ जू व वरिष्ठ पशु चिकित्सक वन्य जन्तु डा. उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि यह काफी बड़ा तेंदुआ है इसे वह ट्रेन्क्यूलाइज कर जू लखनऊ ले जा रहे हैं, जाल में फंसने से इसका पैर बुरी तरह घायल हो गया है पहले इसका इलाज होगा ठीक होने पर इसे जंगल में छोड़ा जायेगा। 15 दिन पूर्व अलादादपुर में आये तेंदुए को भी डा. शुक्ला ने ट्रेन्क्यूलाइज कर पिंजड़े में कैद किया था बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया।


मैटिंग सीजन के चलते मैदानी भाग में आ गए बाघ और तेंदुए-डीएफओ
डीएफओ डा. एपी त्रिपाठी ने बताया कि कोरैय्या उदयपुर में लोगों द्वारा अपनी फसलों को जंगली सूकर व नीलगाय आदि से बचाने के लिये लगाये गये खेतों में जाल में तेंदुआ फंस गया था। जिससे उसका पैर जख्मी हो गया है, लखनऊ जू ले जाकर उपचार किया जायेगा। सीतापुर में बाघ और तेंदुए के आने के मामलों में बताया कि पहली वजह है कि यह इनका मैटिंग सीजन है जिससे यह डिस्टर्ब होते हैं और जंगल से भाग कर गन्ने के खेतों में शरण ले लेते हैं और दूसरा कारण है कि यह टेरेटोरियल जानवर हैं, जिसमें हर जानवर का अपना एक सुरक्षित इलाका होता है और वहां किसी भी घुसपैठिये को दूर खदेड़ दिया जाता है। इसलिये यह जानवर जंगल से बाहर चले आते हैं।
सभी फोटो-दुर्गेश शुक्ला

पंकज सिंह गौर  
वरिष्ठ पत्रकार
सीतापुर 
pankaj.singh.gaur22@gmail.com

Dec 7, 2015

केन - बेतवा जोड़ से डूबेगा पन्ना के बाघों का बसेरा



नदियों को जोडऩे की नहीं बल्कि नदियों से जुडऩे की जरूरत 
जीवनदायिनी नदी के नैसर्गिक प्रवाह को रोकना खतरनाक 

पन्ना,
बाघों से आबाद हो चुके म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व को फिर से उजाडऩे की तैयारियां चल रही हैं. जिस टाइगर रिजर्व के वजूद को कायम रखने के लिए पन्ना वासियों को प्रगति व आर्थिक समृद्धि से वंचित होना पड़ा है, अब उसे कहीं अन्यत्र खुशहाली लाने के लिए नष्ट किया जा रहा है. जंगल व वन्य प्रांणियों को सहेजने व उन्हें संरक्षित करने के लिए पन्ना के नागरिकों ने जो कुर्बानी दी है, उसके एवज में उन्हें पुरस्कार मिलना तो दूर उनकी राय जानने की भी जरूरत नहीं समझी गई. सरकार की इस हिटलरशाही से पन्ना जिले के लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. 

उल्लेखनीय है कि लगभग 17 हजार करोड़ रू. की लागत वाली केन - बेतवा लिंक परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार दोनों ही संकल्पित नजर आ रहे हैं, जिससे पन्ना जिले के नागरिक चिन्तित हैं. इस परियोजना के तहत निर्मित किये जाने वाला ढोढऩ बांध पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बनेगा, फलस्वरूप कोर क्षेत्र का 58 वर्ग किमी. डूब से नष्ट हो जायेगा. इसके अलावा पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र का 105 वर्ग किमी. का किशनगढ, पलकोहा एवं भुसौर क्षेत्र अलग - थलग पड़ जायेगा. इतना ही नहीं बफर क्षेत्र का भी 34 वर्ग किमी. वन क्षेत्र डूब से प्रभावित होगा. इस तरह से पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र का 163 वर्ग किमी. जिसमें घना जंगल है नष्ट हो जायेगा, परिणाम स्वरूप पन्ना टाइगर रिजर्व का वजूद ही नहीं बचेगा. जन समर्थन से बाघ संरक्षण के नारे को चरितार्थ करते हुए पन्ना वासियों ने जिस तरह से बाघों की उजड़ चुकी दुनिया को फिर से आबाद करने में कामयाबी पाई है, उससे पूरी दुनिया चमत्कृत है. यहां के अनूठे प्रयोग को देखने व समझने के लिए दुनिया भर के लोग टाइगर रिजर्व में आ रहे हैं, जिससे पर्यटन विकास की संभावनाओं को नई ऊर्जा मिली है. बाघ और वन्य प्रांणी अब यहां विकास में बाधक नहीं बल्कि विकास के वाहक बन रहे हैं. ऐसे में केन - बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर पन्ना के बाघों व जंगल की कुर्बानी कहां तक न्यायोचित है. 

शुरू से ही विवादों में घिरी रही यह परियोजना पन्ना जिले के लिए तो घातक है ही, यहां के अनगिनत वन्य जीवों, बाघों व जंगल के लिए भी विनाशकारी साबित होगी. देश की इकलौती प्रदूषण मुक्त जीवनदायिनी केन नदी का प्रवाह रूकने से वह भी मृतप्राय हो जायेगी. नदी के बहाव से छेड़छाड करना जीवन से छेड़छाड़ करने जैसा है. देश के ख्यातिलब्ध पर्यावरण विद एच.एस.पवांर (पद्मभूषण से सम्मानित) ने भी केन - बेतवा लिंक परियोजना के होने वाले घातक परिणामों से सरकार को सचेत किया है. जल बाबा के नाम से प्रसिद्ध मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त राजेन्द्र सिंह का भी यह कहना है कि केन - बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना जिले को कोई लाभ नहीं होगा, यह परियोजना सिर्फ ठेकेदारों की जेब भरेगी. उन्होंने कहा कि केन - बेतवा को जोडऩे की नहीं बल्कि केन - बेतवा से लोगों को जोडऩे की जरूरत है. समाज पानी के व्यापार और कुदरत के साथ खिलवाड़ की साजिश को समझे और योजना बद्ध तरीके से इसका पुरजोर विरोध करे तभी प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा संभव है. 


परियोजना पर पुर्नविचार जरूरी 
भाजपा के जिलाध्यक्ष एवं पन्ना जिले के विचारशील युवा नेता सतानंद गौतम ने केन - बेतवा लिंक परियोजना पर पुर्नविचार किये जाने की आवश्यकता जताई है. पन्ना के बाघों की वापसी पुस्तक के विमोचन समारोह में उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बाघ पुर्नस्थापना योजना की सफलता से पन्ना का गौरव बढ़ा है. पन्ना के विकास में पार्क सहभागी बने, इस दिशा में प्रयास होने चाहिए. 
सदानंद गौतम 
अरुण सिंह 
पन्ना- मध्य प्रदेश 
भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

पन्ना के बाघों को अब कुत्तों से ख़तरा



रवीन्द्र व्यास 
पन्ना। /M.P./ टाइगर रिजर्व के बाघों  पर  वाइरस के संभावित खतरा को देखते हुए यहां के बाघों का रक्त परीक्षण किया जा रहा है । पार्क प्रबंधन को बाघों पर वाइरस  की जानकारी  तब लगी जब एक बाघ की मौत हो गई , जब उसकी  ऍफ़ एस  एल रिपोर्ट  आई  तो  उसमे मौत का कारण  सीडीए ब्रेन वायरस को बताया गया। इस रिपोर्ट के बाद सकते में आया टाइगर रिजर्व  का स्टाफ  अब बाघों के रक्त परीक्षण में जुट गया है । यह वाइरस कुत्तों में पाया जाता है ।
  
दो माह पूर्व टाइगर रिजर्व में पी-233 बाघिन की मौत हुई थी।प्रारंभिक जांच में मौत का कारणबाघों के आपसी संघर्ष को बताया गया था ।  एफएसएलरिपोर्ट में खुलाशा हुआ की  बाघिन की मौत  सीडीए ब्रेन वायरस के कारण हुई है । यहां के फील्ड डायरेक्टर आलोक कुमार बताते हैं की वायरस की  जानकारी  लगते  ही हमने इससे निपटने की  कार्य योजना बना  ली है। दिसम्बर से आसपासके गांवों में कुत्तों का  टीकाकरण अभियान चलाया जायेगा। इन जानवरों से ही यह वायरस पनपता है। जहां तक नये बाघ की सिफ्टिंगकी बात है तो उसमें कोई समस्या नहीं है वे भरोषा दिलाते हैं की पार्क सुरक्षित है।  7 बाघों के सेंपल में कोई वायरस नहीं मिला है । 

जिन  7 बाघों के रक्त  परीक्षण किया गया उसमे  किसी में भीवायरस नहीं पाया गया है । अब  टाइगर रिजर्व के सभी  बाघों का रक्त परीक्षण किया जा रहाहै । जिनके रक्त  नमूमों को जांच के लिये बरेली के रिसर्च सेंटर भेजा  गया है । पन्ना  के  टाइगर  रिजर्व में  भोपाल से आये  बाघ टी-7 को मिलाकर 34 बाघ हैं, पन्ना टाइगर रिजर्व का अधिकांश  इलाका आसपास के गाँवों से घिरा है । सीडीए ब्रेन वायरस  आवारा कुत्तों और मवेशियों में होता है। इन जानवरों के शिकार से यह वायरस एक्टिव होकर बाघ तक पहुंच जाता है। जिससे बाघ के ब्रेन में संक्रमण के कारण उसकी मौत हो जाती है। 

बाघ को सुरक्षित रखने  और सीडीए वासरस से निपटनेके लिये पार्क प्रबंधन ने  पार्क के कोर जोन से लगे 15 गांवों  के पालतू जानवरो ,  कुत्तों काटीकाकारण कराया  जाएगा।  दिसम्बर से टीकाकारण का विशेष अभियान प्रारंभ होगा।  यह कोई पहला मौका नहीं है जब पार्क को कुत्तो से बाघ को बचाने के लिए यह जातां करना पद रहा हो , इसका पहले भी एक बार इस तरह की स्थिति बनी थी । 

रवीन्द्र व्यास 
पन्ना टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश 
भारत 
vyasmedia@gmail.com

Nov 28, 2015

नेशनल कैडेट कोर कैम्प ओयल जनपद खीरी में पर्यावरण जागरूकता कार्यशाला


जंगल बाघ और बिली
ओयल-खीरी। नेशनल कैडेट कोर कैम्प, युवराजदत्त इंटर कालेज ओयल में आयोजित पर्यावरण कार्यशाला में जिले के तमाम विद्यालयों के छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में दुधवा लाइव के संस्थापक कृष्ण कुमार मिश्र ने पारिस्थितिकी तन्त्र में सभी जीव जंतुओं के महत्त्व पर चर्चा की और दुधवा टाइगर रिजर्व व् टाइगर मैन बिली अर्जन सिंह के बारे में बताया। 
कार्यक्रम में कर्नल देशराज पाण्डेय डॉ शशि प्रभा बाजपेयी डॉ संजय कुमार  ने कैडेट्स को  देश व् मानवता के लिए एन सी सी के महत्त्व के सन्दर्भ में चर्चा की।

कार्यक्रम में बिली अर्जन सिंह द्वारा बाघ व् तेंदुओं पर किए गए प्रयोगों पर चर्चा की गयी और बाघ का जंगलों के लिए क्या महत्त्व है तथा वन्य जीवन सरंक्षण पर विस्तार से बताया। बाघ की दुनिया भर में कितनी नस्ले है और बाघ के सरंक्षण में कितने प्रयास किए जा रहे है उस पर चर्चा हुई। गाँवों में जैवविविधता कितनी प्रभावित हुई और उसके मानवता को क्या क्या नुकसान है वह भी बताये गए। 

दुधवा लाइव डेस्क

Nov 17, 2015

मैली होती पन्ना की गंगा



बुंदेलखंड  का पन्ना जिला  अतीत की यादों को संजोय ऐसा जिला है जो मध्य प्रदेश में सबसे उपेक्षित है । इसी नगर  में एक नदी बहती है किलकिला , जिसका उदगम भी इसी जिले से होता है और विलीन भी इसी जिले में होती है ।  दुनिया भर में फैले प्रणामी सम्प्रदाय के लोगों के लिए किलकिला नदी गंगा की तरह पूज्य है । कुछ माह पहले इस नदी पर समाज सेवियों का बड़ा तामझाम दिखा  नदी बचाने की मुहीम शुरू की । नदी की जलकुम्भी भी साफ़ की  फोटो भी खिचाई पर उसके बाद ना तो इसमें मिलने वाले गटर रोके गए  और ना ही गंदगी साफ़ हुई । 


पन्ना जिले के बहेरा के समीप  छापर टेक पहाड़ी   से निकलने वाली यह किलकिला नदी पन्ना टाइगर रिजर्व से होती हुई  सलैया भापत पुर के मध्य  केन नदी में विलीन हो जाती है । जिले में ४५ किमी  बहने वाली यह नदी  केन नदी  पहले (5 किमी पूर्व ) यह  अपना नाम भी बदल लेती है । वहां लोग इसे माहौर नदी  नाम से जानते हैं । एक नदी के दो नाम  प्रायः कहीं सुनने में नहीं मिलते । सदियों से बाह रही इस  नदी को लेकर तरह तरह की किवदंतियाँ भी यहां खूब प्रचलित हैं । कहते हैं की जब घोड़ा इस नदी का पानी पी लेता तो घुड़सवार , और घुड़ सवार के पीने पर घोड़ा मर जाता था । स्वामी लाल दास ने अपने एक लेख में लिखा है की किलकिला नदी को कुढ़िया नदी भी कहते हैं , क्योंकि इस जल के उपयोग करने से  कोढ़ हो जाता था ।  एक और किवदंती यह भी है की यह नदी इतनी विषैली थी की  जब कोई पक्षी इसके ऊपर से निकलता था तो वह मर जाता था । 

   

388 वर्ष पूर्व नदी का जल बना अमृत :                                             

मान्यता है की  किकिला के इस विषैले जल को अमृत बनाया  निजानन्द सम्प्रदाय के प्राणनाथ जी ने । संवत 1684 में वे इसी किलकिला नदी के तट पर आये थे । यहाँ जब उन्हें  स्नान करने की इक्षा हुई तो स्थानीय आदिवासियों ने उन्हें इससे रोका था । उनके अंगूठे के स्पर्श मात्र से यह विषाक्त जल अमृत हो गया ।  वह स्थान आज भी अमराई घाट के नाम  से जाना जाता है ।  यह  स्थान  निजानन्द  सम्प्रदाय में  पवित्र स्थल माना जाता है । प्राण नाथ  यही बस गए  उनका प्राणनाथ  मंदिर   निजानन्द सम्प्रदाय के लोगों के लिए किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है , और किलकिला नदी उनके लिए गंगा की तरह पूज्यनीय है । इस सम्प्रदाय को मानने वाले दुनिया भर में फैले लोग  इस नदी का जल ले जाते हैं  । आज भी इस सम्प्रदाय से जुड़े लोगों की मृत्यु  के बाद उनकी अस्थियो को  नदी किनारे बने मुक्ति धाम में ही दफ़नाया  जाता  हैं ।  मान्यता है की इससे जीव को मुक्ति मिलती है । 

        
पन्ना की इस  किलकिला नदी के उद्धार के लिए नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष ब्रजेंद्र सिंह बुंदेला ने प्रयास किये थे ।  उनके जाने के बाद  इस ओर कोई प्रशासनिक प्रयास नहीं हुए ।  इस वर्ष कुछ स्वयं सेवी संघठनो ने नदी को जीवंत बनाने का प्रयास अवश्य किया । नदी की जलकुम्भी साफ़ की  खूब प्रचार प्रसार भी किया  पर नदी के हाल आज भी जस के तस बने हुए हैं । नदी में आज भी नगर की गन्दी नालियों का पानी मिल रहा है ।  जगह जगह कीचड़ के कारण आज यह दम तोड़ती नदी बन कर रह गई है । पिछले दिनों हमें मिले एक स्वयं सेवी संघटन के कर्ता  धर्ता  ने जरूर बतया था की  इस नदी के कायाकल्प के लिए  राजेन्द्र सिंह आएंगे , उनके नेतृत्व में इस नदी को साफ़ सुथरा किया जाएगा । 


देश में संस्कृतियों और नगरों का विकाश भले ही सरोवरों और नदियों के तट पर हुआ हो किन्तु आज के दौर में बोतल बंद पानी की संस्कृति ने वीराने में भी नगर बसा दिए और सरोवरों और नदियों को मारने का सिलसिला शुरू कर दिया । किलकिला नदी जिसके तट पर ही पन्ना नगर  की संस्कृति रची बसी है उसे ही समाप्त करने का सिलसिला जाने अनजाने बदस्तूर जारी है । 

रवीन्द्र व्यास 
vyasmedia@gmail.com

अमेरिका में खीरी जनपद का नाम रौशन किया सतपाल सिंह ने

"नेचर'स बेस्ट फोटोग्राफी एशिया अवार्ड्स 2015"

'लैंडस्केप’ श्रेणी में मिला प्रथम पुरस्कार व स्माल वर्ल्ड कैटेगरी में "हाइली आनर्ड विनर"

छह वर्ष के फोटोग्राफी करियर में पैंतीस राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार जीत चुके हैं
देश के युवा वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सतपाल सिंह को अमेरिका सरकार के स्मिथसोनियन नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ने नेचर फोटोग्राफी के लिए  प्रथम पुरस्कार देकर  सम्मानित किया। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी पुरस्कारों में से एक  "नेचर'स बेस्ट फोटोग्राफी एशिया अवार्ड्स 2015" में सतपाल के द्वारा खींची तस्वीर को लैंडस्केप डिवीज़न में "प्रथम पुरुस्कार" व स्माल वर्ल्ड कैटेगरी में एक तस्वीर  को "हाइली आनर्ड विनर" के लिए पुरस्कृत किया गया है। 


सतपाल उन पांच चयनित एशियाई विजेताओं में से एक थे जिन्हे यह सम्मान १२ नवम्बर की रात स्मिथसोनियन म्यूज़ियम, वाशिंगटन में जापान के सार्वजानिक मामलो के मंत्री व एम्बेसी प्रवक्ता श्री  मसातो ओटाका के हाथो दिया गया।  इस सम्मान  में सतपाल को पुरस्कार के साथ 1000 डॉलर (करीब पैंसठ हजार) की राशि देकर सम्मानित किया जायेगा।


ज्ञात हो कि इस प्रतियोगिता का आयोजन नेचर'स बेस्ट फोटोग्राफी पत्रिका,अमेरिका व  स्मिथसोनियन नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, वाशिंगटन डी सी , अमेरिका द्वारा किया जाता है। 
स्मिथसोनियन  नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम दुनिया का सबसे अत्याधिक भ्रमड़ किये जाने वाला नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम है।  प्रत्येक वर्ष इस म्यूजियम को देखने पूरे विश्व से करीब सात मिलियन (70 लाख) लोग पहुँचते है।


इस वर्ष सभी एशियाई देशों से पाँच वर्गों में पांच "कैटेगरी विनर्स" (प्रथम पुरस्कार) व 25 "हाइली आनर्ड विनर्स" चुने गए। इस वर्ष प्रथम पुरस्कार के लिए सतपाल सिंह व दो अन्य भारतीय सुयश केशरी तथा प्रमोद सी एल व अन्य देशों से तेत्सुजी अकिमोतो- जापान तथा मिंघु युआन -चाइना से चुने गए। भारतीय विजेताओं में सतपाल का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा क्योंकि उन्हें एक प्रथम पुरस्कार के साथ ही "हाइली आनर्ड विनर" के लिए भी चुना गया।


सतपाल की तस्वीर समेत सभी पुरस्कृत तस्वीरों को करीब एक वर्ष के लिए स्मिथसोनियन म्यूजियम में लगाया जायेगा तथा योकोहामा, जापान में अगस्त 2016 में प्रदर्शित किया जायेगा तथा भारत समेत कुछ  अन्य एशियाई देशों में भी प्रदर्शनी लगाने पर विचार किया जा रहा है।

अब तक भारत समेत अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, ग्रीस, सिंगापुर, रूस, मलेशिआ आदि देशों में करीब पैंतीस राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके सतपाल कई बार देश को गौरान्वित कर चुके हैं। कुछ माह पूर्व फ़्रांस में प्रतिष्ठित पर्यावरण फोटोग्राफी पुरस्कार "मेलवीटा नेचर इमेजेस अवार्ड्स 2014" में पूरे विश्व से 36 फोटोग्राफर्स चुने गए थे जिसमे एशिया से एक मात्र विजेता फोटोग्राफर सतपाल सिंह ही थे।
युवा फोटोग्राफर सतपाल सिंह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के अलीनगर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता जसवंत सिंह  खेती करते हैं।

पच्चीस वर्षीय सतपाल कहते हैं यह सम्मान पाना मेरे लिए कई मायनो में खास है और मुझे यह कहते हुए बहुत ख़ुशी है की  इसे प्राप्त करके मुझे देश का गौरव बढ़ाने व नेतृत्व करने का मौका मिला। 

दुधवा लाइव डेस्क 

Nov 10, 2015

बुंदेलों ने छीन लिया सुखनई का सुख




मऊरानीपुर से वापसी के साथ ' सुखनई ' के आंसू ले आया हूँ ! सोचा आपसे साझा कर लेवे ताकि हमें अपनी नदी सभ्यता और संस्कृति  पर गर्व हो सके ! अब है तो थोथा और छिछला ही ...चलिए जैसा भी है सहेजे रखिये ताकि समय के साथ और नदियाँ नालो में तब्दील हो सके ! 

सुखनई नदी की कहानी- कहाँ गया है बुन्देली आँख का पानी ! - आशीष सागर,बाँदा 

मऊरानीपुर - चन्देल कालीन इतिहास,विशाल तालाब और पोखरों से बुलंद बुंदेलखंड कभी अपने पानीदारी के लिए जाना जाता था ! विकास की आहट हुई और अन्य की तरह बुंदेले भी जल,जंगल,नदी -पहाड़ से उबकर कंक्रीट के सोपान पर चढने के लिए हाथापाई करने लगे...जब जिसको जैसा अवसर मिला उसने निर्बाध और अविरल बह रही नदियाँ को अपने मानवीय कृत्य से शर्मसार कर दिया. इतिहास नए रूप में बदल रहा है,अब हम क्योटो और मेक इन इंडिया से लेकर डिजीटल पावर की बात कर रहे है ! ये तब और अच्छा लगता है जब मार्क जुकर बर्ग यमुना के तीरे बसे ' ताज ' को देखने-समझने में लगे है ! वह कहते है कि ताज जैसा सुन्दर कोई नही मगर वही मार्क की नगर ताजमहल के पीछे समूचे आगरा का मैला ढो रही यमुना में नही गई जो मथुरा से दिल्ली तक के सफ़र में विकास के गंडासे से बेरहमी से काटी जा रही है ! 

कुछ ऐसे ही हाल है बुंदेलखंड के जिला झाँसी की तहसील मऊरानीपुर में बहने वाली सुखनई नदी के ! राजा मधुकरशाह ने इस नगरी को बसाया था जो अब मंदिरों की नगरी मऊरानीपुर के नाम से बसी है. बुंदेलखंड का 147 वर्ष पुराना जलविहार मेला महोत्सव हर वर्ष सुखनई के किनारे ही लगता है ! भव्य विमानों से लड्डू गोपाल का जलविहार होता है,पुरे शहर में शोभा यात्रा निकलने के बाद ये जलसा अपने चरम उन्माद पर होता है जिसको देखने और आयोजित करने में स्थानीय लोकसेवक से लेकर प्रतिनिधि,आला अधिकारी तक दिनरात एक करते है....ये सुखनई नदी मध्यप्रदेश से निकली है जो आगे चलकर महोबा के धसान में मिलती है.वैसे तो यह बरसाती नदी है लेकिन कभी अपनी निर्मलता और लाल बालू के लिए इसका यौवन देखते बनता था ! 



साल में भाद्रपक्ष में यह जलविहार मेला लगता है जिसमे करीब 15 दिवसीय कार्यक्रम होते है.सूत्र बतलाते है कि अबकी साल 60 लाख रूपये इस मेले में खर्च हुए है.स्थानीय नगर पालिका की अध्यक्ष मीरा आर्या है इनके पति हरिश्चंद्र पूर्व में अध्यक्ष रह चुके है...पिछले तीन पंचवर्षीय से एक ही परिवार में नगर पालिका खेल रही है.यहाँ से विधायक सपा रश्मि आर्या के पति जयप्रकाश आर्य उर्फ पप्पू सेठ ( अपरहन ,हत्या के दर्जन भर मामले में अभ्युक्त ) का जलजला अपने शबाब पर होता है जब इलाके की सरकारी मिशनरी को अपाहिज बनाना हो ! रश्मि आर्या के देवर  हेमन्त सेठ है.ये हाल ही में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ चुके है ! ...स्थानीय नागरिक इस सांप की पूछ को पकड़ना नही चाहते क्योकि उन्हें भी इलाकाई दुश्मनी से परहेज है ! 

सुखनई नदी पर अब तक लाखो रुपया चित्रकूट की मंदाकनी सरीखे घाट तैयार करने और संरक्षण के नाम पर गर्क किया गया है लेकिन इसकी सूरत और पानी की सीरत देखकर बस जी भरकर रोने को मन करता है ! ये गुमान उस पल छलनी हो जाता है कि नदी हमारी माँ है,हा नदी सभ्यता के अगुआ रहे है ! आज सुखनई गटर से बत्तर हाल में सिसक रही है.हलके के पत्रकार की कलम चुप है क्योकि उन्हें अपनी रोजमर्रा की घटनाए भी उकेरनी है ! एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र से जुड़े संवाददाता कहते है कि बीते सितम्बर के जलविहार मेले में नदी में इतना पानी नही था की लड्डू गोपाल विहार कर पाते ! एक तरफ हमारा सुबह का निर्मल भारत था और दूसरी तरफ नगर पालिका के सेवक सूअर विचरण कर रहे थे यह अलग बात है कि धरम के ठेकेदार इस दंभ में थे कि वे हिन्दू है और भगवान कृष्ण की लीला उनका मोक्ष अवश्य करेगी !

गौरोठा से सपा विधायक दीपनारायण ने नदी की हत्या करने को दिन -रात बालू उलीची जिससे नदी में आज काई,सिल्ट और गंदगी की सत्ता है ! खैर ये जो भी है ये कुछ वैसा ही जब हम माँ गंगा को निर्मल करने के अभियान में काशी की सड़के चिकनी कर रहे है,मगहर के घाट शव से दूर कर रहे है लेकिन सुखनई जैसी छोटी नदियों को जो वास्तव में आज भी गंगा से बेहतर विकल्प है किसान के लिए सींच के साधन का को अनदेखा करते जा रहे है....सुखनई रहेगी या नही कालांतर में ये विकास पर छोड़ देना आखिर हमें भी तो अगली सभ्यता को कुछ विरासत में देना है ...ये मैला ढोने वाली नदियाँ जिसका पानी अब आचमन के मुकाबिल भी नही रह गया है !

आशीष सागर 
सामाजिक कार्यकर्ता 
जिला-बांदा, बुंदेलखंड 
भारत 
ashish.sagar@bundelkhand.in

Nov 7, 2015

ग्रीनपीस इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द

ग्रीनपीस इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द, असहमति जताने के लिए गृह मंत्रालय का असहिष्णु प्रदर्शन

6 नवंबर, 2015। ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी को तमिलनाडु रजिस्टार ऑफ सोसाइटी ने एक नोटिस देकर बताया  गया है कि उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। इस वर्ष युनाइटेड नेशन के महासचिव सहित, दुनिया के अनेक गणमान्य लोगों ने कहा है कि सिविल सोसाइटी लोकतंत्र के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है; लेकिन यह नोटिस भारत सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के अभियान का एक और सबसे हालिया उदाहरण है। पिछले कई महीनों से ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी ने सरकार के विभिन्न महकमें द्वारा लगातार हमले सहे हैं और पुनः कानूनी विकल्प अपनाने पर मजबूर है।

रजिस्ट्रेशन के निरस्तीकरण के बारे में ग्रीनपीस इंडिया की अंतरिम निदेशक विनुता गोपाल का कहना है, “ यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु रजिस्ट्रार सोसाइटी पूरी तरह दिल्ली में बैठे गृह मंत्रालय के निर्देश पर काम कर रहा है जो काफी समय से ग्रीनपीस इंडिया को बंद कराने पर तुली हुई है। गृह मंत्रालय द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी और असहमति की आवाज को दबाने के यह अदक्ष प्रयास सरकार के लिए न सिर्फ देश में बल्कि विश्व स्तर पर शर्मिंदगी का सबसे बड़ा कारण बन गया है। यह इस बात को दर्शाता है कि सरकार किसी दूसरों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है और असहमति के प्रति बहुत ही असिहिष्णु है।”

विनुता ने आगे कहा, “रजिस्ट्रार ने यह फैसला ग्रीनपीस का पक्ष सुने बगैर ही ले लिया। रजिस्ट्रार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को भी नहीं माना है जिसमें उसे आदेश दिया गया था कि वो ग्रीनपीस द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और बिंदुओं पर गौर करे। यह कानूनी प्रक्रिया के उल्लधंन का बहुत ही निंदनीय प्रयास है, जिससे कानून के प्रति उनका निरादर प्रतीत होता है। हमारे पास मजबूत कानूनी आधार है जिसे हम मद्रास हाई कोर्ट को अवगत कराएगें, और इस नोटिस पर स्टे करने की मांग करेगें। हमें पूरा विश्वास है कि हमें कोर्ट से एक बार फिर न्याय मिलेगा।”

अविनाश कुमार,ग्रीनपीस
avinash.kumar@greenpeace.org

Nov 4, 2015

हांथियों को बचाने विदेशी जोड़ों की आटो रैली



इंग्लैण्ड व स्काटलैण्ड के 90 प्रतिभागी हुए शामिल 
कान्हा के लिए पन्ना से आज शुरू हुआ यह अनूठा सफर 
पन्ना, 3 नवम्बर का. 
बाघ संरक्षण के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो चुके म.प्र. के पन्ना जिले से हांथियों के संरक्षण हेतु अभिनव पहल शुरू हुई है. प्रकृति प्रेमी विदेशी जोडों द्वारा हाथियों को बचाने के लिए पन्ना से कान्हा तक आटो रैली निकाली गई है. इस रैली के माध्यम से हांथियों के संरक्षण हेतु फण्ड भी जुटाया जायेगा. इस अनूठी यात्रा में इंग्लैण्ड व स्काटलैण्ड के 90 प्रतिभागी आटो रिक्सा द्वारा पन्ना से बांधवगढ़ होते हुए कान्हा तक का सफर तय करेंगे. रैली में स्काटलैण्ड राजपरिवार के प्रिन्स मार्क व अन्य सदस्य भी शामिल हैं. पन्ना स्थित मोहननिवास कोठी से यह आटो रैली आज सुबह कान्हा के लिए रवाना हुई. 

पन्ना राजघराने की सदस्य श्रीमती दिव्यारानी सिंह व केशव प्रताप सिंह ने बताया कि यह अनूठी आटो रैली मार्कस सेण्ड की याद में निकाली गई है जो इंग्लैण्ड के राजकुमार प्रिंस चाल्र्स के साले हैं. इन्होंने वर्ष 1980 में तारा नाम की हथिनी में सवार होकर भारत का भ्रमण किया था और ऐलीफैन्ट कॉरीडोर की पहचान की थी. पिछले साल मार्कस सेण्ड का निधन हो गया, इसलिए हांथियों के प्रति उनके प्यार को देखते हुए यह जागरूता रैली उनकी स्मृति में निकाली गई है. विशेष बात यह है कि तारा हथिनी जिसमें सवार होकर उन्होंने कई वर्षांे तक भारत का भ्रमण किया था, वह हथिनी आज भी जीवित है. सुप्रसिद्ध पर्यावरण विद विलिन्डा राइट के कान्हा स्थित किपलिंग कंैप में यह हथिनी आज भी मौजूद है. 

इस आटो रैली के शुभारंभ अवसर पर मौजूद वाइल्ड लाइफ इन्स्टीट्यूट ऑफ इण्डिया के प्रमुख विवेक मैनन ने बताया कि हांथियों की तेजी से घट रही संख्या को देखते हुए असम के हांथियों को बचाने तथा उनके संरक्षण के लिए यह अनूठी यात्रा शुरू हुई है, जिसके माध्यम से फण्ड भी एकत्रित किया जायेगा. इस फण्ड का उपयोग हांथियों के संरक्षण में होगा. यह आटो रैली पन्ना से चलकर कल बांधवगढ़ पहुंचेगी तदुपरान्त कान्हा में 6 या 7 नवम्बर को इस रैली का समापन होगा. 

चार्टर्ड प्लेन से आये हैं यात्री 
आटो रैली में शामिल प्रतिभागी चार्टर्ड प्लेन से खजुराहो आये थे. वहां से बस द्वारा आज पन्ना के मोहननिवास कोठी पहुंचे. इनके लिए 45 आटो रिक्सा भोपाल से मंगाये गये थे, जिनमें सवार होकर विदेशी मेहमान कान्हा के लिए रवाना हुए. इनमें से कई प्रतिभागी ऐसे भी थे जो पहली बार आटो में सवार हुए, इसलिए उनका उत्साह देखते ही बन रहा था. 

चिकित्सा व सुरक्षा की है पूरी व्यवस्था 
आटो रैली में निकले विदेशी जोडों की सुरक्षा व चिकित्सा के खास इन्तजाम किये गये हैं. पूरी यात्रा में उनके निजी सुरक्षा गार्ड भी साथ - साथ चल रहे हैं. चूंकि यात्रा में कई प्रमुख हस्तियां व राजपरिवार के सदस्य शामिल हैं, इसलिए सभी जिलों के अधिकारियों को भी इस आटो रैली के संबंध में सूचना दे दी गई है. 

अरुण सिंह 
पन्ना, मध्य प्रदेश
भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

Nov 3, 2015

बाघ और जंगल बचेंगे तभी मानव बचेगा-सुश्री मेहदेले



मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले ने किया ’’ बाघों की वापसी’’ पुस्तक का विमोचन
बाघ पुर्नस्थापना की छठवीं वर्षगांठ पर होगा भव्य समारोह 
पन्ना, 2 नवम्बर 
पन्ना में बाघ पुर्नस्थापन परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। विश्व में अपने तरह की इस अनूठी परियोजना को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पन्ना टाईगर रिजर्व के तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति ने अपने अनुभवों को हमारे बाघों की वापसी पुस्तक में संजोया है। प्रदेश के स्थापना दिवस पर इस पुस्तक का समारोहपूर्वक विमोचन सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले मंत्री पशुपालन, पीएचई, ग्रामोद्योग, मछली पालन, विधि एवं विधायी कार्य ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पन्ना टाईगर रिजर्व तथा यहां के बाघ पन्ना की पहचान हैं। बाघ और जंगल बचेंगे तभी मानव का जीवन बचेगा। बाघ पुर्नस्थापन योजना की सफलता ने पन्ना को विश्वभर में चर्चित कर दिया है। इसके अनुभवों से जुडी पुस्तक पन्ना में बाघ संरक्षण का ऐतिहासिक दस्तावेज है।

मंत्री सुश्री मेहदेले ने कहा कि बाघ पुर्नस्थापन परियोजना की सफलता किसी चमत्कार से कम नही है। आमजनता के सहयोग तथा वन विभाग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के अथक प्रयासों से यह संभव हुआ है। इसका श्रेय श्रीनिवास मूर्ति जी को है। उन्होंने कहा कि पन्ना टाईगर रिजर्व आमजनता के सहयोग से बाघ संरक्षण का कार्य कर रहा है। इसके आसपास के गांव में रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित करने का भी प्रयास करें। पन्ना में बाघ बढे-पर्यटन बढे तथा लोगों को भरपूर रोजगार मिले ऐसी कार्ययोजना बनाए। उन्होंने बाघ संरक्षण का विस्तृत दस्तावेज तैयार करने तथा जंगल बुक की तरह सीरियल अथवा फिल्म बनाने का सुझाव दिया।

समारोह में सीसीएफ आर. श्रीनिवास मूर्ति ने कहा कि बाघ पुर्नस्थापना की सफलता के फलस्वरूप आज पन्ना में 32 बाघ हैं। इसकी सफलता को पुस्तक के रूप में पियूष सेकसरिया तथा सुश्री विद्या ने संजोया है। इसके प्रकाशन में आ रही कठिनाईयों को सतना के तत्कालीन कलेक्टर तथा वर्तमान में संचालक कृषि मोहनलाल मीणा ने दूर कराया। उनकी पहल पर सतना की एक सीमेन्ट फैक्ट्री के सहयोग से पुस्तक का प्रकाशन किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में 16 अप्रैल को बाघ पुर्नस्थापना की 6वीं वर्षगांठ पर शानदार समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें देश ही नही विदेशों के भी प्रतिनिधि शामिल होंगे। तब तक बाघ संरक्षण एवं पन्ना की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि में तैयार किए जा रहे ग्रंथ का पहला भाग प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने बाघ संरक्षण की सफलता में सहयोग देने के लिए जिले के राजनैतिक नेतृत्व, अधिकारियों, समाज सेवियों तथा आमजनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वन्य जीवों के शिकार पर आजीविका चलाने वाले पारधी समुदाय को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल करने तथा इनके बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार की उचित सुविधा देने का अनुरोध किया।

समारोह में संचालक कृषि मोहनलाल मीणा ने कहा कि पन्ना टाईगर रिजर्व के आसपास के गांव के किसानों की फसलों को वन्य प्राणियों से सुरक्षा देने के लिए शीघ्र ही खेतों में चेनलिंक फेसिंग करायी जाएगी। इसके लिए किसानों को शत प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। समारोह में पूर्व सांसद लोकेन्द्र सिंह ने केन वेतवा लिंक परियोजना से घट रहे नेशनल पार्क के 80 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र की प्रतिपूर्ति का सुझाव दिया। समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए.के. पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक आई.पी. अरजरिया, श्रीमती दिव्यारानी सिंह, सतानन्द गौतम, वन मण्डलाधिकारी संजय श्रीवास्तव तथा पत्रकार अरूण सिंह ने बाघ संरक्षण तथा पन्ना में बाघ पुर्नस्थापना की सफलता एवं पर्यटन विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में पुस्तक के लेखक पियूष तथा विद्या ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, नगरपालिका अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, सीजेएम बी.आर यादव, महारानी दिलहर कुमारी, पर्यावरण विद, समाज सेवी तथा वन विभाग के अधिकारी एवं नेचर केम्प से जुडे सैकडों विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

अरुण सिंह 
पन्ना टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश, भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

Nov 1, 2015

जब धरती थर्राई.....


नेपाल में आये हालिया भूकंप की एक बानगी....

सर्वे   भवन्तु   सुखिन:   सर्वे   सन्तु  निरामया: 
           सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:ख भाग्भवेत् 

अर्थात सभी सुखी होंसभी निरोगी होंसभी को शुभ दर्शन हों और कोई दु:ख से ग्रसित न हो, ऐसी भावना के साथ आप सभी को उस त्रासदी की कुछ तस्वीरें दिखा रहा हूँ, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त युवा फोटोग्राफर सतपाल सिंह ने नेपाल में आये भूकंप की विनाश लीला को अपने कैमरे में कैद किया, उनकी इस साहसिक यात्रा की हम प्रशंसा करते हैं, क्योंकि दुनिया इस शाश्वत सत्य को समझे और यह भी महसूस करे की भूकंप जाति धर्म और देश की सीमाओं से परे है, मानवता ही नहीं सभी जीव जंतु इस भयंकर त्रासदी को झेलते हैं यहाँ तक की निर्जीव वस्तुएं भी अपना स्वरूप बदल देती हैं, ये तस्वीरें त्रासदी के इतने दिनों बाद साझा करने का सिर्फ एक ही मकसद है हमारा, की हम अपने अतीत से सीखें और धरती की इस तकलीफ को भी समझ सकें जिसे हम अपने कृत्यों से उत्पन्न करते हैं, मानवजनित कारण जैसे सुरंग परियोजनाएं, नदियों को बाँधना यानी पुलों का निर्माण, परमाणु विस्फोट और पानी के लिए जमीन में लगातार होते सुराग, ये सब वजहें तो हैं ही इससे इतर भी तमाम इंसानी गतिविधियाँ धरती को थर्राने पर मजबूर कर देती हैं, नतीजतन इंसानों के अलावा न जाने कितने बेक़सूर जीव जंतु मारे जाते हैं हमारी कथित विकास योजनाओं की बलि बेदी पर.....धरती के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का एक एहसास चाहिए सभी से, ताकि जो धरती हमारा घर है वह सुन्दर और सहज रहे..आमेन 
---सम्पादक 



















सतपाल सिंह ( ख्याति प्राप्त वन्य जीव फोटोग्राफर, कई राष्ट्रीय व् अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित,  लखीमपुर खीरी जनपद के मोहम्मदी तहसील में निवास, मौजूदा वक्त में दिल्ली में एक प्रतिष्ठित फोटोग्राफी संस्थान में अध्यापन, इनसे satpalsinghwlcn@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं)


विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था