International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

May 30, 2010

सुनिये विविध भारती में दुधवा लाइव की बातें!

दुधवालाइव डेस्क* शनिवार २२ मई २०१० की शाम सात पैतालिस व रविवार २३ मई २०१० की सुबह सवा नौ बजे, भारत की सार्वजनिक क्षेत्र के रेडियो चैनल आकाशवाणी के मशहूर कार्यक्रम विविध भारती में दुधवा लाइव ई-पत्रिका के एक लेख का जिक्र किया गया। यह लेख था  "विश्व प्रवासी पक्षी दिवस- एक अदभुत यात्रा की दुखद कहानियां!"

May 26, 2010

बेटा देकर जा रहा हूं भाई...खयाल रखना

आशीष त्रिपाठी* बेटा देकर जा रहा हूं भाई...खयाल रखना
विछोह
-छह संतानों के पिता किशन ने बच्चे की तरह पाला हाथी को
-दुधवा लाते वक्त फूट कर रोए थे किशन के बीवी और बच्चे
-रोज फोन पर पूछते हैं अपने बिछड़े सुमित का हाल-चाल

खीरी में भी बसते हैं सोमालियाई डाकू!

विवेक सेंगर* खीरी में भी बसते हैं सोमालियाई डाकू
वह लोग करते हैं जहाजों का अपहरण-
यह करते हैं दूध के जहाज का अपहरण-
वह लेते हैं समुद्र की आड़-
यहां संरक्षण मिलता है नदियों का
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May 21, 2010

दुधवा में मिली अदभुत व अनजानी वनस्पति।

दुधवा टाइगर रिजर्व में एक अनजानी वनस्पति! - Calatropis acia-  कृष्ण कुमार मिश्र*
कुछ सुन्दर व दुर्लभ वनस्पतियां हमारे आस-पास मौजूद होने के बावजूद न चिन्हित होने के कारण काल के गर्त में समाती चली जा रही हैं, और हम उनके महत्व व लाभ से वछिंत रह जाते हैं। प्रकृति के इन रहस्यों में ही तो जीवन का सार है, यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसे कितना जान ले- इसी खोज की एक झलक मैं आप सब के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं, जो मुझे आनन्दित कर गई!----------------

May 20, 2010

चिड़ियों की तरह खाइये और जंगल बढ़ाइये!

दुधवा लाइव डेस्क* बायोलॉजिकल कन्जर्वेशन न्यूजलेटर की एक रपट के मुताबिक "चिड़ियों की तरह खाइये, और जंगल बढ़ाइये" कथन के बड़े गहरे मायने उजागर किए, सीधी बात ये है, कि मानव प्रजाति को छोड़कर सभी जीव प्रकृति प्रदत्त वृत्तियों के मुताबिक अपना जीवन जीते है, और यही कारण है, कि जहाँ मनुष्य नही होता है, वहाँ की पारिस्थितकी पूर्ण नियन्त्रण में होती है, ये जीव अपनी आदिम संस्कृति का पालन करते जा रहे है, थोड़े बहुत बदलाव के साथ!

May 19, 2010

एक जिस्म और दो जान- खीरी जिले की एक अनकही घटना!

कृष्ण कुमार मिश्र* दो फणों वाला अदभुत सर्प- नन्हा रसेल वाइपर -एक एतिहासिक घटना!

May 17, 2010

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस- एक अदभुत यात्रा की दुखद कहानियां!

कृष्ण कुमार मिश्र*  विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 8-9  मई 2010- संकटग्रस्त पक्षियों की सुरक्षा करें- प्रत्येक प्रजाति की गिनती हो!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था